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अधिक वसूले 4.73 लाख वापस करे डीवीवीएनएल
अमर उजाला वृंदावन
Updated Wed, 13 Apr 2016 11:29 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : demo
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दक्षिणाचंल विद्युत वितरण निगम (डीवीवीएनएल) द्वारा उपभोक्ता से नए विद्युत संयोजन के लिए एस्टिमेट से अधिक धनराशि जमा कराने के मामले में विद्युत उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम आगरा ने उपभोक्ता के हक में निर्णय दिया है। इस तरह के पहले मामले में निगम को आदेश दिया गया है कि अधिक वसूले 4.73 लाख रुपये वापिस करने के साथ उपभोक्ता को वाद व्यय के रूप में 500 रुपये भी अदा करें।
उपभोक्ता संरक्षण एवं कल्याण समिति के सचिव शशिभूषण मिश्र ने बुधवार को बताया कि कान्हा माखन पब्लिक स्कूल के प्रबंधक अनिल कुमार अग्रवाल और सचिव सुनील कुमार अग्रवाल ने दो नए विद्युत संयोजन के संबंध में अधिशासी अभियंता ग्रामीण विद्युत वितरण खंड प्रथम और चतुर्थ मथुरा के विरुद्ध फोरम में परिवाद दाखिल किया था। इसमें उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि निगम के अधिकारियों ने विद्युत नियामक आयोग द्वारा स्वीकृत कास्ट डाटा बुक में निर्धारित सामग्री मूल्य के स्थान पर रेस्पो दर पर मनमाना मूल्य लगाकर 70 प्रतिशत से अधिक सामग्री मूल्य जमा कराया है।
इस पर सुनवाई करते हुए फोरम के अधिशासी अभियंता व सदस्य लाइसेंसी सुनील चंद्र और सदस्य तकनीकी विनोद कुमार ने विद्युत विभाग द्वारा जमा कराई गई एस्टिमेट धनराशि को विद्युत नियामक आयोग, लखनऊ विद्युत लोकपाल के आदेश और उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के आदेशों के विपरीत माना। 28 मार्च को निगम को मामले में दोषी करार दिया गया। इसके बाद फोरम ने अपने पहले एस्टिमेट संबंधित परिवाद में आदेश दिया कि निगम उपभोक्ता को अधिक वसूले गए 4.73 लाख रुपये वापस करने के साथ वाद व्यय के लिए 500 रुपये अलग से भुगतान करें।
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उपभोक्ता संरक्षण एवं कल्याण समिति के सचिव शशिभूषण मिश्र ने बुधवार को बताया कि कान्हा माखन पब्लिक स्कूल के प्रबंधक अनिल कुमार अग्रवाल और सचिव सुनील कुमार अग्रवाल ने दो नए विद्युत संयोजन के संबंध में अधिशासी अभियंता ग्रामीण विद्युत वितरण खंड प्रथम और चतुर्थ मथुरा के विरुद्ध फोरम में परिवाद दाखिल किया था। इसमें उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि निगम के अधिकारियों ने विद्युत नियामक आयोग द्वारा स्वीकृत कास्ट डाटा बुक में निर्धारित सामग्री मूल्य के स्थान पर रेस्पो दर पर मनमाना मूल्य लगाकर 70 प्रतिशत से अधिक सामग्री मूल्य जमा कराया है।
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इस पर सुनवाई करते हुए फोरम के अधिशासी अभियंता व सदस्य लाइसेंसी सुनील चंद्र और सदस्य तकनीकी विनोद कुमार ने विद्युत विभाग द्वारा जमा कराई गई एस्टिमेट धनराशि को विद्युत नियामक आयोग, लखनऊ विद्युत लोकपाल के आदेश और उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के आदेशों के विपरीत माना। 28 मार्च को निगम को मामले में दोषी करार दिया गया। इसके बाद फोरम ने अपने पहले एस्टिमेट संबंधित परिवाद में आदेश दिया कि निगम उपभोक्ता को अधिक वसूले गए 4.73 लाख रुपये वापस करने के साथ वाद व्यय के लिए 500 रुपये अलग से भुगतान करें।
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