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जब्त शराब का धंधा: तस्कर, पुलिस, आबकारी का गठजोड़ सब पर भारी
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पुलिस चौकी पर शराब की गिनती कराते हुए एसपी यातायात ज्ञानेन्द्र कुमार, एसपी ग्रामीण श्रीशचंद्र।
- फोटो : KOSI
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मथुरा। थाना कोसीकलां की कोटवन चौकी पुलिस और तस्कर की मिलीभगत से जब्त की गई शराब बेचने के मामले ने पुलिस प्रशासन में खलबली मचा दी है। यहां तस्कर, पुलिस और आबकारी के गठजोड़ के कारण ही लंबे समय से जब्त शराब को बेचने का खेल चल रहा था। अजीजपुर स्थित कांशीराम कॉलोनी के आवास में अड्डा बनाकर किए जा रहे इस धंधे की भनक आबकारी विभाग को न हो ये बात किसी के गले नहीं उतर रही।
शराब तस्कर विष्णु यह अड्डा चला रहा था, जिसे पुलिस का संरक्षण प्राप्त था। सभी ने अपनी-अपनी भूमिका निभाई और यह खेल चलता रहा। इसी तरह कोसीकलां थाने के पीछे स्थित कॉलोनी भी अवैध शराब के धंधे के लिए चर्चित है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी होती है। तस्कर, पुलिस और आबकारी का गठजोड़ इतना भारी दिखाई देता है कि इस मामले की लखनऊ तक गूंज होने के बाद भी इस मामले में जांच और कार्रवाई की रफ्तार अभी धीमी है।
सरकार द्वारा बेघरों के लिए चलाई गई कांशीराम आवासीय योजना अवैध धंधों के ठिकाने बन गए हैं। कोसीकलां पुलिस ने कांशीराम आवास योजना में चल रहे जिस ठिकाने का खुलासा किया है वह आवास विष्णु निवासी अजीजपुर के नाम था। विष्णु का नाम डूडा मेें दर्ज नहीं था। उसके द्वारा यह प्लाट किस माध्यम से लिया गया और डूडा अधिकारियों द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई जांच का विषय है।
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डूडा के संबंधित अधिकारियों के अनुसार तो वहां पर बहुत से आवासों का आवंटन नहीं हो सका है। जिसके चलते विष्णु ने भी आवास पर कब्जा कर रखा होगा। डूडा के सिटी मैनेजर नितिन ने बताया कि विष्ष्णु के नाम यहां पर कोई आवास आवंटित नहीं था। आबकारी अधिकारियों ने कभी इस आवास तक पहुंचने की जरूरत नहीं समझी।
पहले बनाते थे कच्ची शराब
कोसीकलां थाने के पीछे स्थित कॉलोनी कच्ची शराब बनाने के लिए लंबे समय से चर्चित रही है। पुलिस यहां अक्सर छापा मारती है। कुछ लोग पकड़े भी जाते हैं, शराब भी बरामद हुई है। लेकिन कॉलोनी में शराब का धंधा रुकना तो दूर और तेज हो गया। पहले कच्ची शराब बनती थी, लेकिन अब हरियाणा की शराब बिकती है। लोगों को पता है कि यदि कहीं शराब नहीं मिल रही है तो कोसीकलां थाने के पीछे जरूर मिल जाएगी। बताया जाता है कि दिनभर में किसी भी समय यहां शराब मिल जाती है। तस्कर कॉलोनी तक शराब पहुंचाते हैं। पुलिस जांच के नाम पर खानापूरी करती है और आबकारी अफसर वहां जाते तक नहीं।
लॉकडाउन के बाद लोगों ने की थी शिकायत
लॉकडाउन होने के कुछ दिन बाद थाने के पीछे कॉलोनी में रहने वाले कुछ लोगों ने कोसीकलां पुलिस को एक पत्र दिया कि कॉलोनी मेें अवैध शराब का धंधा होता है। पुलिस ने भी इस नूरा कुश्ती को बड़ी सफाई से अंजाम दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस न शराब पकड़ सकी और न ही शराब माफिया को। कोसीकलां पुलिस ने मात्र एक व्यक्ति से 20 पौआ हरियाणा ब्रांड की शराब पकड़कर औपचारिकता पूरी कर ली। एसपी देहात श्रीश चंन्द्र ने बताया कि वह ऐेसे सभी मामलों की छानबीन कर रहे हैं। गड़बड़ी पाए जाने पर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। उधर, जिला आबकारी अधिकारी ओमवीर सिंह ने कहा कि सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर जाकर कार्रवाई करती है।
गोवर्धन और अडींग की कॉलोनी में भी होती है हरियाणा ब्रांड की तस्करी
गोवर्धन थाने के पीछे तथा अडींग स्थित कॉलोनी भी हरियाणा ब्रांड की तस्करी के लिए कुख्यात हैं। गोवर्धन में करीब 15-20 घर तो अडींग में करीब 50 घर हैं। इनमें से अधिकांश द्वारा शराब की तस्करी का काम किया जाता है। विगत दिनों पुलिस ने औपचारिकता पूरी करते हुए कार्रवाई की परंतु शराब की बड़ी मात्रा बरामद नहीं हो सकी। इसी तरह वृंदावन तथा टाउनशिप के आवासों में रह रहे कई लोगों द्वारा गैरकानूनी काम किए जा रहे हैं।
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शराब तस्कर विष्णु यह अड्डा चला रहा था, जिसे पुलिस का संरक्षण प्राप्त था। सभी ने अपनी-अपनी भूमिका निभाई और यह खेल चलता रहा। इसी तरह कोसीकलां थाने के पीछे स्थित कॉलोनी भी अवैध शराब के धंधे के लिए चर्चित है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी होती है। तस्कर, पुलिस और आबकारी का गठजोड़ इतना भारी दिखाई देता है कि इस मामले की लखनऊ तक गूंज होने के बाद भी इस मामले में जांच और कार्रवाई की रफ्तार अभी धीमी है।
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सरकार द्वारा बेघरों के लिए चलाई गई कांशीराम आवासीय योजना अवैध धंधों के ठिकाने बन गए हैं। कोसीकलां पुलिस ने कांशीराम आवास योजना में चल रहे जिस ठिकाने का खुलासा किया है वह आवास विष्णु निवासी अजीजपुर के नाम था। विष्णु का नाम डूडा मेें दर्ज नहीं था। उसके द्वारा यह प्लाट किस माध्यम से लिया गया और डूडा अधिकारियों द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई जांच का विषय है।
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डूडा के संबंधित अधिकारियों के अनुसार तो वहां पर बहुत से आवासों का आवंटन नहीं हो सका है। जिसके चलते विष्णु ने भी आवास पर कब्जा कर रखा होगा। डूडा के सिटी मैनेजर नितिन ने बताया कि विष्ष्णु के नाम यहां पर कोई आवास आवंटित नहीं था। आबकारी अधिकारियों ने कभी इस आवास तक पहुंचने की जरूरत नहीं समझी।
पहले बनाते थे कच्ची शराब
कोसीकलां थाने के पीछे स्थित कॉलोनी कच्ची शराब बनाने के लिए लंबे समय से चर्चित रही है। पुलिस यहां अक्सर छापा मारती है। कुछ लोग पकड़े भी जाते हैं, शराब भी बरामद हुई है। लेकिन कॉलोनी में शराब का धंधा रुकना तो दूर और तेज हो गया। पहले कच्ची शराब बनती थी, लेकिन अब हरियाणा की शराब बिकती है। लोगों को पता है कि यदि कहीं शराब नहीं मिल रही है तो कोसीकलां थाने के पीछे जरूर मिल जाएगी। बताया जाता है कि दिनभर में किसी भी समय यहां शराब मिल जाती है। तस्कर कॉलोनी तक शराब पहुंचाते हैं। पुलिस जांच के नाम पर खानापूरी करती है और आबकारी अफसर वहां जाते तक नहीं।
लॉकडाउन के बाद लोगों ने की थी शिकायत
लॉकडाउन होने के कुछ दिन बाद थाने के पीछे कॉलोनी में रहने वाले कुछ लोगों ने कोसीकलां पुलिस को एक पत्र दिया कि कॉलोनी मेें अवैध शराब का धंधा होता है। पुलिस ने भी इस नूरा कुश्ती को बड़ी सफाई से अंजाम दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस न शराब पकड़ सकी और न ही शराब माफिया को। कोसीकलां पुलिस ने मात्र एक व्यक्ति से 20 पौआ हरियाणा ब्रांड की शराब पकड़कर औपचारिकता पूरी कर ली। एसपी देहात श्रीश चंन्द्र ने बताया कि वह ऐेसे सभी मामलों की छानबीन कर रहे हैं। गड़बड़ी पाए जाने पर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। उधर, जिला आबकारी अधिकारी ओमवीर सिंह ने कहा कि सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर जाकर कार्रवाई करती है।
गोवर्धन और अडींग की कॉलोनी में भी होती है हरियाणा ब्रांड की तस्करी
गोवर्धन थाने के पीछे तथा अडींग स्थित कॉलोनी भी हरियाणा ब्रांड की तस्करी के लिए कुख्यात हैं। गोवर्धन में करीब 15-20 घर तो अडींग में करीब 50 घर हैं। इनमें से अधिकांश द्वारा शराब की तस्करी का काम किया जाता है। विगत दिनों पुलिस ने औपचारिकता पूरी करते हुए कार्रवाई की परंतु शराब की बड़ी मात्रा बरामद नहीं हो सकी। इसी तरह वृंदावन तथा टाउनशिप के आवासों में रह रहे कई लोगों द्वारा गैरकानूनी काम किए जा रहे हैं।