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Mathura News: सांसद भी नहीं दिला पाईं बंदरों की समस्या से निजात, वादे रह गए अधूरे
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मथुरा। डैंपियर नगर के समीप लगा बंदरों का झुंड।
- फोटो : mathura
मथुरा। शहर में उत्पात मचा रहे बंदरों से निजात दिलाने के लिए मथुरा की सांसद हेमामालिनी ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान मथुरा में मंकी सफारी बनवाने का वायदा किया था। उन्होंने वृंदावन के धर्माचार्यों को इस बाबत एक शपथ पत्र भी सौंपा था लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी ये कसमें वायदे पूरे नहीं हो सके। यह समस्या जस की तस है। हालांकि सांसद ने यह मामला लोकसभा में उठाया पर अभी तक कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला है।
मथुरा में बंदरों से लोग बुरी तरह से परेशान हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बंदरों का मुद्दा वृंदावन के संत एवं धर्माचार्यों ने जोरशोर से उठाया था। आचार्य मृदुलकांत शास्त्री की अगुवाई में आंदोलन कर लोगों ने हेमामालिनी को ज्ञापन सौंपा। चुनाव बहिष्कार का एलान तक कर डाला था। आचार्य मृदुलकांत ने बताया कि हेमामालिनी ने उन्हें शपथ पत्र देते हुए बंदरों की समस्या से मुक्ति दिलाने का वादा किया था, लेकिन यह वायदा अब तक भी पूरा नहीं हुआ।
ठंडे बस्ते में गया सौ करोड़ का प्रस्ताव
मंकी सफारी बनाने के लिए यहां पहल तो हुई पर अभी तक बात नहीं बनी। वर्ष 2021 में मथुरा में देश का पहला मंकी सफारी बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। 100 करोड़ के इस प्रस्ताव में दस साल के लिए सफारी में बंदरों की देखरेख, भोजन आदि की व्यवस्था शामिल की गई थी। फरह के समीप नगला अकोस में जमीन भी चिह्नित कर ली गई, लेकिन शासन ने इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस प्रस्ताव की स्वीकृत कराने में जिले के जनप्रतिनिधियों ने भी प्रयास नहीं किए नहीं शासन स्तर पर इस मुद्दे को रखा।
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महंत फूलडोल बिहारी दास एवं आचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने कहा कि बंदरों के उत्पात की समस्या पहले शहर तक सीमित थी, लेकिन अब पूरे जिले की समस्या बन गई है। बंदर न सिर्फ स्थानीय लोगों और यहां देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को नुकसान पहुंच रहे हैं बल्कि किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचाने लगे हैं। यदि बंदरों की बढ़ती संख्या में नियंत्रण नहीं किया और मंकी सफारी नहीं बनाई तो यह समस्या और विकराल हो जाएगी।
निदान का पूरा प्रयास कर रहे हैं : हेमा
शुक्रवार को वृंदावन आईं सांसद हेमामालिनी ने बंदरों की समस्या पर बात की। उन्होंने कहा कि मथुरा के लोगों को बंदरों से निजात दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार स्तर पर भी बात रखी गई है। कुछ तकनीकी पेच फंसे हैं लेकिन जल्द ही इस समस्या को दूर करने के लिए गंभीरता से काम शुरू होगा। सरकार खुद भी इसके प्रति गंभीर है।
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मथुरा में बंदरों से लोग बुरी तरह से परेशान हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बंदरों का मुद्दा वृंदावन के संत एवं धर्माचार्यों ने जोरशोर से उठाया था। आचार्य मृदुलकांत शास्त्री की अगुवाई में आंदोलन कर लोगों ने हेमामालिनी को ज्ञापन सौंपा। चुनाव बहिष्कार का एलान तक कर डाला था। आचार्य मृदुलकांत ने बताया कि हेमामालिनी ने उन्हें शपथ पत्र देते हुए बंदरों की समस्या से मुक्ति दिलाने का वादा किया था, लेकिन यह वायदा अब तक भी पूरा नहीं हुआ।
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ठंडे बस्ते में गया सौ करोड़ का प्रस्ताव
मंकी सफारी बनाने के लिए यहां पहल तो हुई पर अभी तक बात नहीं बनी। वर्ष 2021 में मथुरा में देश का पहला मंकी सफारी बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। 100 करोड़ के इस प्रस्ताव में दस साल के लिए सफारी में बंदरों की देखरेख, भोजन आदि की व्यवस्था शामिल की गई थी। फरह के समीप नगला अकोस में जमीन भी चिह्नित कर ली गई, लेकिन शासन ने इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस प्रस्ताव की स्वीकृत कराने में जिले के जनप्रतिनिधियों ने भी प्रयास नहीं किए नहीं शासन स्तर पर इस मुद्दे को रखा।
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महंत फूलडोल बिहारी दास एवं आचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने कहा कि बंदरों के उत्पात की समस्या पहले शहर तक सीमित थी, लेकिन अब पूरे जिले की समस्या बन गई है। बंदर न सिर्फ स्थानीय लोगों और यहां देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को नुकसान पहुंच रहे हैं बल्कि किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचाने लगे हैं। यदि बंदरों की बढ़ती संख्या में नियंत्रण नहीं किया और मंकी सफारी नहीं बनाई तो यह समस्या और विकराल हो जाएगी।
निदान का पूरा प्रयास कर रहे हैं : हेमा
शुक्रवार को वृंदावन आईं सांसद हेमामालिनी ने बंदरों की समस्या पर बात की। उन्होंने कहा कि मथुरा के लोगों को बंदरों से निजात दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार स्तर पर भी बात रखी गई है। कुछ तकनीकी पेच फंसे हैं लेकिन जल्द ही इस समस्या को दूर करने के लिए गंभीरता से काम शुरू होगा। सरकार खुद भी इसके प्रति गंभीर है।