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Braj ki Holi 2023: श्रीकृष्ण जन्मभूमि के गुलाल से होली खेलेंगे बद्रीनाथ, बाबा के भक्त पहुंचे जोशीमठ

Sun, 05 Mar 2023 07:14 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 05 Mar 2023 07:14 PM IST
सार

मथुरा की विश्व प्रसिद्ध होली का हिस्सा बनने को दुनियाभर से कृष्णभक्त पहुंचते हैं। इन दिनों यहां चंहुओर होली का उत्सव मनाया जा रहा है। यहां के गुलाल से बद्रीनाथ भी होली खेंलेंगे। बाबा के भक्त गुलाल लेकर वहां पहुंच चुके हैं। 

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Devotees of Baba reached Joshimath with gulal of Shri Krishna Janmabhoomi to play Badrinath Holi
गोकुल में गुलाल उड़ाते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश की तीर्थनगरी मथुरा में इन दिनों होली उत्सव की धूम है। दुनियाभर की निगाहें ब्रज के रंगोत्सव पर रहती हैं। इंसान तो क्या देवता भी ब्रज में होली खेलने के लिए लालायित रहते हैं। वहीं श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर फूलों से बने हर्बल गुलाल को अजय तिवारी हर वर्ष पहाड़ों में बाबा बद्रीनाथ को पहुंचाते हैं। इस वर्ष भी बाइक से बद्रीनाथ को गुलाल देकर आ रहे हैं। 

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अजय तिवारी की यह बाइक से 109वीं बद्रीनाथ की यात्रा है। शनिवार को अजय ने बताया कि बद्रीनाथ के कपाट इस समय बंद हैं। भारी बर्फबारी के कारण पंदूकेश्वर से आगे का रास्ता बंद है। बद्रीनाथजी की पूजा इस समय जोशीमठ स्थिति नरसिंह मंदिर में हो रही है। वहीं कुबेरजी भी पंदूकेश्वर में विराजमान हैं। 

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Devotees of Baba reached Joshimath with gulal of Shri Krishna Janmabhoomi to play Badrinath Holi
जोशीमठ में गुलाल भेंट करते अजय - फोटो : अमर उजाला

ब्रज का दिव्य गुलाल भेंटकर लौट रहे हैं

उन्होंने बताया कि कृष्ण जन्मभूमि स्थित केशवदेव मंदिर से प्राप्त गुलाल को उन्होंने शनिवार को जोशीमठ के नरसिंह मंदिर के कर्मचारी राजीव राना को सौंप दिया। जोशीमठ से अमर उजाला को फोन पर अजय तिवारी ने बताया कि बीती रात से यहां बारिश हो रही है। वह ब्रज का दिव्य गुलाल भेंटकर लौट रहे हैं।

मथुरा में यह है मान्यता

बचपन में कान्हा बड़े चंचल थे। गोपियों को परेशान करने में उन्हें बड़ा आनंद मिलता था। इसलिए गोकुल में उनके बालस्वरूप को अधिक महत्व दिया जाता है। नटखट कान्हा की याद में हर साल छड़ीमार होली का आयोजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि बालकृष्ण को लाठी से चोट न लग जाए, इसलिए यहां लाठी की जगह छड़ी से होली खेली जाती है। प्रभु के बाल स्वरूपों को धीरे-धीरे छड़ी मारी जाती है।
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