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‘जिम्मेदारों’ की खामोशी ने जवाहर बाग को बनाया जंग का मैदान

Fri, 03 Jun 2016 02:01 AM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Fri, 03 Jun 2016 02:01 AM IST
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reality of jawahar bagh story
जवाहर बाग - फोटो : अमर उजाला
जवाहर बाग में गुरुवार को जो हुआ वह इसकी जिम्मेदारी संभालने वालों की चुप्पी का नतीजा है। शासन और प्रशासन की खामोशी ने जवाहर बाग को जंग का मैदान बना दिया। 2014 कथित सत्याग्रही जवाहर बाग पहुंचे थे तो इनकी संख्या कम थी। लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो इनका हौसला और संख्या दोनों बढ़ती गई।
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जब कथित सत्याग्रहियों ने प्रशासन से जवाहर बाग में दो दिवसीय धरने की अनुमति मांगी थी तब इनकी संख्या पांच सौ के करीब रही होगी। दो दिन इन लोगों ने अपनी मांगों को लेकर धरना दिया। अनुमति की सीमा समाप्त होते ही इन्हें जवाहर बाग से निकाल दिया जाता तो आज यह हालात ना पैदा होते। मगर प्रशासन का इस तरफ ध्यान ही नहीं गया।
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आहिस्ता आहिस्ता इनकी संख्या बढ़ती गई और पूरा जवाहरबाग इनके कब्जे में हो गया। जब प्रशासन कार्रवाई के मूड में आया तो यह आक्रामक हो गए। बाकायदा जवाहरबाग पर गश्त करने के लिए टीमें बना दी गईं। महिलाएं फरसा और डंडा लेकर पहरा देने लगीं। शासन तक भी मामला पहुंचा, लेकिन प्रशासन कुछ कर नहीं सका।
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बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी और एसएसपी ने प्रेस कांफ्रेंस करके कार्रवाई का तो इशारा कर दिया था मगर यह खुलासा नहीं किया था कि कार्रवाई आज होगी। अचानक पांच बजे अफसर फोर्स के साथ जवाहर बाग में दाखिल हो गए।
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