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ढाई माह में टायर फटने से गई 17 की जान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Mar 2016 12:10 AM IST
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एक्सप्रेसवे
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देश की राजधानी दिल्ली को ताज के शहर आगरा का सफर कम समय में कराने के मकसद से बनाया गया एक्सप्रेसवे खतरनाक बनता जा रहा है। इस साल के शुरुआती ढाई माह ही 32 वाहन टायर फटने से दुर्घटनाग्रस्त हो गए।
17 लोगों की असमय मौत हो गई और 33 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। सोमवार को एसएसपी गाजियाबाद धर्मेंद्र यादव की भतीजी और भांजी की भी मौत स्कॉर्पियो का टायर फटने की वजह से हुई थी।
नोएडा से आगरा तक 100 मीटर चौड़ाई में बने यमुना एक्सप्रेसवे का सफर शुरू में सुरक्षित माना जाता था, लेकिन अब हालात जुदा हैं। सर्दी में कोहरा इस पर काल बनता है तो गर्मी शुरू होते ही सड़क पर टायर फटने से लोगों की मौत होने का सिलसिला चल पड़ता है।
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कंट्रोल रूम के आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी से 22 मार्च तक तेज रफ्तार के चलते 32 गाड़ियों के टायर फट गए। इनमें ज्यादातर गाड़ियां टायर फटते ही असंतुलित होकर डिवाइडर और रेलिंग से टकराकर पलट गईं। कई गाड़ियां तो एक्सप्रेसवे से नीचे भी गिरीं। 82 दिनों में 32 दुर्घटनाएं लोगों को डराने लगी हैं।
33 गंभीर रूप से घायल लोग हादसे का दर्द लेकर लौटे हैं। साल 2015 में एक्सप्रेसवे पर 57 लोग मरे थे और 590 लोग घायल हुए थे। इस बार हादसे में मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
शुभारंभ के तीसरे दिन ही फटा था टायर
यमुना एक्सप्रेसवे का श्रीगणेश नौ अगस्त 2012 को हुआ था। इसके तीसरे दिन 12 अगस्त को ग्राम सराय सालवान के निकट वैगनआर कार का टायर फटने से चार छात्र गंभीर रूप से घायल हुए थे।
फैक्ट फाइल
- मथुरा से आगरा तक 165 किलोमीटर लंबा है यमुना एक्सप्रेसवे
- मथुरा की सीमा में नौहझील के गांव चांदपुर खुर्द से बलदेव में मादौर तक है क्षेत्र
- ज्यादातर एक्सप्रेसवे पर बनी है सीमेंट की सड़क
- 100 किलोमीटर प्रति घंटा नियत है अधिकतम स्पीड
- 120 से 140 की गति से दौड़ाते हैं ज्यादातर वाहन चालक
- तेज रफ्तार के कारण 90 तक हो जाता है टायरों में हवा का प्रेशर, इसी से फटते हैं टायर
- सीमेंट रोड पर ज्यादा गर्म होते हैं टायर
इस सावधानी से होगा सफर सुरक्षित
- एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के दौरान भरी जाए टायरों में नाइट्रोजन गैस
- जाबरा, खंदौली, जेवर टोल प्लाजा पर टायरों को ठंडा करने को डाला जाए पानी
- एक्सप्रेसवे पर चढ़ते ही हवा कु छ कम कर लें
- निर्धारित 100 की गति से अधिक गाड़ी न दौड़ाएं
10 जनवरी को सात एनआरआई की हुई थी मौत
कड़कड़ाती ठंड में 10 जनवरी को भी तेज रफ्तार दौड़ रही क्वालिस गाड़ी का टायर फट गया था। हादसे में सात एनआरआई की मौत हो गई थी। दिल्ली मूल के लक्ष्मीनगर निवासी और आस्ट्रेलिया में होटल चला रहे 48 वर्षीय रूपेन कुमार दत्ता का पूरा परिवार एक्सप्रेसवे के हादसे में तबाह हो गया।
पूरा परिवार दो रिश्तेदारों के साथ दिल्ली से क्वालिस गाड़ी से आगरा ताजमहल देखने आ रहे थे। सुरीर कोतवाली क्षेत्र में क्वालिस का टायर फट जाने से गाड़ी नीचे गिर गई थी और उसमें सवार रूपेन दत्ता की पत्नी अनामिका दत्ता, बेटा दिग्विजय दत्ता, बेटी विपाशा दत्ता, निकिता दत्ता, ससुर नरेंद्र मल्होत्रा और साली सोनिया मल्होत्रा की मौत हो गई थी।
टायर फटने से लगे जाम में फंसी थीं हेमा
थाना मांट क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर दो माह पूर्व एक गाड़ी का टायर फट गया था। टायर फटने से सड़क पर जाम लग गया था। जाम में सिने तारिका और मथुरा की सांसद हेमामालिनी भी जाम में फंस गई थीं। जनवरी माह में पड़े घनघोर कोहरे में भी हेमामालिनी को दो घंटे तक मांट के टोल प्लाजा पर रुकना पड़ा था।
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17 लोगों की असमय मौत हो गई और 33 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। सोमवार को एसएसपी गाजियाबाद धर्मेंद्र यादव की भतीजी और भांजी की भी मौत स्कॉर्पियो का टायर फटने की वजह से हुई थी।
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नोएडा से आगरा तक 100 मीटर चौड़ाई में बने यमुना एक्सप्रेसवे का सफर शुरू में सुरक्षित माना जाता था, लेकिन अब हालात जुदा हैं। सर्दी में कोहरा इस पर काल बनता है तो गर्मी शुरू होते ही सड़क पर टायर फटने से लोगों की मौत होने का सिलसिला चल पड़ता है।
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कंट्रोल रूम के आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी से 22 मार्च तक तेज रफ्तार के चलते 32 गाड़ियों के टायर फट गए। इनमें ज्यादातर गाड़ियां टायर फटते ही असंतुलित होकर डिवाइडर और रेलिंग से टकराकर पलट गईं। कई गाड़ियां तो एक्सप्रेसवे से नीचे भी गिरीं। 82 दिनों में 32 दुर्घटनाएं लोगों को डराने लगी हैं।
33 गंभीर रूप से घायल लोग हादसे का दर्द लेकर लौटे हैं। साल 2015 में एक्सप्रेसवे पर 57 लोग मरे थे और 590 लोग घायल हुए थे। इस बार हादसे में मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
शुभारंभ के तीसरे दिन ही फटा था टायर
यमुना एक्सप्रेसवे का श्रीगणेश नौ अगस्त 2012 को हुआ था। इसके तीसरे दिन 12 अगस्त को ग्राम सराय सालवान के निकट वैगनआर कार का टायर फटने से चार छात्र गंभीर रूप से घायल हुए थे।
फैक्ट फाइल
- मथुरा से आगरा तक 165 किलोमीटर लंबा है यमुना एक्सप्रेसवे
- मथुरा की सीमा में नौहझील के गांव चांदपुर खुर्द से बलदेव में मादौर तक है क्षेत्र
- ज्यादातर एक्सप्रेसवे पर बनी है सीमेंट की सड़क
- 100 किलोमीटर प्रति घंटा नियत है अधिकतम स्पीड
- 120 से 140 की गति से दौड़ाते हैं ज्यादातर वाहन चालक
- तेज रफ्तार के कारण 90 तक हो जाता है टायरों में हवा का प्रेशर, इसी से फटते हैं टायर
- सीमेंट रोड पर ज्यादा गर्म होते हैं टायर
इस सावधानी से होगा सफर सुरक्षित
- एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के दौरान भरी जाए टायरों में नाइट्रोजन गैस
- जाबरा, खंदौली, जेवर टोल प्लाजा पर टायरों को ठंडा करने को डाला जाए पानी
- एक्सप्रेसवे पर चढ़ते ही हवा कु छ कम कर लें
- निर्धारित 100 की गति से अधिक गाड़ी न दौड़ाएं
10 जनवरी को सात एनआरआई की हुई थी मौत
कड़कड़ाती ठंड में 10 जनवरी को भी तेज रफ्तार दौड़ रही क्वालिस गाड़ी का टायर फट गया था। हादसे में सात एनआरआई की मौत हो गई थी। दिल्ली मूल के लक्ष्मीनगर निवासी और आस्ट्रेलिया में होटल चला रहे 48 वर्षीय रूपेन कुमार दत्ता का पूरा परिवार एक्सप्रेसवे के हादसे में तबाह हो गया।
पूरा परिवार दो रिश्तेदारों के साथ दिल्ली से क्वालिस गाड़ी से आगरा ताजमहल देखने आ रहे थे। सुरीर कोतवाली क्षेत्र में क्वालिस का टायर फट जाने से गाड़ी नीचे गिर गई थी और उसमें सवार रूपेन दत्ता की पत्नी अनामिका दत्ता, बेटा दिग्विजय दत्ता, बेटी विपाशा दत्ता, निकिता दत्ता, ससुर नरेंद्र मल्होत्रा और साली सोनिया मल्होत्रा की मौत हो गई थी।
टायर फटने से लगे जाम में फंसी थीं हेमा
थाना मांट क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर दो माह पूर्व एक गाड़ी का टायर फट गया था। टायर फटने से सड़क पर जाम लग गया था। जाम में सिने तारिका और मथुरा की सांसद हेमामालिनी भी जाम में फंस गई थीं। जनवरी माह में पड़े घनघोर कोहरे में भी हेमामालिनी को दो घंटे तक मांट के टोल प्लाजा पर रुकना पड़ा था।