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कमिश्नर, आईजी, डीआईजी, समेत बड़े अफसर थे अपने बंगले में और एसपी सिटी जूझ रहे थे उपद्रवियों से
अमर उजाला
Updated Sat, 04 Jun 2016 05:49 AM IST
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आपरेशन जवाहर बाग
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कमिश्नर, आईजी, डीआईजी, जिलाधिकारी और एसएसपी अपने बंगलों में थे जबकि एसपी सिटी अकेले जवाहर बाग की बाउंड्री तुड़वाने चले गए। पूर्व डीजीपी का कहना है कि जब पता है कि हजारों की भीड़ है और बवाल कर सकती है तो आईजी, कमिश्नर, एसएसपी और डीएम भारी पुलिस फोर्स के साथ वहां होने चाहिए। लेकिन अकेले एसपी सिटी को ही भेज दिया गया।
प्रदेश के पूर्व डीजीपी एके जैन का कहना है कि जैसा कि उन्हें अफसरों से पता चला है कि जवाहर बाग में हजारों लोग थे। असलहे भी थे। तब तो पूरा आपरेशन बड़ी चौकसी के साथ चलाना चाहिए था। आईजी, कमिश्नर, डीएम और एसएसपी को भी साथ होना चाहिए था। अकेले एसपी सिटी को वहां भेजना अफसरों की बड़ी कमजोरी को साबित करता है।
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है कि इस समय पुलिस सियासी प्रेशर में है। जरा सा कोई अभियान चलता है तो फोन आने लगते हैं। इस मामले में भी यही रहा होगा। उनका कहना है कि पुलिस को पूरी प्लानिंग के साथ अभियान चलाना चाहिए था। भारी फोर्स के साथ जवाहर बाग को कवर करना चाहिए। ऐसे में पीएसी के अधिकारियों को बुलाया जाता है।
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पूर्व डीजीपी ब्रजलाल का कहना है कि पुलिस की प्लानिंग फेल रही। मथुरा के बड़े अधिकारियों ने सही से रणनीति ही नहीं बनाई। जिस तरह की सूचनाएं मिल रही हैं उसके मुताबिक एसपी सिटी को बड़े अफसरों का सहयोग नहीं मिला था। वैसे भी इस तरह के आपरेशन अर्ली मार्निंग में चलने चाहिए थेे।
पूर्व डीजी उद्दयन परमार का कहना है कि जब भी कोई बड़ा आपरेशन चलाया जाता है तो वहां बड़े अधिकारियों की मौजूदगी भर से फोर्स का मनोबल बढ़ा रहता है। लेकिन इस अभियान में बड़े अधिकारियों का बाद में पहुंचना समझ से परे है। या तो किसी को उम्मीद नहीं रही होगी कि अचानक हमला हो जाएगा।
कमिश्नर और आईजी भी रात को पहुंचे
पुलिस पर शाम को करीब साढ़े पांच बजे हमला हुआ था लेकिन आगरा से कमिश्नर, डीआईजी और आईजी रात को मथुरा पहुंचे। जबकि आगरा से मथुरा की दूरी महज एक घंटे में पूरी हो सकती है। बड़े आपरेशन के दौरान इन्हें मौके पर होना चाहिए था।
पुलिस पर हुए एक हजार 44 हमले
पूर्व डीजीपी ब्रजलाल का कहना है कि सपा सरकार में पुलिस पर एक हजार 44 हमले हुए हैं। आए दिन हमले किए जा रहे हैं।
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प्रदेश के पूर्व डीजीपी एके जैन का कहना है कि जैसा कि उन्हें अफसरों से पता चला है कि जवाहर बाग में हजारों लोग थे। असलहे भी थे। तब तो पूरा आपरेशन बड़ी चौकसी के साथ चलाना चाहिए था। आईजी, कमिश्नर, डीएम और एसएसपी को भी साथ होना चाहिए था। अकेले एसपी सिटी को वहां भेजना अफसरों की बड़ी कमजोरी को साबित करता है।
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पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है कि इस समय पुलिस सियासी प्रेशर में है। जरा सा कोई अभियान चलता है तो फोन आने लगते हैं। इस मामले में भी यही रहा होगा। उनका कहना है कि पुलिस को पूरी प्लानिंग के साथ अभियान चलाना चाहिए था। भारी फोर्स के साथ जवाहर बाग को कवर करना चाहिए। ऐसे में पीएसी के अधिकारियों को बुलाया जाता है।
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पूर्व डीजीपी ब्रजलाल का कहना है कि पुलिस की प्लानिंग फेल रही। मथुरा के बड़े अधिकारियों ने सही से रणनीति ही नहीं बनाई। जिस तरह की सूचनाएं मिल रही हैं उसके मुताबिक एसपी सिटी को बड़े अफसरों का सहयोग नहीं मिला था। वैसे भी इस तरह के आपरेशन अर्ली मार्निंग में चलने चाहिए थेे।
पूर्व डीजी उद्दयन परमार का कहना है कि जब भी कोई बड़ा आपरेशन चलाया जाता है तो वहां बड़े अधिकारियों की मौजूदगी भर से फोर्स का मनोबल बढ़ा रहता है। लेकिन इस अभियान में बड़े अधिकारियों का बाद में पहुंचना समझ से परे है। या तो किसी को उम्मीद नहीं रही होगी कि अचानक हमला हो जाएगा।
कमिश्नर और आईजी भी रात को पहुंचे
पुलिस पर शाम को करीब साढ़े पांच बजे हमला हुआ था लेकिन आगरा से कमिश्नर, डीआईजी और आईजी रात को मथुरा पहुंचे। जबकि आगरा से मथुरा की दूरी महज एक घंटे में पूरी हो सकती है। बड़े आपरेशन के दौरान इन्हें मौके पर होना चाहिए था।
पुलिस पर हुए एक हजार 44 हमले
पूर्व डीजीपी ब्रजलाल का कहना है कि सपा सरकार में पुलिस पर एक हजार 44 हमले हुए हैं। आए दिन हमले किए जा रहे हैं।