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‘हिंसक रास्ता छोड़ें युवा जाट’
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 23 Feb 2016 11:08 PM IST
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जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेताओं ने हिंसक रास्ता छोड़ने की अपील की है। संयुक्त जाट आरक्षण संघर्ष समिति और अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के लोगों ने केंद्र सरकार द्वारा किए गए वादे को पूरा करने का समय देने को कहा।
संयुक्त जाट आरक्षण संघर्ष समिति की हाईवे स्थित चंद्रलेखा कांपलेक्स पर बैठक हुई। इसमेें महासचिव महावीर सिंह परिहार, जिलाध्यक्ष सिकंदर सिंह, जिला महासचिव सत्यवीर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष एचपी सिंह परिहार की जाट आरक्षण को लेकर हुई वार्ता के बाद सरकार ने जाटों की मांगे मान ली हैं।
आगामी वित्तीय बजट में इसकी घोषणा कर दी जाएगी। जाट नेताओं ने युवा जाटों से हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति की अपील की है। बैठक में महेश परिहार, बाबा धनपाल सिंह, कृष्णवीर सिंह, चंद्रवीर सिंह भरंगर, बाबू सिंह, डिगम्बर सिंह, बहादुर सिंह, सतीश, गजेन्द्र परिहार, राजकुमार, दिनेश प्रधान आदि ने संबोधित किया।
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दूसरी ओर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय महासचिव वीरपाल सिंह ने कहा कि समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी यशपाल मलिक की केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और अन्य केन्द्रीय मंत्रियों से वार्ता हो चुकी है। इसके बाद आंदोलन और हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला लिया गया है। केन्द्र सरकार ने जाटों को आरक्षण देने की संसदीय तौर पर घोषणा करने का आश्वासन दिया है। सरकार को इसके लिए समय देना चाहिए।
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संयुक्त जाट आरक्षण संघर्ष समिति की हाईवे स्थित चंद्रलेखा कांपलेक्स पर बैठक हुई। इसमेें महासचिव महावीर सिंह परिहार, जिलाध्यक्ष सिकंदर सिंह, जिला महासचिव सत्यवीर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष एचपी सिंह परिहार की जाट आरक्षण को लेकर हुई वार्ता के बाद सरकार ने जाटों की मांगे मान ली हैं।
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आगामी वित्तीय बजट में इसकी घोषणा कर दी जाएगी। जाट नेताओं ने युवा जाटों से हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति की अपील की है। बैठक में महेश परिहार, बाबा धनपाल सिंह, कृष्णवीर सिंह, चंद्रवीर सिंह भरंगर, बाबू सिंह, डिगम्बर सिंह, बहादुर सिंह, सतीश, गजेन्द्र परिहार, राजकुमार, दिनेश प्रधान आदि ने संबोधित किया।
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दूसरी ओर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय महासचिव वीरपाल सिंह ने कहा कि समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी यशपाल मलिक की केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और अन्य केन्द्रीय मंत्रियों से वार्ता हो चुकी है। इसके बाद आंदोलन और हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला लिया गया है। केन्द्र सरकार ने जाटों को आरक्षण देने की संसदीय तौर पर घोषणा करने का आश्वासन दिया है। सरकार को इसके लिए समय देना चाहिए।