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बांकेबिहारी मंदिर में टूटा दस वर्षों का रिकार्ड
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 02 Jan 2017 12:04 AM IST
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बांकेबिहारी मंदिर
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वर्ष 2017 के पहले दिन ठाकुर बांकेबिहारी के दर पर आस्था का सैलाब उमड़ा। भीड़ अनुमान से इतना अधिक थी कि जो थोड़ी-बहुत व्यवस्थाएं की गई थीं चरमरा गईं। बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र के आसपास ही तिल भर जगह नहीं बची।
एक आकलन के अनुसार एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने रविवार को बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन किए। इससे नव वर्ष के पहले दिन श्रद्धालुओं के आने का पिछले दस सालों का रिकार्ड टूट गया। भीड़ के बीच फंसकर दो श्रद्धालु घायल हो गए।
वर्ष के पहले दिन रविवार की सुबह ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के पट खुलने से पूर्व ही बाहर जन समुद्र उमड़ा हुआ था। पट खुलने के साथ गेट नंबर दो और तीन से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया। मंदिर प्रांगण भक्तों से खचाखच भर गया।
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भीड़ के दबाव में पुलिस-प्रशासन की ओर से जो व्यवस्था की गई थीं वो चरमरा गईं। अधिकारियों के आदेश पर सीओ सदर ने ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के परिक्रमा पथ पर गेट बंद कर बेरिकेडिंग करा दी। इससे श्रद्धालु गेट नंबर चार से गेट नंबर एक तक नहीं पहुंच पाए।
डंडे के जोर पर पुलिस ने लोगों को वापस लौटाया। कई लोगों की सिटी मजिस्ट्रेट राम अरज यादव से भी बहस हुई। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि अव्यवस्था फैलने से बचाने के लिए श्रद्धालुओं को रोक-रोक कर निकाला जा रहा है। इसके लिए लगाई गई बैरिकेडिंग व्यवस्था श्रद्धालुओं के हित में है।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की गलियों और सड़क पर स्थिति और खराब दिखी। दाऊजी तिराहा, विद्यापीठ चौराहा और गौतम पाड़ा की ओर से आने वाली भीड़ को नियंत्रित न करने से बांकेबिहारी पुलिस चौकी पर भारी अव्यवस्था फैल गई। लोग जहां के तहां खड़े के खड़े रहे। बच्चे और वृद्ध भीड़ के बीच फंस गए।
दिल्ली के करोलबाग निवासी महेश अरोड़ा भीड़ के बढ़ते दबाव में गिर पड़े। इससे उनके गंभीर चोट पहुंची। दोपहर में भीड़ के बीच अमृतसर से आए श्रद्धालु दलजीत (67) की जान पर बन आई। वे भीड़ में दब गए। परिजनों ने उन्हें बमुश्किल निकाला। उनकी हालत इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें मथुरा के निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ऐसी ही स्थिति शाम को भी हुई। शाम 4:30 बजे मंदिर के पट खुलने के साथ अव्यवस्थाएं भी दिखीं।
मंदिर सेवायत प्रह्लादवल्लभ गोस्वामी के अनुसार नव वर्ष पर पिछले दस वर्षों की अपेक्षा रविवार को ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के दर्शन के लिए अधिक श्रद्धालु पहुंचे। उनके अनुसार भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या एक लाख से अधिक होने का अनुमान है।
रंगबिरंगे गुब्बारों से सजाया गया परिसर
रविवार को बांकेबिहारी मंदिर परिसर को रंग बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया था। सुगंधित इत्र का छिड़काव किया गया था
पहले भी हुए हादसे
27 अप्रैल 2009: अक्षय तीज पर्व पर मंदिर में दम घुटने से कानपुर निवासी रमा माहेश्वरी (58) की मौत हो गई थी। रोहिणी निवासी सरला ग्रवाल और रोहतक निवासी ब्रह्मानंद को हास्पिटल में दाखिल कराना पड़ा था।
21 जुलाई, 2012: हरियाली तीज से एक दिन पूर्व बांकेबिहारी मंदिर में भीड़ के रेले में दिल्ली के शकरपुर निवासी देशराज (67) की दम घुटने से मौत हो गई थी।
19 अगस्त, 2012: बांके बिहारी मंदिर में लगी स्टील की रैलिंग के टूटने से कई श्रद्धालुओं सहित बच्चे घायल।
9 सितंबर, 2012: हाथरस निवासी अर्मिला गुप्ता (62) और चंदौसी निवासी बीना शर्मा (60) रैलिंग में फंसकर घायल।
मजाक बनी नो एंट्री
नव वर्ष पर ट्रैफिक व्यवस्था के लिए बड़े वाहनों की नो एंट्री की योजना रविवार को ‘मजाक’ ही साबित हुई। छटीकरा-वृंदावन प्रवेश मार्ग पर हाईवे से आने वाने वाहनों को रुक्मिणी विहार स्थित मल्टीस्टोरी कार पार्किंग के बजाय प्राईवेट कार पार्किंग में रोका जा रहा था।
अधिकांश वाहन चालक रुक्मिणी विहार में अंदर प्रवेशकर बुर्जा होते हुए नगर में प्रवेश कर गए। यमुना एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों को यमुना पुल के समीप में बनी कार पार्किंग में रोका जा रहा था लेकिन बड़ी संख्या में वाहन परिक्रमा मार्ग होते हुए नगर सीमा तक पहुंच गए। मथुरा से आने वाले वाहनों को पागलबाबा मंदिर के समीप दारूक पार्किंग पर रोका जा रहा था। यहां भी वाहन स्वामी कैलाशनगर होते हुए नगर में प्रवेश कर गए।
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एक आकलन के अनुसार एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने रविवार को बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन किए। इससे नव वर्ष के पहले दिन श्रद्धालुओं के आने का पिछले दस सालों का रिकार्ड टूट गया। भीड़ के बीच फंसकर दो श्रद्धालु घायल हो गए।
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वर्ष के पहले दिन रविवार की सुबह ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के पट खुलने से पूर्व ही बाहर जन समुद्र उमड़ा हुआ था। पट खुलने के साथ गेट नंबर दो और तीन से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया। मंदिर प्रांगण भक्तों से खचाखच भर गया।
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भीड़ के दबाव में पुलिस-प्रशासन की ओर से जो व्यवस्था की गई थीं वो चरमरा गईं। अधिकारियों के आदेश पर सीओ सदर ने ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के परिक्रमा पथ पर गेट बंद कर बेरिकेडिंग करा दी। इससे श्रद्धालु गेट नंबर चार से गेट नंबर एक तक नहीं पहुंच पाए।
डंडे के जोर पर पुलिस ने लोगों को वापस लौटाया। कई लोगों की सिटी मजिस्ट्रेट राम अरज यादव से भी बहस हुई। सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि अव्यवस्था फैलने से बचाने के लिए श्रद्धालुओं को रोक-रोक कर निकाला जा रहा है। इसके लिए लगाई गई बैरिकेडिंग व्यवस्था श्रद्धालुओं के हित में है।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की गलियों और सड़क पर स्थिति और खराब दिखी। दाऊजी तिराहा, विद्यापीठ चौराहा और गौतम पाड़ा की ओर से आने वाली भीड़ को नियंत्रित न करने से बांकेबिहारी पुलिस चौकी पर भारी अव्यवस्था फैल गई। लोग जहां के तहां खड़े के खड़े रहे। बच्चे और वृद्ध भीड़ के बीच फंस गए।
दिल्ली के करोलबाग निवासी महेश अरोड़ा भीड़ के बढ़ते दबाव में गिर पड़े। इससे उनके गंभीर चोट पहुंची। दोपहर में भीड़ के बीच अमृतसर से आए श्रद्धालु दलजीत (67) की जान पर बन आई। वे भीड़ में दब गए। परिजनों ने उन्हें बमुश्किल निकाला। उनकी हालत इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें मथुरा के निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ऐसी ही स्थिति शाम को भी हुई। शाम 4:30 बजे मंदिर के पट खुलने के साथ अव्यवस्थाएं भी दिखीं।
मंदिर सेवायत प्रह्लादवल्लभ गोस्वामी के अनुसार नव वर्ष पर पिछले दस वर्षों की अपेक्षा रविवार को ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के दर्शन के लिए अधिक श्रद्धालु पहुंचे। उनके अनुसार भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या एक लाख से अधिक होने का अनुमान है।
रंगबिरंगे गुब्बारों से सजाया गया परिसर
रविवार को बांकेबिहारी मंदिर परिसर को रंग बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया था। सुगंधित इत्र का छिड़काव किया गया था
पहले भी हुए हादसे
27 अप्रैल 2009: अक्षय तीज पर्व पर मंदिर में दम घुटने से कानपुर निवासी रमा माहेश्वरी (58) की मौत हो गई थी। रोहिणी निवासी सरला ग्रवाल और रोहतक निवासी ब्रह्मानंद को हास्पिटल में दाखिल कराना पड़ा था।
21 जुलाई, 2012: हरियाली तीज से एक दिन पूर्व बांकेबिहारी मंदिर में भीड़ के रेले में दिल्ली के शकरपुर निवासी देशराज (67) की दम घुटने से मौत हो गई थी।
19 अगस्त, 2012: बांके बिहारी मंदिर में लगी स्टील की रैलिंग के टूटने से कई श्रद्धालुओं सहित बच्चे घायल।
9 सितंबर, 2012: हाथरस निवासी अर्मिला गुप्ता (62) और चंदौसी निवासी बीना शर्मा (60) रैलिंग में फंसकर घायल।
मजाक बनी नो एंट्री
नव वर्ष पर ट्रैफिक व्यवस्था के लिए बड़े वाहनों की नो एंट्री की योजना रविवार को ‘मजाक’ ही साबित हुई। छटीकरा-वृंदावन प्रवेश मार्ग पर हाईवे से आने वाने वाहनों को रुक्मिणी विहार स्थित मल्टीस्टोरी कार पार्किंग के बजाय प्राईवेट कार पार्किंग में रोका जा रहा था।
अधिकांश वाहन चालक रुक्मिणी विहार में अंदर प्रवेशकर बुर्जा होते हुए नगर में प्रवेश कर गए। यमुना एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों को यमुना पुल के समीप में बनी कार पार्किंग में रोका जा रहा था लेकिन बड़ी संख्या में वाहन परिक्रमा मार्ग होते हुए नगर सीमा तक पहुंच गए। मथुरा से आने वाले वाहनों को पागलबाबा मंदिर के समीप दारूक पार्किंग पर रोका जा रहा था। यहां भी वाहन स्वामी कैलाशनगर होते हुए नगर में प्रवेश कर गए।