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मैं परियों की शहजादी हूं...
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
Updated Sat, 02 Jan 2016 11:07 PM IST
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साध्वी ऋतंभरा के 52वां अवतरण महोत्सव शनिवार को वात्सल्य ग्राम स्थित मां कलावती पालयम में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। महोत्सव का शुभारंभ परमशक्ति पीठ के राष्ट्रीय सचिव संजय भैया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयभगवान अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में वात्सल्य ग्राम स्थित कृष्णा ब्रह्मरतन विद्या मंदिर की छात्राओं ने परी के वेष में मनमोहक नृत्य, ‘मैं परियों की शहजादी हूं, आसमान से आई हूं प्रस्तुत किया।’ कत्थक नृत्यांगना जागृति भटनागर की प्रस्तुति के बाद समविद् की छात्रा अमृता चतुर्वेदी ने कन्या भ्रूण हत्या पर मार्मिक कविता प्रस्तुत की। इसके बाद समविद् की छात्राओं ने नृत्य नाटिका के माध्यम से कृष्ण की मनमोहक झांकियां प्रस्तुत कर सभी को भाव विभोर कर दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुति के बाद यशोदा माताओं ने साध्वी ऋतंभरा का चरण पूजन किया और देश विदेश से आए अनुयायियों ने पुष्प माला आदि अर्पित किए। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन को जीने के उद्देश पता होना चाहिए यह तय करना चाहिए कि हमें अहंकारों को जीना है अथवा संस्कारों को।
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कुछ अपने को बड़ा दिखाने के लिए जीते हैं और मिथ्या आडंबरों की दुनिया भटकते रहते हैं। उनके दु:ख का कारण होता है दूसरों को प्रगति करते देखना वह इसी चिंता में जीवन गंवा देते हैं कि मेरा पड़ोसी इतना बड़ा कैसे हो गया।
इस अवसर पर नवल खंडेलवाल, पियूष, साध्वी साक्षी चेतना, साध्वी सत्यप्रिया, ओमप्रकारश गोयंका, अजय गोयंका, राजेश गुप्ता, सुभाष सिंह, ललित किशोर मित्तल, महेश खंडेलवाल, पूर्व लेफ्टीनेंट जनरल जीएस ढिल्लन, डॉ. अभय कुमार राय, विभोर प्रकाशम, सुमन परमानंद, उमाशंकर राही उपस्थित रहे।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों में वात्सल्य ग्राम स्थित कृष्णा ब्रह्मरतन विद्या मंदिर की छात्राओं ने परी के वेष में मनमोहक नृत्य, ‘मैं परियों की शहजादी हूं, आसमान से आई हूं प्रस्तुत किया।’ कत्थक नृत्यांगना जागृति भटनागर की प्रस्तुति के बाद समविद् की छात्रा अमृता चतुर्वेदी ने कन्या भ्रूण हत्या पर मार्मिक कविता प्रस्तुत की। इसके बाद समविद् की छात्राओं ने नृत्य नाटिका के माध्यम से कृष्ण की मनमोहक झांकियां प्रस्तुत कर सभी को भाव विभोर कर दिया।
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सांस्कृतिक प्रस्तुति के बाद यशोदा माताओं ने साध्वी ऋतंभरा का चरण पूजन किया और देश विदेश से आए अनुयायियों ने पुष्प माला आदि अर्पित किए। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन को जीने के उद्देश पता होना चाहिए यह तय करना चाहिए कि हमें अहंकारों को जीना है अथवा संस्कारों को।
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कुछ अपने को बड़ा दिखाने के लिए जीते हैं और मिथ्या आडंबरों की दुनिया भटकते रहते हैं। उनके दु:ख का कारण होता है दूसरों को प्रगति करते देखना वह इसी चिंता में जीवन गंवा देते हैं कि मेरा पड़ोसी इतना बड़ा कैसे हो गया।
इस अवसर पर नवल खंडेलवाल, पियूष, साध्वी साक्षी चेतना, साध्वी सत्यप्रिया, ओमप्रकारश गोयंका, अजय गोयंका, राजेश गुप्ता, सुभाष सिंह, ललित किशोर मित्तल, महेश खंडेलवाल, पूर्व लेफ्टीनेंट जनरल जीएस ढिल्लन, डॉ. अभय कुमार राय, विभोर प्रकाशम, सुमन परमानंद, उमाशंकर राही उपस्थित रहे।