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डीटीआई: फिर गुलजार होने लगे दलालों के अड्डे
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फोटो
- करीब दो माह पहले अमर उजाला की खबर के बाद पुलिस ने हटाया था
- पुन: गेट के बाहर कुर्सियों पर बैठकर करने लगे हैं कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (डीटीआई) में पिछले दो माह से वीरान पड़े दलालों के अड्डे फिर से गुलजार होने लगे है। दलालों ने कुर्सियां लगाकर कागजात बनवाने के लिए वसूली शुरू कर दी है।
''''अमर उजाला'''' ने दो माह पहले डीटीआई के बाहर जमे दलालों के अड्डों की खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद संभागीय निरीक्षक ने पुलिस को पत्र लिखा और दलालों को हटाने की मांग की। परिवहन विभाग के पत्र पर पुलिस ने दलालों के बिस्तर उखाड़कर फेंक दिए। साथ ही कुछ दिन तक पुलिस ने इस पर पैनी नजर बनाए रखी। इस कारण दलालों के बिस्तर कार्यालय के बाहर नहीं लग सके, लेकिन अब दलाल जमने लगे हैं। वर्तमान में डीटीआई के गेट के अंदर प्रवेश करते ही दलाल आवेदक को घेर लेते हैं और सेटिंग में जुट जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि कार्यालय में काम करने वाले बाबुओं की दलालों से सेटिंग है। अमर उजाला की खबर के बाद दलालों के बिस्तर पुलिस द्वारा हटाने का सबसे बड़ा नुकसान कार्यालय में काम करने वालों को हुआ था। सोमवार को ''''अमर उजाला'''' प्रतिनिधि जब डीटीआई कार्यालय गया तो उसे गेट पर रोक लिया और काम करवाने की रेट बताने लगा। साथ ही कार्यालय में अपनी सेटिंग के बल पर बिना टेस्ट के ही ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का दावा भी करने लगा।
दलाल से हुई बातचीत के मुख्य अंश
दलाल: क्या कराना है, लाइसेंस बनवाना है क्या
रिपोर्टर: हां
दलाल: गाड़ी चला लेते हो
रिपोर्टर: नहीं
दलाल: कोई बात नहीं बिना टेस्ट के बन जाएगा
रिपोर्टर: कितने पैसे लगेंगे
दलाल: साढ़े चार हजार रुपये में बन जाएगा
रिपोर्टर: कोई परेशानी तो नहीं होगी
दलाल: नहीं अंदर सब सेटिंग है, आसानी से बन जाएगा।
रिपोर्टर: ठीक है, क्या कागज चाहिए
दलाल: आधार कार्ड और दो फोटो
रिपोर्टर: ठीक है, आधार कार्ड और फोटो लेकर आता हूं, लेकिन बिना टेस्ट के बन तो जाएगा।
दलाल: अरे भाई, कह तो दिया बन जाएगा, लर्निंग के लिए एक बार आना होगा और एक बार परमानेंट के लिए फोटो खिंचाने आना होगा। लाइसेंस घर पहुंच जाएगा।
रिपोर्टर: ठीक है फिर मंगलवार को कागज लेकर आता हूं।
बयान
दो माह पहले पुलिस को पत्र देकर दलालों के बिस्तर हटवाए थे। पुन: गेट के बाहर बिस्तर लगने लगे हैं तो पुलिस को पत्र लिखकर इन्हें हटवाया जाएगा।
नीतू शर्मा, संभागीय निरीक्षक, परिवहन विभाग
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- करीब दो माह पहले अमर उजाला की खबर के बाद पुलिस ने हटाया था
- पुन: गेट के बाहर कुर्सियों पर बैठकर करने लगे हैं कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (डीटीआई) में पिछले दो माह से वीरान पड़े दलालों के अड्डे फिर से गुलजार होने लगे है। दलालों ने कुर्सियां लगाकर कागजात बनवाने के लिए वसूली शुरू कर दी है।
''''अमर उजाला'''' ने दो माह पहले डीटीआई के बाहर जमे दलालों के अड्डों की खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद संभागीय निरीक्षक ने पुलिस को पत्र लिखा और दलालों को हटाने की मांग की। परिवहन विभाग के पत्र पर पुलिस ने दलालों के बिस्तर उखाड़कर फेंक दिए। साथ ही कुछ दिन तक पुलिस ने इस पर पैनी नजर बनाए रखी। इस कारण दलालों के बिस्तर कार्यालय के बाहर नहीं लग सके, लेकिन अब दलाल जमने लगे हैं। वर्तमान में डीटीआई के गेट के अंदर प्रवेश करते ही दलाल आवेदक को घेर लेते हैं और सेटिंग में जुट जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि कार्यालय में काम करने वाले बाबुओं की दलालों से सेटिंग है। अमर उजाला की खबर के बाद दलालों के बिस्तर पुलिस द्वारा हटाने का सबसे बड़ा नुकसान कार्यालय में काम करने वालों को हुआ था। सोमवार को ''''अमर उजाला'''' प्रतिनिधि जब डीटीआई कार्यालय गया तो उसे गेट पर रोक लिया और काम करवाने की रेट बताने लगा। साथ ही कार्यालय में अपनी सेटिंग के बल पर बिना टेस्ट के ही ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का दावा भी करने लगा।
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दलाल से हुई बातचीत के मुख्य अंश
दलाल: क्या कराना है, लाइसेंस बनवाना है क्या
रिपोर्टर: हां
दलाल: गाड़ी चला लेते हो
रिपोर्टर: नहीं
दलाल: कोई बात नहीं बिना टेस्ट के बन जाएगा
रिपोर्टर: कितने पैसे लगेंगे
दलाल: साढ़े चार हजार रुपये में बन जाएगा
रिपोर्टर: कोई परेशानी तो नहीं होगी
दलाल: नहीं अंदर सब सेटिंग है, आसानी से बन जाएगा।
रिपोर्टर: ठीक है, क्या कागज चाहिए
दलाल: आधार कार्ड और दो फोटो
रिपोर्टर: ठीक है, आधार कार्ड और फोटो लेकर आता हूं, लेकिन बिना टेस्ट के बन तो जाएगा।
दलाल: अरे भाई, कह तो दिया बन जाएगा, लर्निंग के लिए एक बार आना होगा और एक बार परमानेंट के लिए फोटो खिंचाने आना होगा। लाइसेंस घर पहुंच जाएगा।
रिपोर्टर: ठीक है फिर मंगलवार को कागज लेकर आता हूं।
बयान
दो माह पहले पुलिस को पत्र देकर दलालों के बिस्तर हटवाए थे। पुन: गेट के बाहर बिस्तर लगने लगे हैं तो पुलिस को पत्र लिखकर इन्हें हटवाया जाएगा।
नीतू शर्मा, संभागीय निरीक्षक, परिवहन विभाग