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यमुना के लिए आमजन, सरकार समझें जिम्मेदारी: श्रीश्री रविशंकर
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Wed, 25 Feb 2015 12:04 AM IST
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आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता और आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने यमुना की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए कहा है कि श्रीकृष्ण की पटरानी यमुना महारानी आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही हैं। इसके लिए आमजन के साथ-साथ सरकार भी दोषी है। आम जनता गंदगी करती है और सरकार यमुना में गिरने वाले नालों को रोकने में विफल हुई है। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार से यमुना और गंगा शुद्धीकरण की अपेक्षा जताई।
श्रीश्री रविशंकर मंगलवार को संत कालोनी स्थित भक्ति निकेतन आश्रम में पत्रकारों से रूबरू हुए। आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि समय आ गया है जब सभी एकजुट होकर यमुना शुद्ध करने के लिए प्रयास करें। उन्होंने कहा कि दिल्ली के 17 नाले यमुना में सीधे मिल रहे हैं। वर्ष 2010 में उन्होंने यमुना को बचाने के लिए ‘मेरी दिल्ली-मेरी यमुना’ अभियान चलाया। यमुना से 500 टन कचरा निकाला। दिल्ली और केंद्र की सरकार से मिले लेकिन कोई सुधार नहीं आया।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि गंगा को शुद्ध और निर्मल बनाने से पहले यमुना का शुद्धीकरण जरूरी है। नई सरकार का मन देश की नदियों के शुद्धीकरण में है। इसके लिए नया मंत्रालय भी बनाया है। मोदी सरकार के बारे में अभी से टिप्पणी करना बेमानी होगी।
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उन्होंने कहा कि यमुना मुक्तिकरण अभियान और यमुना रक्षक दल दोनों मिलकर यमुना को शुद्ध बनाने के लिए आंदोलन करें तो उन्हें और भी खुशी मिलेगी।
यमुना शुद्धीकरण और मुक्तिकरण के लिए वह हरसंभव प्रयासों के साथ आंदोलन में सहभागिता करने के लिए तत्पर हैं। देश में सांप्रदायिक स्थिति के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यहां सभी का अपना-अपना धर्म है, सभी अपने धर्म को श्रेष्ठ मानें, लेकिन दूसरे धर्म पर कुठाराघात करना गलत है। वेदों के संरक्षण पर ध्यान देने की बात कहते हुए बोले कि वेदों में हमारी संस्कृति का दर्शन छिपा है। ब्रज-वृंदावन की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि गोसंरक्षण और संवर्धन के लिए यहां जनता को स्वचेतना से काम करना होगा।
इस अवसर पर महंत आदित्यानंद, चित्तप्रकाशानंद, महंत स्वतंत्रदेव सरस्वती, कमलदास, बलरामदास, सनत कुमारदास, देवस्वरूपानंद, वैराग स्वरूप, हनुमान प्रसाद धानुका विद्यालय के प्रबंधक पद्मनाभ गोस्वामी, प्रधानाचार्य अंजू सूद, होटल कृष्णम के डायरेक्टर विमल अरोड़ा, कल्याण कृष्ण शास्त्री उपस्थित रहे।
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श्रीश्री रविशंकर मंगलवार को संत कालोनी स्थित भक्ति निकेतन आश्रम में पत्रकारों से रूबरू हुए। आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि समय आ गया है जब सभी एकजुट होकर यमुना शुद्ध करने के लिए प्रयास करें। उन्होंने कहा कि दिल्ली के 17 नाले यमुना में सीधे मिल रहे हैं। वर्ष 2010 में उन्होंने यमुना को बचाने के लिए ‘मेरी दिल्ली-मेरी यमुना’ अभियान चलाया। यमुना से 500 टन कचरा निकाला। दिल्ली और केंद्र की सरकार से मिले लेकिन कोई सुधार नहीं आया।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि गंगा को शुद्ध और निर्मल बनाने से पहले यमुना का शुद्धीकरण जरूरी है। नई सरकार का मन देश की नदियों के शुद्धीकरण में है। इसके लिए नया मंत्रालय भी बनाया है। मोदी सरकार के बारे में अभी से टिप्पणी करना बेमानी होगी।
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उन्होंने कहा कि यमुना मुक्तिकरण अभियान और यमुना रक्षक दल दोनों मिलकर यमुना को शुद्ध बनाने के लिए आंदोलन करें तो उन्हें और भी खुशी मिलेगी।
यमुना शुद्धीकरण और मुक्तिकरण के लिए वह हरसंभव प्रयासों के साथ आंदोलन में सहभागिता करने के लिए तत्पर हैं। देश में सांप्रदायिक स्थिति के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यहां सभी का अपना-अपना धर्म है, सभी अपने धर्म को श्रेष्ठ मानें, लेकिन दूसरे धर्म पर कुठाराघात करना गलत है। वेदों के संरक्षण पर ध्यान देने की बात कहते हुए बोले कि वेदों में हमारी संस्कृति का दर्शन छिपा है। ब्रज-वृंदावन की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि गोसंरक्षण और संवर्धन के लिए यहां जनता को स्वचेतना से काम करना होगा।
इस अवसर पर महंत आदित्यानंद, चित्तप्रकाशानंद, महंत स्वतंत्रदेव सरस्वती, कमलदास, बलरामदास, सनत कुमारदास, देवस्वरूपानंद, वैराग स्वरूप, हनुमान प्रसाद धानुका विद्यालय के प्रबंधक पद्मनाभ गोस्वामी, प्रधानाचार्य अंजू सूद, होटल कृष्णम के डायरेक्टर विमल अरोड़ा, कल्याण कृष्ण शास्त्री उपस्थित रहे।