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बिटिया की मौतः छेड़छाड़ से आजिज आकर खुद को लगा ली थी आग
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 28 Feb 2016 06:58 PM IST
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छेड़छाड़ से परेशान होकर गत 23 फरवरी को अपने को आग लगाने वाली बिटिया की रविवार की सुबह उपचार के दौरान मौत हो गई। जानकारी पर स्वयंसेवी संगठन और राजनीतिक दलों के लोग पहुंच गए।
पुलिस और प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवार की सुरक्षा की मांग रखी। मुआवजा राशि बढ़ाने, शराब के ठेकों को बंद करने की मांग उठाई। डीएम ने आश्वासन दिया। इस बीच बिटिया का परिवार शांत ही रहा। परिवार के हर सदस्य का चेहरा आंसुओं से भरा हुआ था। कहते भी क्या, सब हो जाएगा लेकिन बिटिया तो वापस नहीं आएगी।
वह मात्र 17 साल की थी। इंटर की परीक्षा दे रही थी। दो माह से गांव सुनरख निवासी राजाबाबू और मोहन उसे परेशान कर रहे थे। ट्यूशन जाते समय भी रास्ता रोक लेते। अकेली होती तो घर में घुस आते। चाचा ने उनके घरवालों से शिकायत भी की।
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वे पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी पर उल्टा उन्हें ही धमकाने लगे। तब भयवश उन्होंने चुप्पी साध ली थी। वे बाहर नौकरी पर गए बिटिया के पिता के आने का इंतजार कर रहे थे ताकि पुलिस में शिकायत से पहले उनकी राय ले ली जाए।
इससे पहले ही 23 फरवरी की सुबह करीब 9:30 बजे अनहोनी घट गई। घर में अकेली बिटिया के मोबाइल पर आरोपियों की काल आई। वह इतनी डर गई कि खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली।
चीखपुकार पर आए पड़ोसियों ने उसे हास्पिटल में भर्ती कराया। 90 प्रतिशत झुलसी अवस्था में वह तब से जीवन के लिए संघर्ष कर रही थी। रविवार तड़के करीब 5:30 बजे उसने अंतिम सांस ली।
जिसको पता चला हास्पिटल पहुंच गया। चेयरमैन मुकेश गौतम, कनकधारा फाउंडेशन की अध्यक्षा डा. लक्ष्मी गौतम, भाजपा नेता सुनील चतुर्वेदी, विहिप अध्यक्ष सौरभ गौड़, बसपा नेता योगेश द्विवेदी, तुलसी स्वामी, श्याम सुंदर गौतम, प्रधान मुकेश सारस्वत, ऋषभ उपाध्याय आदि ने परिवार के सदस्यों को ढांढस बंधाया।
इस बीच पुलिस पोस्टमार्टम के लिए छात्रा के शव का पंचनामा भरने लगी। सभी विरोध करते हुए छात्रा के शव के पास बैठ गए और अधिकारियों के आने की मांग की।
कुछ देर में सिटी मजिस्ट्रेट विजय कुमार, एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी, सीओ आके गौतम पहुंच गए। लेकिन लोग डीएम के मौके पर आने और आर्थिक सहायता राशि को आज ही देने की मांग पर अड़ गए।
कुछ देर में डीएम राजेश कुमार भी वर्मा अस्पताल पहुंच गए। लोगों ने आर्थिक सहायता की राशि पांच लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने, सुनरख मार्ग पर स्थित सभी शराब और बीयर के ठेकों को बंद कराने, पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की मांग की।
डीएम ने कहा कि पीड़ित परिवार को शासन से स्वीकृत पांच लाख रुपये की राशि जल्द ही दे दी जाएगी। वह इस राशि को बढ़ाने के लिए शासन को लिखेंगे। सुनरख के आसपास के सभी शराब के ठेेकों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।
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पुलिस और प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवार की सुरक्षा की मांग रखी। मुआवजा राशि बढ़ाने, शराब के ठेकों को बंद करने की मांग उठाई। डीएम ने आश्वासन दिया। इस बीच बिटिया का परिवार शांत ही रहा। परिवार के हर सदस्य का चेहरा आंसुओं से भरा हुआ था। कहते भी क्या, सब हो जाएगा लेकिन बिटिया तो वापस नहीं आएगी।
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वह मात्र 17 साल की थी। इंटर की परीक्षा दे रही थी। दो माह से गांव सुनरख निवासी राजाबाबू और मोहन उसे परेशान कर रहे थे। ट्यूशन जाते समय भी रास्ता रोक लेते। अकेली होती तो घर में घुस आते। चाचा ने उनके घरवालों से शिकायत भी की।
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वे पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी पर उल्टा उन्हें ही धमकाने लगे। तब भयवश उन्होंने चुप्पी साध ली थी। वे बाहर नौकरी पर गए बिटिया के पिता के आने का इंतजार कर रहे थे ताकि पुलिस में शिकायत से पहले उनकी राय ले ली जाए।
इससे पहले ही 23 फरवरी की सुबह करीब 9:30 बजे अनहोनी घट गई। घर में अकेली बिटिया के मोबाइल पर आरोपियों की काल आई। वह इतनी डर गई कि खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली।
चीखपुकार पर आए पड़ोसियों ने उसे हास्पिटल में भर्ती कराया। 90 प्रतिशत झुलसी अवस्था में वह तब से जीवन के लिए संघर्ष कर रही थी। रविवार तड़के करीब 5:30 बजे उसने अंतिम सांस ली।
जिसको पता चला हास्पिटल पहुंच गया। चेयरमैन मुकेश गौतम, कनकधारा फाउंडेशन की अध्यक्षा डा. लक्ष्मी गौतम, भाजपा नेता सुनील चतुर्वेदी, विहिप अध्यक्ष सौरभ गौड़, बसपा नेता योगेश द्विवेदी, तुलसी स्वामी, श्याम सुंदर गौतम, प्रधान मुकेश सारस्वत, ऋषभ उपाध्याय आदि ने परिवार के सदस्यों को ढांढस बंधाया।
इस बीच पुलिस पोस्टमार्टम के लिए छात्रा के शव का पंचनामा भरने लगी। सभी विरोध करते हुए छात्रा के शव के पास बैठ गए और अधिकारियों के आने की मांग की।
कुछ देर में सिटी मजिस्ट्रेट विजय कुमार, एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी, सीओ आके गौतम पहुंच गए। लेकिन लोग डीएम के मौके पर आने और आर्थिक सहायता राशि को आज ही देने की मांग पर अड़ गए।
कुछ देर में डीएम राजेश कुमार भी वर्मा अस्पताल पहुंच गए। लोगों ने आर्थिक सहायता की राशि पांच लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने, सुनरख मार्ग पर स्थित सभी शराब और बीयर के ठेकों को बंद कराने, पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की मांग की।
डीएम ने कहा कि पीड़ित परिवार को शासन से स्वीकृत पांच लाख रुपये की राशि जल्द ही दे दी जाएगी। वह इस राशि को बढ़ाने के लिए शासन को लिखेंगे। सुनरख के आसपास के सभी शराब के ठेेकों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।