महावन। राधारानी की प्राकट्य स्थली रावल स्थित राधारानी मंदिर में मंगलवार शाम राधाष्टमी की पूर्व संध्या पर छठ मैया पूजन का आयोजन किया गया। सेवायत पुजारिन रमा कल्ला और शालिनी कल्ला ने हलुआ, पूड़ी, कोमरी, नारियल, धूप-दीप से विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना की। इस दौरान गांव की महिलाएं भजन गाते हुए मंदिर पहुंचीं और छठ पूजन में शामिल हुईं।
पूजन में ममता सारस्वत, रानी, प्रीती सारस्वत, सीमा, प्रिया कल्ला, गोमती देवी, कल्लो देवी, गंगा देवी, गुड़िया, मीनू, सावित्री, लक्ष्मी देवी, सुनीता, सर्वेश, रामवती और उमा सहित अन्य महिलाओं ने भाग लिया। मंदिर सेवायत पुजारी राहुल कल्ला ने बताया कि मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के छठ पूजन के समय कंस ने पूतना को उनका वध करने के लिए भेजा था। पूतना ने विष लगा दूध पिलाने का प्रयास किया, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया। इसके बाद यशोदा मैया से छठ पूजन नहीं हो सका। गुरु गर्गाचार्य के निर्देश पर अगले वर्ष जन्मोत्सव से एक दिन पूर्व छठ पूजन करने की परंपरा शुरू हुई। इसी मान्यता के अनुसार राधारानी का छठ पूजन भी राधाष्टमी से एक दिन पहले किया जाता है। पूजन के बाद 101 किलो कोमरी का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। संवाद