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बूढ़ा शरीर, कांपती काया.. लठामार होली का जोश भर आया

Sat, 18 Feb 2017 11:55 PM IST
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा Updated Sat, 18 Feb 2017 11:55 PM IST
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enthusiasm in old persones for holi
Holi In Mathura (‌file photo)
घुटने कमजोर हो गए, घर का काम भी नहीं होता। इनकी सुबह और रात दवा के साथ हो रही है। लेकिन लठामार होली का जिक्र होते ही जोश से भर जाती हैं बरसाना की बुजुर्ग महिलाएं। कहती हैं, होली तो तब तक खेलेंगे जब तक शरीर में जान है। नंदगांव के बुजुर्ग भी पूरे उत्साह के साथ तैयारी में लगे हैं। कहते हैं, बरसाना जाकर यदि होली नहीं खेली तो ऐसा लगता है कि मानो उन्होंने अपने कान्हा से दूरी बना ली हो।
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बरसाना की लठामार होली का जिक्र सुनने भर से ही त्योहार की मस्ती छाने लगती है। यदि कभी कोई बरसाना पहुंचकर इस होली के रंग में रंग गया तो उनकी ख्वाहिश हर होली पर यहीं आने की रहती है। तमाम शहरों से लोग इस रंगोत्सव को देखने के लिए पहुंचते भी हैं। लेकिन जरा उनके उत्साह को भी जान लीजिए जो शरीर से भले ही कमजोर हो गए लेकिन लठामार होली के लिए पूरी तैयारियों में हैं।
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यदि किसी को कोई दिक्कत है तो दवा लेनी शुरू कर दी है। बरसाना की जमुना देवी (68) के पैरों में तकलीख रहती है। लेकिन जब उनकी बहुओं ने होली का जिक्र किया तो वह भी तैयार हो गईं। कहने लगीं, चाहें कुछ भी हो जाए होली खेलने के लिए जरूर जाऊंगी। दर्द अपनी जगह है लेकिन होली तो साल भर का त्योहार है। उसे हम नहीं छोड़ सकते।
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गोपी स्वरूप में होली खेलने से जो आनंद प्राप्त होता है वह कहीं नहीं मिलता। चंद्रक्रांता गोस्वामी की उम्र 60 साल से ऊपर है। कमर में दर्द रहता है। सुबह-शाम दवा लेती हैं। लेकिन नंदगांव के कृष्ण स्वरूप ग्वालों के साथ होली खेलने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता। इस बार भी पूरी उमंग के साथ त्योहार मनाने की तैयारी कर रही हैं। इधर, नंदगांव के बुजुर्ग हुरियारों का जोश भी देखते ही बनता है।


श्यामलाल शर्मा (75) कहते हैं कि यह हमारी परंपरा है, होली तो खेलनी ही है। परिवार के लोगों के साथ जाएंगे। राधाबल्लभ गोस्वामी (70) भी होली की तैयारियों में हैं। कहते हैं, पहले बरसाना तक पैदल चलकर जाया करते थे यदि इस बार संभव नहीं हुआ तो किसी सवारी से चले जाएंगे। ब्रजेंद्र शास्त्री (78) का कहना है कि लठामार होली आते ही बूढ़ी काया में भी जोश भरने लगता है। आखिर कृष्ण भक्ति का त्योहार है। कान्हा का नाम लेते ही शरीर में ताकत आ जाती है।
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