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Mathura News: यमुना घाटों पर अतिक्रमण, कैसे हों विकास कार्य
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मथुरा। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने मथुरा शहर में यमुना के 20 घाटों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना शासन को भेजी है, लेकिन यह कार्ययोजना धरातल पर कैसे उतरेगी, यह देखना बाकी है। शहरी क्षेत्र में ऐसा कोई घाट नहीं है, जहां अनाधिकृत निर्माण और अतिक्रमण न हो, ऐसे में घाटों को अतिक्रमण मुक्त कराना खासी चुनौती होगा।
उप्र सरकार ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण से यमुना रिवर फ्रंट की कार्ययोजना मांगी थी, जिसके जवाब में गुरुवार को यह कार्ययोजना शासन को भेजी गई। विश्राम घाट से कंस किला तक 680 मीटर और बंगाली घाट से सती घाट तक 440 मीटर का क्षेत्रफल चिन्हित किया गया है। इस क्षेत्रफल में करीब बीस घाट आ रहे हैं, लेकिन ये घाट वर्तमान में दुर्दशा का शिकार हैं। सबसे बड़ा सवाल यमुना किनारे होने वाले अवैध निर्माण और अतिक्रमण का है। इन घाटों पर कहीं किसी ने कमरा बना रखा है तो किसी ने चबूतरा बना रखा है।
हालांकि करीब दस माह पूर्व भी यमुना किनारे से अवैध निर्माण और अतिक्रमण को एनजीटी के निर्देश पर हटाया गया था, लेकिन उस अभियान का कोई खार्स फर्क देखने को नहीं मिला। इन घाटों की हालत सुधारने के लिए कार्ययोजना को शासन की हरी झंडी मिलने के बाद अमल में लाया जाएगा। इसमें सबसे पहला कदम इन घाटों का सर्वे कराना होगा।
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यमुना में गिरने वाले नालों का प्रबंधन होगा
यमुना नदी में गिर रहे नालों की शिकायत पर नगर निगम मथुरा-वृंदावन के अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार, महाप्रबंधक जल, अधिशासी अभियंता निर्माण, क्षेत्रीय सफाई एवं खाद्य निरीक्षक के अलावा यमुना कार्ययोजना के याचिकाकर्ता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने घाटों का निरीक्षण किया।
यमुना में जाने वाले नालों का कचरा एवं अशुद्ध जल को रोकने के लिए मसानी पंपिंग स्टेशन, विश्राम घाट, असकुंडा घाट आदि स्थानों पर स्थित नालों को जाली लगवाकर टैपिंग कराए जाने तथा नाले के पानी को शोधन कर यमुना में प्रवाहित किया जाने के लिए निर्देशित किया गया।
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उप्र सरकार ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण से यमुना रिवर फ्रंट की कार्ययोजना मांगी थी, जिसके जवाब में गुरुवार को यह कार्ययोजना शासन को भेजी गई। विश्राम घाट से कंस किला तक 680 मीटर और बंगाली घाट से सती घाट तक 440 मीटर का क्षेत्रफल चिन्हित किया गया है। इस क्षेत्रफल में करीब बीस घाट आ रहे हैं, लेकिन ये घाट वर्तमान में दुर्दशा का शिकार हैं। सबसे बड़ा सवाल यमुना किनारे होने वाले अवैध निर्माण और अतिक्रमण का है। इन घाटों पर कहीं किसी ने कमरा बना रखा है तो किसी ने चबूतरा बना रखा है।
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हालांकि करीब दस माह पूर्व भी यमुना किनारे से अवैध निर्माण और अतिक्रमण को एनजीटी के निर्देश पर हटाया गया था, लेकिन उस अभियान का कोई खार्स फर्क देखने को नहीं मिला। इन घाटों की हालत सुधारने के लिए कार्ययोजना को शासन की हरी झंडी मिलने के बाद अमल में लाया जाएगा। इसमें सबसे पहला कदम इन घाटों का सर्वे कराना होगा।
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यमुना में गिरने वाले नालों का प्रबंधन होगा
यमुना नदी में गिर रहे नालों की शिकायत पर नगर निगम मथुरा-वृंदावन के अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार, महाप्रबंधक जल, अधिशासी अभियंता निर्माण, क्षेत्रीय सफाई एवं खाद्य निरीक्षक के अलावा यमुना कार्ययोजना के याचिकाकर्ता गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने घाटों का निरीक्षण किया।
यमुना में जाने वाले नालों का कचरा एवं अशुद्ध जल को रोकने के लिए मसानी पंपिंग स्टेशन, विश्राम घाट, असकुंडा घाट आदि स्थानों पर स्थित नालों को जाली लगवाकर टैपिंग कराए जाने तथा नाले के पानी को शोधन कर यमुना में प्रवाहित किया जाने के लिए निर्देशित किया गया।