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न किसान खुश और न ही व्यापारी
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 02 Feb 2017 12:25 AM IST
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नोटबंदी के बाद से हर वर्ग परेशान था। किसान अपनी बुवाई नहीं कर पाए और कारोबार, धंधे पूरी तरह से ठप पड़ गए। चुनावी मौसम में बजट आना था ऐसे में ब्रज के लोगों बजट से बड़ी राहत की उम्मीद लगा रखी थी।
बजट का सूटकेस खुला तो अरमान धरे के धरे रह गए। किसानों और व्यापारी समाज ने बजट पर निराशा जताई। हालांकि टैक्स एक्सपर्ट बजट को अच्छा बताते हैं। महिलाओं ने रसोई गैस की कीमतों में कटौती और नौकरीपेशा लोगों ने आयकर छूट की सीमा बढ़ाए जाने पर संतोष जताया।
पांच राज्यों के चुनावों के बीच में केंद्र सरकार का बजट आना था। इसको लेकर हर वर्ग आश्वस्त था कि सरकार लोगों को बड़ी राहत देगी। कैशलेस की मुहिम चला रही सरकार से उम्मीद थी कि वो आयकर छूट की सीमा को ढाई लाख से बढ़ाकर 5 लाख कर देगी। लेकिन यहां सरकार ने ये सीमा मात्र तीन लाख ही की।
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नोटबंदी से व्यापार और धंधे चौपट हो गए थे ऐसे में व्यापारियों को बड़ी उम्मीद थी। व्यापारी निराशा जताते हुए कहते हैं कि बजट में कोई कर न बढ़ाकर ही इतिश्री कर ली गई। आयकर छूट की सीमा बढ़ने और कर की दर घटने पर नौकरीपेशा लोगों ने जरूर बजट की सराहना की। हालांकि यहां भी उम्मीद से कुछ कम ही मिला। टैक्स एक्सपर्ट बोले बजट में कैशलेस इंडिया को लेकर मशक्कत हुई है। नगदी खरीद पर सीमा तय होना इसी एक्सरसाइज का हिस्सा है।
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बजट का सूटकेस खुला तो अरमान धरे के धरे रह गए। किसानों और व्यापारी समाज ने बजट पर निराशा जताई। हालांकि टैक्स एक्सपर्ट बजट को अच्छा बताते हैं। महिलाओं ने रसोई गैस की कीमतों में कटौती और नौकरीपेशा लोगों ने आयकर छूट की सीमा बढ़ाए जाने पर संतोष जताया।
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पांच राज्यों के चुनावों के बीच में केंद्र सरकार का बजट आना था। इसको लेकर हर वर्ग आश्वस्त था कि सरकार लोगों को बड़ी राहत देगी। कैशलेस की मुहिम चला रही सरकार से उम्मीद थी कि वो आयकर छूट की सीमा को ढाई लाख से बढ़ाकर 5 लाख कर देगी। लेकिन यहां सरकार ने ये सीमा मात्र तीन लाख ही की।
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नोटबंदी से व्यापार और धंधे चौपट हो गए थे ऐसे में व्यापारियों को बड़ी उम्मीद थी। व्यापारी निराशा जताते हुए कहते हैं कि बजट में कोई कर न बढ़ाकर ही इतिश्री कर ली गई। आयकर छूट की सीमा बढ़ने और कर की दर घटने पर नौकरीपेशा लोगों ने जरूर बजट की सराहना की। हालांकि यहां भी उम्मीद से कुछ कम ही मिला। टैक्स एक्सपर्ट बोले बजट में कैशलेस इंडिया को लेकर मशक्कत हुई है। नगदी खरीद पर सीमा तय होना इसी एक्सरसाइज का हिस्सा है।