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Mathura News: पहले भिक्षावृत्ति से होता था गुजारा, अब बन रहीं आत्मनिर्भर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jun 2023 12:10 AM IST
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Earlier used to survive by begging, now becoming self-sufficient
वृंदावन। पति के देहांत के बाद बेसहारा हुईं विधवाएं कृष्ण की नगरी में तो आ गईं, लेकिन गुजारा करने के लिए किसी के घर में बर्तन मांज रही थीं तो कहीं मंदिरों के पास हाथ फैलाकर जीवन यापन कर रही थीं पर अब स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
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नगर में सरकार द्वारा संचालित दो विधवा आश्रम हैं। आधा दर्जन निजी आश्रम भी हैं, जहां वृद्ध हो चुकी विधवाओं को सम्मानजनक रखा जाता है। चैतन्य विहार स्थित महिला आश्रय सदन में 300 विधवाएं निवासरत हैं। इनमें ज्यादातर पश्चिम बंगाल से हैं, जबकि उड़ीसा, मध्यप्रदेश, असम, बिहार की महिलाएं भी जीवन यापन कर रही हैं। यहां रहने वाली महिलाओं को 1850 रुपये प्रति माह खाद्य और जेब खर्च मिलता है जोकि महिला कल्याण निगम की ओर से उनके खाते में भेजा जाता है।
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अंत्योदय राशन कार्ड बने हैं, जिस पर निशुल्क गेहूं, चावल ओर चीनी मिलती है। एक हजार रुपये पेंशन भी सरकार की ओर से दी जा रही है। अक्षय पात्र से सुबह का भोजन आता है और शाम को संतोष आश्रम से चाय-टोस्ट मिलता है। आश्रय सदन में ही ब्रज वृंदा प्रचार समिति द्वारा बिहारीजी मंदिर से फूल लाकर दिए जाते हैं, जिनसे अगरबत्ती बनाने का काम ये महिलाएं करती हैं। इनको प्रशिक्षण भी समिति द्वारा दिया जाता है, जिसकी एवज में प्रतिदिन 50 रुपये मेहनताना दिया जाता है।
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पश्चिम बंगाल के जिला लुधिया के माटी हाड़ी की रहने वाली अनु हलधर 2002 में वृंदावन आ गईं। 68 वर्षीय अनु मंदिरों के पास भिक्षावृत्ति करने लगीं, लेकिन जब उन्हें आश्रय सदन की जानकारी हुई तो वे यहां चली आईं, तब से वह यहीं रहकर कृष्ण भक्ति करती हैं।

शिवानी मंडल
कांथी की रहने वाली शिवानी मंडल पति के देहांत के बाद वृंदावन आईं और गुजर बसर करने के लिए झाडू-बर्तन साफ का काम करने लगीं। 2008 में वह आश्रय सदन पहुंची और अब तक वहीं हैं। पैर टूटने के कारण रॉड डाल दी गई है, इसलिए भजन और भोजन के सहारे प्रभु का नाम लेकर जीवन बिता रही हैं।


कृष्णा कुटीर में हैं 187 महिलाएं
रामताल रोड पर बने कृष्णा कुटीर में 187 वृद्ध विधवा महिलाएं रहती हैं। यहां उन्हें वही सरकारी सुविधाएं मिलती हैं जो आश्रय सदन में दी जाती हैं। यहां महिलाएं भजन कर समय व्यतीत करती हैं तो तमाम महिलाएं योग भी करती हैं।


सदन में नहीं रहना चाहतीं विधवा महिलाएं
एक तरफ सरकार वृद्ध और विधवा महिलाओं को सम्मानजनक जिंदगी दिलाने की कोशिश में लगी हैं, वहीं बहुत सी महिलाएं ऐसी हैं जो आज भी मंदिरों के पास भिक्षावृत्ति करते देखी जाती हैं। अनुमान के मुताबिक रोजाना 500 से 700 रुपये भिक्षावृत्ति से कमा लेती हैं, इन्हें प्रोबेशन विभाग द्वारा कई बार आश्रय सदन और कृष्णा कुटीर भेजा गया है, लेकिन वे मंदिरों के दर्शन करने के बहाने निकल आती हैं और फिर वापस नहीं जाती।



भिक्षावृत्ति से जुड़ी महिलाओं का कई बार रेस्क्यू किया गया है, लेकिन वे यहां रुकती नहीं हैं। इसके बाद भी हम लगातार उनसे यहां आने का आह्वान करते हैं ताकि देश-विदेश से आने वाले लोग माताओं को इस स्थिति में न पाएं. ज्यादातर महिलाएं सदन में हैं। कुछेक बाहर किराए पर रहती हैं।
- गीता दीक्षित, प्रभारी आश्रय सदन
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