{"_id":"21f2899f828ef4096289241780235cce","slug":"corruption-in-mathura-jail-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेल से चौथ वसूली कर रहा था मावी गैंग","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जेल से चौथ वसूली कर रहा था मावी गैंग
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 22 Jan 2015 12:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्रजेश मावी गैंग के चौथ वसूली का धंधा जिला जेल में भी जारी था। गैंगवार मामले में गिरफ्तार जेल आरक्षी कैलाश इसमें गैंग के लोगों की मदद कर रहा था। कैलाश के मोबाइल की कॉल डिटेल के आधार पर इसका खुलासा हुआ है। जेल में ड्यूटी के दौरान दीपक वर्मा की कैलाश ने गोपाल यादव से कई बार बात कराई।
जिला जेल में 17 जनवरी को हुए गैंगवार में बंदी रक्षक कैलाश गुप्ता मावी गैंग के लिए सूचना देने वाले की भूमिका में रहा। कैलाश के मोबाइल केे जरिए ही दीपक वर्मा चौथ वसूली भी करता था। इसमें गोपाल यादव जेल के बाहर की व्यवस्था संभाले था। जेल में हुए गैंगवार के बाद पुलिस ने बंदी रक्षकों के मोबाइल नंबर लेकर उनकी कॉल डिटेल निकलवाई थी।
सभी जेल कर्मियों के ड्यूटी चार्ट भी लिए। इस दौरान पुलिस टीम कैलाश गुप्ता के मोबाइल की कॉल डिटेल देखकर चकित रह गईं। 18 जनवरी को ड्यूटी के दौरान रात में डेढ़ बजे जेल से कैलाश गुप्ता को पकड़ा गया। इधर ब्रजेश मावी की हत्या मामले में गोपाल यादव सरकारी गवाह था। इसलिए पुलिस कर्मियों के पास गोपाल यादव का मोबाइल नंबर भी था। कैलाश के मोबाइल की कॉल रिकार्ड देखने के बाद पुलिस ने सीधे गोपाल यादव को पकड़ा और पूछताछ में वह सब कबूल गया।
विज्ञापन
बंदी रक्षक की बर्खास्तगी की तैयारी
राजेश टोेंटा की सुरक्षा ड्यूटी में लगे सिपाही संतोष कुमार की बर्खास्तगी के बाद जेल प्रशासन भी बंदी रक्षक कैलाश गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई में जुट गया है। इसके लिए बंदी रक्षक के खिलाफ पर्याप्त सुबूत जुटाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कैलाश गुप्ता के आठ साल पहले आगरा जेल में किए गए संदिग्ध आचरण के सुबूत भी जेल प्रशासन ने जुटाए हैं। मथुरा पुलिस से उसके मोबाइल की कॉल डिटेल लेकर उसे बर्खास्त करने की सिफारिश की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जेल अधीक्षक पीडी सलोनिया ने बताया कि बंदी रक्षक कैलाश गुप्ता के चरित्र आदि के दस्तावेज जुटाकर अधिकारियों से राय मशविरा किया जा रहा है।
जेल से शिफ्ट होंगे मावी गैंग के लोग
जिला जेल में गैंगवार के बाद अब लगभग 12 से अधिक कुख्यात कैदियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट किया जाएगा। पहले चरण में मावी गैंग के चार लोगों को शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है। इसमें दीपक वर्मा सहित अन्य नाम हैं। जेल अधिकारियों ने इस प्रक्रिया के लिए प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारियों से पत्राचार किया है।
विज्ञापन
जिला जेल में 17 जनवरी को हुए गैंगवार में बंदी रक्षक कैलाश गुप्ता मावी गैंग के लिए सूचना देने वाले की भूमिका में रहा। कैलाश के मोबाइल केे जरिए ही दीपक वर्मा चौथ वसूली भी करता था। इसमें गोपाल यादव जेल के बाहर की व्यवस्था संभाले था। जेल में हुए गैंगवार के बाद पुलिस ने बंदी रक्षकों के मोबाइल नंबर लेकर उनकी कॉल डिटेल निकलवाई थी।
विज्ञापन
सभी जेल कर्मियों के ड्यूटी चार्ट भी लिए। इस दौरान पुलिस टीम कैलाश गुप्ता के मोबाइल की कॉल डिटेल देखकर चकित रह गईं। 18 जनवरी को ड्यूटी के दौरान रात में डेढ़ बजे जेल से कैलाश गुप्ता को पकड़ा गया। इधर ब्रजेश मावी की हत्या मामले में गोपाल यादव सरकारी गवाह था। इसलिए पुलिस कर्मियों के पास गोपाल यादव का मोबाइल नंबर भी था। कैलाश के मोबाइल की कॉल रिकार्ड देखने के बाद पुलिस ने सीधे गोपाल यादव को पकड़ा और पूछताछ में वह सब कबूल गया।
विज्ञापन
बंदी रक्षक की बर्खास्तगी की तैयारी
राजेश टोेंटा की सुरक्षा ड्यूटी में लगे सिपाही संतोष कुमार की बर्खास्तगी के बाद जेल प्रशासन भी बंदी रक्षक कैलाश गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई में जुट गया है। इसके लिए बंदी रक्षक के खिलाफ पर्याप्त सुबूत जुटाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कैलाश गुप्ता के आठ साल पहले आगरा जेल में किए गए संदिग्ध आचरण के सुबूत भी जेल प्रशासन ने जुटाए हैं। मथुरा पुलिस से उसके मोबाइल की कॉल डिटेल लेकर उसे बर्खास्त करने की सिफारिश की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जेल अधीक्षक पीडी सलोनिया ने बताया कि बंदी रक्षक कैलाश गुप्ता के चरित्र आदि के दस्तावेज जुटाकर अधिकारियों से राय मशविरा किया जा रहा है।
जेल से शिफ्ट होंगे मावी गैंग के लोग
जिला जेल में गैंगवार के बाद अब लगभग 12 से अधिक कुख्यात कैदियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट किया जाएगा। पहले चरण में मावी गैंग के चार लोगों को शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है। इसमें दीपक वर्मा सहित अन्य नाम हैं। जेल अधिकारियों ने इस प्रक्रिया के लिए प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारियों से पत्राचार किया है।