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मृतक हिस्ट्रीशीटरों की भी हो रही थी ‘निगरानी’

Wed, 04 May 2016 11:34 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा Updated Wed, 04 May 2016 11:34 PM IST
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criminal of mathura
अपराध
 वह अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी हिस्ट्रीशीट थानों में खुली हुई हैं। जनपद में ऐसे मामले 100 से अधिक बताए जा रहे हैं। विगत पांच साल में एक भी हिस्ट्रीशीट बंद नहीं की गई। 
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अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेकर एसएसपी ने जब सभी थानों से हिस्ट्रीशीट मंगाई तो इसका खुलासा हुआ। 20 अप्रैल के संस्करण में ‘आठ साल, हिस्ट्रीशीट में रिमार्क तक नहीं’ शीर्षक से ये खबर प्रकाशित की गई थी।
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एसएसपी के निर्देश पर थानों से मंगाई गई हिस्ट्रीशीट का एसपी देहात अरुण कुमार सिंह ने बारीकी से निरीक्षण कराया। एसएसपी डा. राकेश सिंह ने बताया कि निरीक्षण में पता चला है कि थाना मगोर्रा में छह, शेरगढ़ में सात, बरसाना में 17, सुरीर में सात हिस्ट्रीशीटरों की मौत पांच साल पहले हो चुकी है।
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लेकिन वे पुलिस की फाइलों में जिंदा हैं। उन्होंने बताया कि सभी थानों की हिस्ट्रीशीट का निरीक्षण चल रहा है। इसमें 100 से अधिक ऐसे हिस्ट्रीशीटर हैं, जिनकी पांच साल पूर्व मौत हो गई है। 

आठ साल से रिमार्क नहीं
अपराधों पर अंकुश के लिहाज से पुलिस हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी करती है। साल के अंत में पुराने हिस्ट्रीशीटराें के संबंध में उनकी फाइल में इलाका इंचार्ज और थानाध्यक्ष उनके अपराध में सक्रिय होने और ताजा स्थिति पर रिमार्क लिखते हैं। मथुरा पुलिस ने जनपद के 20 थाना क्षेत्र में 1,123 हिस्ट्रीशीटरों की फाइल में आठ साल से एक का भी रिमार्क नहीं लिखा। 100 से अधिक हिस्ट्रीशीटरों की मौत हो गई।

लापरवाह दरोगा, एसओ पर होगी कार्रवाई 
मथुरा। एसएसपी ने कहा कि हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी न करने, रिमार्क न लिखने वाले इलाका इंचार्ज और थानाध्यक्ष की सीओ से जांच रिपोर्ट मांगी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 


जलाई जाएंगी मृतकों की हिस्ट्रीशीट
मथुरा। हिस्ट्रीशीटरों की मौत हो जाने के बाद उनके कागजातों को जलाए जाने का प्रावधान है। इसमें हिस्ट्रीशीट के अभिलेखों को एसएसपी के आदेश पर सीओ की उपस्थिति में जलाया जाएगा और उनको जमींदोज कराया जाएगा। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। 
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