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सीएमएस, ईएमओ निलंबित, अब सीएमओ की बारी
मुथुरा
Updated Thu, 25 May 2017 12:06 AM IST
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murder
- फोटो : demo
सराफ हत्याकांड व लूट के मामले में घायल सराफा कारोबारियों को जब अस्पताल में लाया गया तो उनके उपचार में गंभीर लापरवाही बरती गई। इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा.अनूप कुमार अंबेश और इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर को निलंबित कर दिया गया है। माना जा रहा है कि अब मुख्य चिकित्सा अधिकारी पर भी कार्रवाई होना तय है। निलंबन के
आदेश शासन से हुए हैं। 15 मई की रात कोयला वाली गली स्थित मयंक चेंस के यहां लूट हुई थी तो उस समय बदमाशों की गोली से घायल हुए विकास अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, मोहम्मद अली, अशोक साहू को जिला अस्पताल लाया गया था। इस दौरान अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं मिला। यहां तक कि मरीजों को ले जाने के लिये एंबुलेंस की व्यवस्था तक
मिली। इससे कुछ देर बाद ही विकास अग्रवाल की मौत हो गई। तब परिजनों ने चिकित्सकों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले को सरकार ने भी गंभीरता से लिया। मंत्री श्रीकांत शर्मा ने चिकित्सकों की लापरवाही सबंधी पत्रावली मुख्यमंत्री को सौंपी थी। इस मामले में चिकित्सा विभाग के सचिव आलोक कुमार ने जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा.अनूप कुमार अंबेश और इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर सुशील कुमार को निलंबित करने का आदेश जारी किया है।
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निलंबन पत्र में तल्ख टिप्पणी
पत्र में कहा गया है कि जब घायल अस्पताल पहुंचे तो सीएमएस डा.अनूप अंबेश और डा.सुशील कुमार उपस्थित नहीं थे। ये दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही है। आपके इस कृत्य से सरकार की छवि धूमिल हुई है। इस दौरान भत्ते भी इस प्रमाणपत्र के बाद मिलेंगे कि वो किसी और सेवायोजन, व्यवसाय में नहीं लगे हैं।
अब जिला अस्पताल में ही रुकेंगे एंबुलेंस चालक
अब 108 एंबुलेंस चालकों के लिये जिला अस्पताल में ही ड्यूटी रूम बनाया जा रहा है। ताकि मरीज को एंबुलेंस की आवश्यकता होने पर अनावश्यक विलंब न हो। 15 मई को कोयला वाली गली में हुई लूट के बाद जिला अस्पताल आए घायलों को अस्पताल प्रशासन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करा सका था। उस दौरान अस्पताल परिसर में एंबुलेंस तो थी लेकिन, चालक नहीं था। इस घटना के बाद व्यवस्था की गई अब जिला अस्पताल में 108 की दो एंबुलेंस हर समय उपलब्ध रहेगीं और इनके चालक भीड्यूटी रूम में होंगे। इसके लिये पुरानी इमरजेंसी वाले भवन को ठीक किया जा रहा है।
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आदेश शासन से हुए हैं। 15 मई की रात कोयला वाली गली स्थित मयंक चेंस के यहां लूट हुई थी तो उस समय बदमाशों की गोली से घायल हुए विकास अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, मोहम्मद अली, अशोक साहू को जिला अस्पताल लाया गया था। इस दौरान अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं मिला। यहां तक कि मरीजों को ले जाने के लिये एंबुलेंस की व्यवस्था तक
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मिली। इससे कुछ देर बाद ही विकास अग्रवाल की मौत हो गई। तब परिजनों ने चिकित्सकों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले को सरकार ने भी गंभीरता से लिया। मंत्री श्रीकांत शर्मा ने चिकित्सकों की लापरवाही सबंधी पत्रावली मुख्यमंत्री को सौंपी थी। इस मामले में चिकित्सा विभाग के सचिव आलोक कुमार ने जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा.अनूप कुमार अंबेश और इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर सुशील कुमार को निलंबित करने का आदेश जारी किया है।
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निलंबन पत्र में तल्ख टिप्पणी
पत्र में कहा गया है कि जब घायल अस्पताल पहुंचे तो सीएमएस डा.अनूप अंबेश और डा.सुशील कुमार उपस्थित नहीं थे। ये दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही है। आपके इस कृत्य से सरकार की छवि धूमिल हुई है। इस दौरान भत्ते भी इस प्रमाणपत्र के बाद मिलेंगे कि वो किसी और सेवायोजन, व्यवसाय में नहीं लगे हैं।
अब जिला अस्पताल में ही रुकेंगे एंबुलेंस चालक
अब 108 एंबुलेंस चालकों के लिये जिला अस्पताल में ही ड्यूटी रूम बनाया जा रहा है। ताकि मरीज को एंबुलेंस की आवश्यकता होने पर अनावश्यक विलंब न हो। 15 मई को कोयला वाली गली में हुई लूट के बाद जिला अस्पताल आए घायलों को अस्पताल प्रशासन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करा सका था। उस दौरान अस्पताल परिसर में एंबुलेंस तो थी लेकिन, चालक नहीं था। इस घटना के बाद व्यवस्था की गई अब जिला अस्पताल में 108 की दो एंबुलेंस हर समय उपलब्ध रहेगीं और इनके चालक भीड्यूटी रूम में होंगे। इसके लिये पुरानी इमरजेंसी वाले भवन को ठीक किया जा रहा है।