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Mathura News: भक्तों ने उत्साह से मनाया बाबा नीब करौरी का जन्मोत्सव
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बाबा नीब करौरी महाराज के अवतरण दिवस पर सुंदरकांड का पाठ करते भक्तजन।
वृंदावन। परिक्रमा मार्ग स्थित बाबा नीब करौरी आश्रम में बाबा का 125वां जन्मोत्सव विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ मनाया गया। बाबा के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में सुदूर क्षेत्रों से भक्तजन शामिल हुए। भक्ति संगीत के बीच भक्तों ने बाबा को नमन किया और प्रसाद ग्रहण किया।
परिक्रमा मार्ग स्थित बाबा नीब करौरी आश्रम में शुक्रवार सुबह हनुमानजी मंदिर एवं ठाकुरजी का भव्य शृंगार किया गया। ठाकुरजी की आरती के बाद पुजारी सोनू शर्मा ने बाबा नीब करौरी की धूप आरती की। इसके बाद बाबा की प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक किया। इस बीच मंदिर परिसर और बाबा के कक्ष में भक्तों ने पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से हरिनाम संकीर्तन कर बाबा को नमन किया। वहीं शाम को भक्तों ने सस्वर सुंदरकांड का पाठ किया।
बाबा नीब करौरी आश्रम के प्रबंधक भगवत शर्मा ने बताया कि प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में ब्राह्मण परिवार में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा साधना के प्रताप से बाबा नीब करौरी के रूप में भक्तों के सामने आए। उत्तर प्रदेश के ही एक गांव नीब करौरी में कठिन तप करके स्वयं सिद्धि हासिल की। बाबा जन्म से ही संत थे। जहां भी जाते यज्ञ और भंडारा कराते। यज्ञ देवताओं के लिए व भंडारा सामान्य मनुष्यों के लिए। उन्होंने देश में ही नहीं विदेशों में भी हनुमान मंदिर स्थापित कराए।
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परिक्रमा मार्ग स्थित बाबा नीब करौरी आश्रम में शुक्रवार सुबह हनुमानजी मंदिर एवं ठाकुरजी का भव्य शृंगार किया गया। ठाकुरजी की आरती के बाद पुजारी सोनू शर्मा ने बाबा नीब करौरी की धूप आरती की। इसके बाद बाबा की प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक किया। इस बीच मंदिर परिसर और बाबा के कक्ष में भक्तों ने पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से हरिनाम संकीर्तन कर बाबा को नमन किया। वहीं शाम को भक्तों ने सस्वर सुंदरकांड का पाठ किया।
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बाबा नीब करौरी आश्रम के प्रबंधक भगवत शर्मा ने बताया कि प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में ब्राह्मण परिवार में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा साधना के प्रताप से बाबा नीब करौरी के रूप में भक्तों के सामने आए। उत्तर प्रदेश के ही एक गांव नीब करौरी में कठिन तप करके स्वयं सिद्धि हासिल की। बाबा जन्म से ही संत थे। जहां भी जाते यज्ञ और भंडारा कराते। यज्ञ देवताओं के लिए व भंडारा सामान्य मनुष्यों के लिए। उन्होंने देश में ही नहीं विदेशों में भी हनुमान मंदिर स्थापित कराए।
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