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Mathura News: भक्ति रस में डूबा बरसाना, गोवर्धन लीला का हुआ रसपान
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आचार्य मनोज अवस्थी महाराज
बरसाना। कस्बे में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा स्थल भक्ति और आस्था से सराबोर रहा। अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक एवं समाज सुधारक आचार्य मनोज अवस्थी महाराज ने जब गोवर्धन लीला का दिव्य वर्णन किया तो वातावरण गोवर्धनधारी लाल की जय से गूंज उठा।
कथावाचक ने कहा कि आज मनुष्य प्रकृति से जितना छेड़छाड़ कर रहा है, उतने ही भयानक परिणाम सामने आ रहे हैं। रोग और अशांति का सरल उपाय केवल गो सेवा है। उन्होंने आग्रह किया कि प्रत्येक परिवार एक देसी गाय का पालन करे तभी स्वास्थ्य, सुख और शांति का प्रसाद घर-घर पहुंचेगा।
जीवन साधना का सूत्र देते हुए उन्होंने कहा कि दूसरों को सुविधा, सम्मान और स्नेह दो। यही तीन दान जब पुण्य रूप में संचित होते हैं तो जीवन सफलता की ओर अग्रसर हो जाता है।
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गोवर्धन पर्वत धारण की कथा का रहस्य समझाते हुए उन्होंने बताया कि छप्पन भोग केवल श्रीबांके बिहारीजी को ही अर्पित किए जा सकते हैं। सात दिन तक जब प्रभु ने पर्वत धारण किया तब ब्रजवासियों ने प्रतिदिन आठ बार भोग लगाया। सप्ताह भर में यही मिलकर छप्पन बने और आज भी यह परंपरा बिहारी जी के चरणों में जीवित है। आयोजन की सेवा समिति में संजीव वार्ष्णेय बंटी, सजल वार्ष्णेय, सत्यभान यादव, मुन्नालाल गुप्ता, हरपाल सिंह, लक्ष्मीकांत खेड़े, प्रवीन गुप्ता, पंकज गुप्ता, जेपी सिंह, केशवम अवस्थी, संतोष वार्ष्णेय, तारा और मानसी आदि शामिल हैं।
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कथावाचक ने कहा कि आज मनुष्य प्रकृति से जितना छेड़छाड़ कर रहा है, उतने ही भयानक परिणाम सामने आ रहे हैं। रोग और अशांति का सरल उपाय केवल गो सेवा है। उन्होंने आग्रह किया कि प्रत्येक परिवार एक देसी गाय का पालन करे तभी स्वास्थ्य, सुख और शांति का प्रसाद घर-घर पहुंचेगा।
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जीवन साधना का सूत्र देते हुए उन्होंने कहा कि दूसरों को सुविधा, सम्मान और स्नेह दो। यही तीन दान जब पुण्य रूप में संचित होते हैं तो जीवन सफलता की ओर अग्रसर हो जाता है।
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गोवर्धन पर्वत धारण की कथा का रहस्य समझाते हुए उन्होंने बताया कि छप्पन भोग केवल श्रीबांके बिहारीजी को ही अर्पित किए जा सकते हैं। सात दिन तक जब प्रभु ने पर्वत धारण किया तब ब्रजवासियों ने प्रतिदिन आठ बार भोग लगाया। सप्ताह भर में यही मिलकर छप्पन बने और आज भी यह परंपरा बिहारी जी के चरणों में जीवित है। आयोजन की सेवा समिति में संजीव वार्ष्णेय बंटी, सजल वार्ष्णेय, सत्यभान यादव, मुन्नालाल गुप्ता, हरपाल सिंह, लक्ष्मीकांत खेड़े, प्रवीन गुप्ता, पंकज गुप्ता, जेपी सिंह, केशवम अवस्थी, संतोष वार्ष्णेय, तारा और मानसी आदि शामिल हैं।