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अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कोई स्थायी शत्रु और मित्र नहीं होता: आशीष
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मथुरा। आरसीए महाविद्यालय मथुरा में जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन और पाक, चीन और अन्य विश्व के निहितार्थ विषय पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी का शनिवार को समापन हो गया। इस दौरान पाकिस्तानी सेना पर पुस्तक लिखने वाले विश्व मामलों की भारतीय परिषद से डॉ. आशीष शुक्ला ने बताया कि भारत, पाक और चीन को अलग-अलग चश्मे से देखना होगा। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में न कोई स्थायी शत्रु होता है, न कोई स्थायी मित्र होता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाज विज्ञान संस्थान, आगरा के प्रो. मो. अरशद, अध्यक्ष रमेश मित्तल, मुख्य वक्ता डॉ. आशुतोष भटनागर तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. आशीष शुक्ला सहित प्राचार्य डॉ. प्रीति जौहरी, सचिव गिरीश अग्रवाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस मौके पर डॉ. आशीष शुक्ला ने पाकिस्तान के संबंध में कहा कि भारत के लिए पाकिस्तानी सेना समस्या के मूल में है। पाकिस्तान में वहां के लोगों को कुछ भी करने के लिये सेना की अनुमति लेनी पड़ती है। इसके अलावा इस विषय पर विभिन्न वक्ताओं ने विचार रखे। मुख्य वक्ता डॉ. आशुतोष भटनागर ने कश्मीर की स्थितियों को बारीकी से समझाया। समापन अवसर पर सभी अतिथियों का इस दौरान स्वागत किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. प्रीति जौहरी ने मुख्य अतिथि प्रो. अरशद का स्वागत किया। संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. अशोक कुमार ने विशिष्ट अतिथि डॉ. आशीष शुक्ला का पटका पहनाकर स्वागत किया।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाज विज्ञान संस्थान, आगरा के प्रो. मो. अरशद, अध्यक्ष रमेश मित्तल, मुख्य वक्ता डॉ. आशुतोष भटनागर तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. आशीष शुक्ला सहित प्राचार्य डॉ. प्रीति जौहरी, सचिव गिरीश अग्रवाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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इस मौके पर डॉ. आशीष शुक्ला ने पाकिस्तान के संबंध में कहा कि भारत के लिए पाकिस्तानी सेना समस्या के मूल में है। पाकिस्तान में वहां के लोगों को कुछ भी करने के लिये सेना की अनुमति लेनी पड़ती है। इसके अलावा इस विषय पर विभिन्न वक्ताओं ने विचार रखे। मुख्य वक्ता डॉ. आशुतोष भटनागर ने कश्मीर की स्थितियों को बारीकी से समझाया। समापन अवसर पर सभी अतिथियों का इस दौरान स्वागत किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. प्रीति जौहरी ने मुख्य अतिथि प्रो. अरशद का स्वागत किया। संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. अशोक कुमार ने विशिष्ट अतिथि डॉ. आशीष शुक्ला का पटका पहनाकर स्वागत किया।
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