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ठाकुर जी के लिए सजी 64 महंतों की दिव्य एवं भव्य भोग लीला
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राधाकुंड। ब्रजानंद घेरा स्थित राधा कालाचांद प्रभु मंदिर में संत राधाचरण दास के तीन दिवसीय महोत्सव के समापन पर गौरांग लीला में 64 महंतों के दिव्य एवं भव्य भोग का आयोजन किया गया।
ठाकुरजी के समक्ष 172 आसनों पर 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग मोमबत्ती जलाकर लगाया गया। महोत्सव में अधिवास कीर्तन के बाद भागवत कथा का मूल पाठ एवं राधा-श्यामकुंड की परिक्रमा लगाई गई। गिरिराज महाराज की तलहटी एवं ब्रज से आए संतों का स्वागत किया गया। श्रीपाद रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी के महंत केशव दास ने बताया कि साधु जीवन सेवा का दूसरा नाम है।
संत राधाचरण बाबा करुणा, कोमलता, ममता और सेवा जैसे भाव की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने राधाकुंड के किनारे भजन कुटीर में रहते हुए माधुकरी कर जीवन में राधा-कृष्ण की साधना की। उनके तिरोभाव पर ठाकुरजी के लिए 64 महंतों की दिव्य एवं भव्य भोग लीला में भोग लगाया गया। महोत्सव में श्री कांत बाबा, व्यास परीक्षित दास महाराज, सुबल दास, मनमोहन दास, शिव प्रसाद महतो, प्रदीप महतो, श्याम सुंदर, नंदकिशोर, नित्यानंद आदि थे।
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ठाकुरजी के समक्ष 172 आसनों पर 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग मोमबत्ती जलाकर लगाया गया। महोत्सव में अधिवास कीर्तन के बाद भागवत कथा का मूल पाठ एवं राधा-श्यामकुंड की परिक्रमा लगाई गई। गिरिराज महाराज की तलहटी एवं ब्रज से आए संतों का स्वागत किया गया। श्रीपाद रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी के महंत केशव दास ने बताया कि साधु जीवन सेवा का दूसरा नाम है।
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संत राधाचरण बाबा करुणा, कोमलता, ममता और सेवा जैसे भाव की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने राधाकुंड के किनारे भजन कुटीर में रहते हुए माधुकरी कर जीवन में राधा-कृष्ण की साधना की। उनके तिरोभाव पर ठाकुरजी के लिए 64 महंतों की दिव्य एवं भव्य भोग लीला में भोग लगाया गया। महोत्सव में श्री कांत बाबा, व्यास परीक्षित दास महाराज, सुबल दास, मनमोहन दास, शिव प्रसाद महतो, प्रदीप महतो, श्याम सुंदर, नंदकिशोर, नित्यानंद आदि थे।
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