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Mathura News: पिंक टॉयलेट के बाहर बिछा दीं चारपाई
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पिंक टॉयलेट की जानकारी देती वहां रहने वाली पूनम।
वृंदावन। महिलाओं के लिए टाॅयलेट तो बनाए, लेकिन सफाईकर्मियों के परिवार को भी यहां रहने की इजाजत दे दी गई। अब आलम यह है कि कई बार शौचालय के बाहर ही पुरुष चारपाई पर बैठे हुए नजर आ जाते हैं। ऐसे में चाहकर भी महिलाएं शौचालय का प्रयोग नहीं कर पातीं। वहीं कई जगहों पर बने टाॅयलेट में पानी की मोटर खराब होने से यहां कोई नहीं जा रहा है। कई बार जिम्मेदारों को इससे अवगत भी कराया गया, लेकिन समस्या का निराकरण नहीं हो पाया।
स्वच्छता अभियान के तहत महिलाओं की सुविधा के लिए सार्वजनिक शौचालय का निर्माण किया गया है। जिन्हें पिंक टाॅयलेट नाम दिया गया है। परिक्रमा मार्ग में कई जगहों पर पिंक टाॅयलेट बनाए गए, लेकिन उनमें जाने से पहले महिलाएं कई बार सोचती हैं। दरअसल, छत्तीसगढ़ भवन के सामने बने पिंक टाॅयलेट के बाहर अक्सर एक चारपाई पड़ी रहती है। यहां मौजूद महिला ने बताया कि वह राया की रहने वाली है। यहां एक कमरा भी है, जहां वह अपने पति और बच्चे के साथ रहती है। उनके पति राकेश बाहर चारपाई पर बैठे रहते हैं तो ऐसे में महिलाएं यहां कम आती हैं।
इसी प्रकार देवरहा बाबा घाट के पास सार्वजनिक शौचालय की बात की जाए तो यहां भी सफाईकर्मियों का पांच लोगों का परिवार रहता है। परिवार के पुरुष बाहर बैठे रहते हैं तो यहां भी महिलाएं कम ही आती हैं। इसके अलावा यहां रहने वाले सफाईकर्मियों ने बताया कि करीब तीन माह से पानी की मोटर खराब पड़ी है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
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क्या कहती हैं महिलाएं
हर माह परिक्रमा के लिए आने वालीं मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ की सुलेखारानी ने कहा कि महिला टॉयलेट के बाहर तो क्या आसपास भी पुरुषों को नहीं बैठना चाहिए। लेकिन यहां कोई देखने वाला नहीं है। यहां तो निगरानी में भी पुरुष कर्मचारी ही रहते हैं। इसी प्रकार गौरा नगर की रहने वालीं सुनीता ने बताया कि कई बार टाॅयलेट में पानी नहीं आता। शिकायत करने पर भी निराकरण नहीं हुआ।
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स्वच्छता अभियान के तहत महिलाओं की सुविधा के लिए सार्वजनिक शौचालय का निर्माण किया गया है। जिन्हें पिंक टाॅयलेट नाम दिया गया है। परिक्रमा मार्ग में कई जगहों पर पिंक टाॅयलेट बनाए गए, लेकिन उनमें जाने से पहले महिलाएं कई बार सोचती हैं। दरअसल, छत्तीसगढ़ भवन के सामने बने पिंक टाॅयलेट के बाहर अक्सर एक चारपाई पड़ी रहती है। यहां मौजूद महिला ने बताया कि वह राया की रहने वाली है। यहां एक कमरा भी है, जहां वह अपने पति और बच्चे के साथ रहती है। उनके पति राकेश बाहर चारपाई पर बैठे रहते हैं तो ऐसे में महिलाएं यहां कम आती हैं।
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इसी प्रकार देवरहा बाबा घाट के पास सार्वजनिक शौचालय की बात की जाए तो यहां भी सफाईकर्मियों का पांच लोगों का परिवार रहता है। परिवार के पुरुष बाहर बैठे रहते हैं तो यहां भी महिलाएं कम ही आती हैं। इसके अलावा यहां रहने वाले सफाईकर्मियों ने बताया कि करीब तीन माह से पानी की मोटर खराब पड़ी है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
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क्या कहती हैं महिलाएं
हर माह परिक्रमा के लिए आने वालीं मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ की सुलेखारानी ने कहा कि महिला टॉयलेट के बाहर तो क्या आसपास भी पुरुषों को नहीं बैठना चाहिए। लेकिन यहां कोई देखने वाला नहीं है। यहां तो निगरानी में भी पुरुष कर्मचारी ही रहते हैं। इसी प्रकार गौरा नगर की रहने वालीं सुनीता ने बताया कि कई बार टाॅयलेट में पानी नहीं आता। शिकायत करने पर भी निराकरण नहीं हुआ।