{"_id":"58864aef4f1c1bbe6bcf42a5","slug":"the-court-pronounced-judgment","type":"story","status":"publish","title_hn":"जवाहरबाग कब्जाधारी बुजुर्ग महिला को सजा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जवाहरबाग कब्जाधारी बुजुर्ग महिला को सजा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 23 Jan 2017 11:56 PM IST
विज्ञापन
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जवाहर बाग में आने वाले लोगों को बंधक बनाने की आरोपी एक बुजुर्ग महिला को अदालत ने जेल में अब तक बिताई अवधि की सजा सुनाई है। वर्तमान में महिला जमानत पर है। नेपाल निवासी नंदलाल ने थाना सदर बाजार में 28 मई, 2016 को एफआईआर दर्ज कराई थी।
इसमें उसने रामवृक्ष यादव, चंदन बोस, वीरेश यादव, राकेश बाबू, मुकेश व अन्य 150 लोगों पर जवाहर बाग में आने वालों को बंधक बनाने, उनसे मारपीट करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस की विवेचना में इस मामले में बुजुर्ग महिला सिंगारी देवी का नाम भी आया था।
इस मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम राधेमोहन श्रीवास्तव की अदालत में हुई। जब महिला को अदालत में पेश किया गया तो वो वृद्धावस्था के कारण खड़ी भी नहीं हो पा रही थीं। एक व्यक्ति उसे सहारा देकर न्यायालय में लेकर पहुंचा था।
विज्ञापन
महिला के जुर्म इकबाल करने के बाद न्यायाधीश ने महिला को जेल में बिताए गए साढ़े तीन महीने की अवधि की सजा सुनाई। वर्तमान में महिला जमानत पर है। न्यायालय ने बंधपत्र को निरस्त कर प्रतिभूतिगणों को उनके दायित्व से उन्मोचित कर दिया है।
विज्ञापन
इसमें उसने रामवृक्ष यादव, चंदन बोस, वीरेश यादव, राकेश बाबू, मुकेश व अन्य 150 लोगों पर जवाहर बाग में आने वालों को बंधक बनाने, उनसे मारपीट करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस की विवेचना में इस मामले में बुजुर्ग महिला सिंगारी देवी का नाम भी आया था।
विज्ञापन
इस मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम राधेमोहन श्रीवास्तव की अदालत में हुई। जब महिला को अदालत में पेश किया गया तो वो वृद्धावस्था के कारण खड़ी भी नहीं हो पा रही थीं। एक व्यक्ति उसे सहारा देकर न्यायालय में लेकर पहुंचा था।
विज्ञापन
महिला के जुर्म इकबाल करने के बाद न्यायाधीश ने महिला को जेल में बिताए गए साढ़े तीन महीने की अवधि की सजा सुनाई। वर्तमान में महिला जमानत पर है। न्यायालय ने बंधपत्र को निरस्त कर प्रतिभूतिगणों को उनके दायित्व से उन्मोचित कर दिया है।