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कर्ज में डूबे दवा व्यवसायी ने किया आत्मदाह
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 01 Nov 2016 12:12 AM IST
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दोनों में पहले किसी बात को लेकर कहासुनी हुई जो कि झगड़े में तबदील हो गई।
- फोटो : Demo Pic
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दीपावली के दौरान अशोक हाइट्स की छठवीं मंजिल स्थित फ्लैट की छत पर दवा व्यवसायी वीरेंद्र गोयल ने आत्मदाह कर लिया। वह एक घंटे तक तड़पते रहे, लेकिन कोई उन्हें अपनी गाड़ी से अस्पताल ले जाने के लिए आगे नहीं आया। बाद में पुलिस ने एंबुलेंस से उन्हें स्वर्ण जयंती अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके आत्महत्या करने की वजह कर्ज बताया जा रहा है।
वीरेंद्र गोयल (35) सी ब्लाक गोविंद नगर के रहने वाले थे। रविवार दोपहर उन्हें लोगों ने थाना हाईवे क्षेत्र में अशोक हाइट्स में छठवीं मंजिल पर आग की लपटों में घिरा देखा, लोग दौड़कर ऊपर पहुंचे और कंबल उड़ाकर आग बुझाई। लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी, करीब एक घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस से व्यवसायी को स्वर्ण जयंती अस्पताल भेजा गया, यहां रात में दवा व्यवसायी ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
बताया जा रहा है कि आग की लपटों में घिरे देख पास-पड़ोस के लोगों ने कंबल डालकर आग तो बुझा तो दी, लेकिन कोई उन्हें अपने वाहन से हास्पिटल पहुंचाने के लिए आगे नहीं आया। यहां सभी एंबुलेंस का ही इंतजार करते रहे। एंबुलेंस भी एक घंटे देर से पहुंची। यदि इंतजार की बजाए जल्द से जल्द हास्पिटल ले जाया जाता तो बहुत ज्यादा संभावना थी कि व्यवसायी की जान बच जाती।
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पत्नी के बुलाने पर भी नहीं गए घर
मृतक के दो पुत्रियां हैं। बताया जाता है कि कर्ज अधिक होने के चलते वीरेंद्र गोयल काफी परेशान थे और एक सप्ताह पूर्व से घर से निकले हुए थे। उनकी पत्नी तनु गोयल ने कई बार फोन कर उन्हें घर आने को कहा, लेकिन वह नहीं आए। खुद को कभी केरला, कभी दिल्ली बताते रहे। रविवार दोपहर 12 बजे वीरेंद्र ने अपनी पत्नी को फोन किया, उसके बाद आत्मदाह कर लिया। उनकी पत्नी इस समय अपने मायके विश्वलक्ष्मीनगर में थी।
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वीरेंद्र गोयल (35) सी ब्लाक गोविंद नगर के रहने वाले थे। रविवार दोपहर उन्हें लोगों ने थाना हाईवे क्षेत्र में अशोक हाइट्स में छठवीं मंजिल पर आग की लपटों में घिरा देखा, लोग दौड़कर ऊपर पहुंचे और कंबल उड़ाकर आग बुझाई। लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी, करीब एक घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस से व्यवसायी को स्वर्ण जयंती अस्पताल भेजा गया, यहां रात में दवा व्यवसायी ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
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बताया जा रहा है कि आग की लपटों में घिरे देख पास-पड़ोस के लोगों ने कंबल डालकर आग तो बुझा तो दी, लेकिन कोई उन्हें अपने वाहन से हास्पिटल पहुंचाने के लिए आगे नहीं आया। यहां सभी एंबुलेंस का ही इंतजार करते रहे। एंबुलेंस भी एक घंटे देर से पहुंची। यदि इंतजार की बजाए जल्द से जल्द हास्पिटल ले जाया जाता तो बहुत ज्यादा संभावना थी कि व्यवसायी की जान बच जाती।
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पत्नी के बुलाने पर भी नहीं गए घर
मृतक के दो पुत्रियां हैं। बताया जाता है कि कर्ज अधिक होने के चलते वीरेंद्र गोयल काफी परेशान थे और एक सप्ताह पूर्व से घर से निकले हुए थे। उनकी पत्नी तनु गोयल ने कई बार फोन कर उन्हें घर आने को कहा, लेकिन वह नहीं आए। खुद को कभी केरला, कभी दिल्ली बताते रहे। रविवार दोपहर 12 बजे वीरेंद्र ने अपनी पत्नी को फोन किया, उसके बाद आत्मदाह कर लिया। उनकी पत्नी इस समय अपने मायके विश्वलक्ष्मीनगर में थी।