{"_id":"61730546b11714631c2f71f2","slug":"councilors-clashed-in-the-working-committee-itself-fiercely-abusing-mathura-news-mtr5074316196","type":"story","status":"publish","title_hn":"कार्यसमिति में ही भिड़े पार्षद, जमकर गाली-गलौच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कार्यसमिति में ही भिड़े पार्षद, जमकर गाली-गलौच
विज्ञापन
मथुरा। नगर निगम की बोर्ड कार्यसमिति में शुक्रवार को दो पार्षद आपस में भिड़ गए। दोनों में जमकर गाली-गलौच हुई और कुर्सियां तक फेंककर मारी र्गइं। हालांकि बाद में नगर आयुक्त अनुनय झा और महापौर डॉ.मुकेश आर्य बंधु ने मामले को शांत कराया। इस दौरान महिला पार्षद मीरा मित्तल फफक-फफक कर रोने लगीं।
बैठक में पार्षद तिलकवीर सिंह, महापौर डॉ. मुकेश आर्य बंधु से समितियों के बारे में बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान पार्षद कुलदीप बीच में बोल पड़े। बस फिर दोनों पार्षदों में जमकर बहस होने लगी। शोर शराबा, गाली गलौच के साथ ही एक दूसरे को मारने के लिए कुर्सियां फेंकी गई। वहां मौजूद अधिकारियों व अन्य पार्षदों ने किसी तरह से स्थिति को संभाला और मामले को शांत कराया। कार्यसमिति में दो पार्षदों के मध्य झगड़ा, अपशब्दों का प्रयोग, एक दूसरे को धमकी देने से क्षुब्ध होकर वहां मौजूद पार्षद मीरा मित्तल फफक-फफकर रोने लगीं।
उनका कहना था कि कार्यसमिति में पार्षद ऐसे लड़ रहे हैं, यह गलत है और मैं भी इस सदन की सदस्य हूं। इससे ज्यादा शर्म की क्या बात हो सकती है। हालांकि नगर आयुक्त और महापौर ने मामले को शांत कराते हुए दोनों पक्षों में समझौता करा दिया और झगड़ रहे दोनों पार्षदों ने कहा कि भविष्य में सदन में इस तरह की हरकत नहीं करेंगे। उधर, महापौर और नगर आयुक्त ने बताया कि सदन में बहस जरूर हुई थी, कोई कुर्सी नहीं फेंकी गई। दोनों पक्षों को शांत कराकर गले मिलवा दिया गया।
विज्ञापन
20 लाख रुपये लेने का है विवाद
दरअसल, पिछले सदन की बैठक में पार्षदों ने हंगामा करते हुए आरोप लगाया था कि एक जमीन के मामले में महापौर ने २० लाख रुपये लिए हैं। उस वक्त जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी जांच कर रही थी कि इसी बीच महापौर ने कमेटी भंग कर दी। इस बात पर शुक्रवार को दोनों पार्षदों में बहस हुई, एक पार्षद ने कहा कि क्या कमेटी भंग करने के लिए ही बनाई गई थी। तय हुआ था कि कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट सदन में रखेगी। लेकिन इससे पहले ही भंग कर दी गई। कहीं न कहीं आरोप में सच्चाई थी, इसीलिए महापौर ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर कमेटी भंग की। दूसरे पार्षद महापौर के निर्णय का पक्ष लेने लगे, तभी विवाद हो गया। मालूम कि इससे पहले पार्षदों में चप्पलें भी चल चुकी हैं।
विज्ञापन
बैठक में पार्षद तिलकवीर सिंह, महापौर डॉ. मुकेश आर्य बंधु से समितियों के बारे में बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान पार्षद कुलदीप बीच में बोल पड़े। बस फिर दोनों पार्षदों में जमकर बहस होने लगी। शोर शराबा, गाली गलौच के साथ ही एक दूसरे को मारने के लिए कुर्सियां फेंकी गई। वहां मौजूद अधिकारियों व अन्य पार्षदों ने किसी तरह से स्थिति को संभाला और मामले को शांत कराया। कार्यसमिति में दो पार्षदों के मध्य झगड़ा, अपशब्दों का प्रयोग, एक दूसरे को धमकी देने से क्षुब्ध होकर वहां मौजूद पार्षद मीरा मित्तल फफक-फफकर रोने लगीं।
विज्ञापन
उनका कहना था कि कार्यसमिति में पार्षद ऐसे लड़ रहे हैं, यह गलत है और मैं भी इस सदन की सदस्य हूं। इससे ज्यादा शर्म की क्या बात हो सकती है। हालांकि नगर आयुक्त और महापौर ने मामले को शांत कराते हुए दोनों पक्षों में समझौता करा दिया और झगड़ रहे दोनों पार्षदों ने कहा कि भविष्य में सदन में इस तरह की हरकत नहीं करेंगे। उधर, महापौर और नगर आयुक्त ने बताया कि सदन में बहस जरूर हुई थी, कोई कुर्सी नहीं फेंकी गई। दोनों पक्षों को शांत कराकर गले मिलवा दिया गया।
विज्ञापन
20 लाख रुपये लेने का है विवाद
दरअसल, पिछले सदन की बैठक में पार्षदों ने हंगामा करते हुए आरोप लगाया था कि एक जमीन के मामले में महापौर ने २० लाख रुपये लिए हैं। उस वक्त जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी जांच कर रही थी कि इसी बीच महापौर ने कमेटी भंग कर दी। इस बात पर शुक्रवार को दोनों पार्षदों में बहस हुई, एक पार्षद ने कहा कि क्या कमेटी भंग करने के लिए ही बनाई गई थी। तय हुआ था कि कमेटी अपनी जांच रिपोर्ट सदन में रखेगी। लेकिन इससे पहले ही भंग कर दी गई। कहीं न कहीं आरोप में सच्चाई थी, इसीलिए महापौर ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर कमेटी भंग की। दूसरे पार्षद महापौर के निर्णय का पक्ष लेने लगे, तभी विवाद हो गया। मालूम कि इससे पहले पार्षदों में चप्पलें भी चल चुकी हैं।