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अधिकारी सोते रहे परिक्रमा मार्ग पर निर्माण होते रहे
अशोक दुबे/अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 09 Mar 2017 11:54 PM IST
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अफसर फंसे तो चला एक्शन का ‘चाबुक’
- फोटो : अमर उजाला
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परिक्रमा मार्ग और गिरिराज पर्वत के बीच बने जिन मकानों को प्रशासन अब अवैध बता रहा हैं वह कोई आज के नहीं बल्कि दस-दस साल पुराने हैं। तब किसी ने ध्यान दिया नहीं। अब जब एनजीटी का आदेश हुआ तो अधिकारियों की नींद टूटी और नियम-कानून का हवाला देकर कार्रवाई शुरू कर दी।
दरअसल परिक्रमा मार्ग के आसपास तमाम निर्माण हो गए हैं। दुकानें बन गईं हैं। मकान खड़े हैं। तमाम निर्माण तो सरकारी भूमि पर ही हो गए। लेकिन अफसर आंखें मूंदे पड़े रहे। किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। अगर उसी वक्त इन लोगों को हटा दिया जाता तो शायद यह नौबत ही नहीं आती। लेकिन प्रशासन की नींद तो तब टूटी जब बड़े अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटकी। अधिकारी दौड़ पड़े राधाकुंड को। कई दिनों तक वहां रहकर प्लानिंग की गई।
मुन्नी देवी का कहना है कि उनका परिवार कई वर्षों से यहां रह रहा है। उन्होंने तो जमीन खरीदी थी। बैनामा है उनके पास। फिर प्रशासन कैसे अवैध बता रहा है। कमलेश का कहना था कि आज तक किसी ने नहीं बताया कि उनका मकान अवैध है। अब अचानक यह बात कहां से आ गई। संतोष का कहना था कि उनके पास तो रजिस्ट्री है मकान की। अगर जमीन अवैध थी तो फिर रजिस्ट्री कैसे हो गई। सुरेंद्र का कहना था कि प्रशासन को पहले नोटिस देना चाहिए था। अधिकारी पुलिस लेकर पहुंच गए और मकान को तोड़ना शुरू कर दिया। अब वह लोग अपने बच्चों को लेकर कहां जाएं। लागत से मकान बनवाया था।
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पुलिस ने घरों से निकाल-निकालकर पीटा
पुलिस ने लोगों को घरों से निकालकर पीटा। महिलाओं तक को नहीं बख्शा गया। जो रास्ते में मिल गया पुलिस वाले उसी पर टूट पड़े। कई राहगीर भी पुलिस के गुस्से का शिकार हो गए थे। परिक्रमा लगाने पहुंचे भक्त भी डरे हुए थे। जब तक बवाल खत्म नहीं हो गया था परिक्रमार्थी रुके रहे। बताया गया कि बच्चू सिंह, रुपवती, पूरन सिंह को काफी चोट आई है।
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दरअसल परिक्रमा मार्ग के आसपास तमाम निर्माण हो गए हैं। दुकानें बन गईं हैं। मकान खड़े हैं। तमाम निर्माण तो सरकारी भूमि पर ही हो गए। लेकिन अफसर आंखें मूंदे पड़े रहे। किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। अगर उसी वक्त इन लोगों को हटा दिया जाता तो शायद यह नौबत ही नहीं आती। लेकिन प्रशासन की नींद तो तब टूटी जब बड़े अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटकी। अधिकारी दौड़ पड़े राधाकुंड को। कई दिनों तक वहां रहकर प्लानिंग की गई।
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मुन्नी देवी का कहना है कि उनका परिवार कई वर्षों से यहां रह रहा है। उन्होंने तो जमीन खरीदी थी। बैनामा है उनके पास। फिर प्रशासन कैसे अवैध बता रहा है। कमलेश का कहना था कि आज तक किसी ने नहीं बताया कि उनका मकान अवैध है। अब अचानक यह बात कहां से आ गई। संतोष का कहना था कि उनके पास तो रजिस्ट्री है मकान की। अगर जमीन अवैध थी तो फिर रजिस्ट्री कैसे हो गई। सुरेंद्र का कहना था कि प्रशासन को पहले नोटिस देना चाहिए था। अधिकारी पुलिस लेकर पहुंच गए और मकान को तोड़ना शुरू कर दिया। अब वह लोग अपने बच्चों को लेकर कहां जाएं। लागत से मकान बनवाया था।
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पुलिस ने घरों से निकाल-निकालकर पीटा
पुलिस ने लोगों को घरों से निकालकर पीटा। महिलाओं तक को नहीं बख्शा गया। जो रास्ते में मिल गया पुलिस वाले उसी पर टूट पड़े। कई राहगीर भी पुलिस के गुस्से का शिकार हो गए थे। परिक्रमा लगाने पहुंचे भक्त भी डरे हुए थे। जब तक बवाल खत्म नहीं हो गया था परिक्रमार्थी रुके रहे। बताया गया कि बच्चू सिंह, रुपवती, पूरन सिंह को काफी चोट आई है।