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शहर के पास होने की सजा भुगतेंगे 75 हजार किसान
महेश शर्मा
Updated Fri, 29 Jul 2016 11:58 PM IST
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खेती
- फोटो : ब्यूरो
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100 गांव के 75 हजार किसान शहर के पास होने की सजा भुगतेंगे। ये हल चलाते हैं। धरती का सीना चीरकर अनाज उगाते हैं। किसी के पास बीस बीघा जमीन है तो कोई पचास बीघा भूमि का काश्तकार है। लेकिन प्रशासन इन्हें किसान मानने को ही तैयार नहीं है।
प्रधानमंत्री ग्रामीण फसल बीमा योजना की जो सूची बनाई गई है उसमें से तीस ग्राम सभाओं के 100 गांव को बाहर कर दिया गया है। तर्क दिया जा रहा है कि ये गांव शहर के पास हैं और खेती नहीं कर रहे हैं। इनके गांवों तक शहरी आबादी पहुंचने लगी है। फ्लैट्स बन रहे हैं। कालोनियां तैयार हो रही हैं।
जनपद में 547 ग्राम सभाएं हैं जिनमें पंजीकृत किसानों की संख्या तकरीबन पांच लाख है। ये काश्तकार गेहूं, आलू, ज्वार, बाजरा, धान और सब्जियां उगाते हैं। किसान कभी सूखे की मार झेलते हैं तो कभी बाढ़ के पानी से फसलों को तबाह होते भी देखते हैं।
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लगातार होने वाले नुकसान की भरपाई को केंद्र सरकार ने महत्वाकांक्षी फसल बीमा योजना बनाई। जिले की 547 ग्राम सभाओं में से 504 को फसल बीमा योजना में शामिल कर लिया है मगर तीस ग्राम पंचायतों के 100 गांव (मजरे) छोड़ दिए गए हैं।
कहा गया कि फसल बीमा योजना के दायरे में शहर के करीब वाले ये गांव नहीं आ रहे हैं। अब इसे लेकर हल्ला मचने लगा है। ग्रामीण अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
ऐसे गांवों को बीमा योजना में शामिल नहीं किया गया, जो शहर के नजदीक हैं, और खेतों में प्लाटिंग हो रही है। ऐसी ग्राम सभाओं को योजना से दूर रखा गया है।
-राकेश बाबू, उप कृषि निदेशक, नोडल अधिकारी
इन गांव सभाओं को नहीं मिलेगा लाभ
सलेमपुर, नरहौली, मुकंदपुर, दतिया, नगला बोहरा, हकीमपुर, नगला माना, शाहपुर चैनपुरा, तारसी, भैंसा, नगरी, नगला चंद्रभान, मलिकपुर, कुरकंदा, सौसा, सींह, सीगों, शहदपुर, अमीरपुर, नगला काजी, बैगमपुर बांगर, अकबरपुर, सुहागपुर, ढकू, गोगा, थोक ज्ञान, सारस, मूरजा, गाजीपुर गांवों को बीमा योजना से महरूम कर दिया गया है। हालांकि यहां 90 फीसदी कृषि भूमि है और ग्रामीण कृषि का कार्य करते हैं।
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प्रधानमंत्री ग्रामीण फसल बीमा योजना की जो सूची बनाई गई है उसमें से तीस ग्राम सभाओं के 100 गांव को बाहर कर दिया गया है। तर्क दिया जा रहा है कि ये गांव शहर के पास हैं और खेती नहीं कर रहे हैं। इनके गांवों तक शहरी आबादी पहुंचने लगी है। फ्लैट्स बन रहे हैं। कालोनियां तैयार हो रही हैं।
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जनपद में 547 ग्राम सभाएं हैं जिनमें पंजीकृत किसानों की संख्या तकरीबन पांच लाख है। ये काश्तकार गेहूं, आलू, ज्वार, बाजरा, धान और सब्जियां उगाते हैं। किसान कभी सूखे की मार झेलते हैं तो कभी बाढ़ के पानी से फसलों को तबाह होते भी देखते हैं।
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लगातार होने वाले नुकसान की भरपाई को केंद्र सरकार ने महत्वाकांक्षी फसल बीमा योजना बनाई। जिले की 547 ग्राम सभाओं में से 504 को फसल बीमा योजना में शामिल कर लिया है मगर तीस ग्राम पंचायतों के 100 गांव (मजरे) छोड़ दिए गए हैं।
कहा गया कि फसल बीमा योजना के दायरे में शहर के करीब वाले ये गांव नहीं आ रहे हैं। अब इसे लेकर हल्ला मचने लगा है। ग्रामीण अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
ऐसे गांवों को बीमा योजना में शामिल नहीं किया गया, जो शहर के नजदीक हैं, और खेतों में प्लाटिंग हो रही है। ऐसी ग्राम सभाओं को योजना से दूर रखा गया है।
-राकेश बाबू, उप कृषि निदेशक, नोडल अधिकारी
इन गांव सभाओं को नहीं मिलेगा लाभ
सलेमपुर, नरहौली, मुकंदपुर, दतिया, नगला बोहरा, हकीमपुर, नगला माना, शाहपुर चैनपुरा, तारसी, भैंसा, नगरी, नगला चंद्रभान, मलिकपुर, कुरकंदा, सौसा, सींह, सीगों, शहदपुर, अमीरपुर, नगला काजी, बैगमपुर बांगर, अकबरपुर, सुहागपुर, ढकू, गोगा, थोक ज्ञान, सारस, मूरजा, गाजीपुर गांवों को बीमा योजना से महरूम कर दिया गया है। हालांकि यहां 90 फीसदी कृषि भूमि है और ग्रामीण कृषि का कार्य करते हैं।