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Mathura News: ट्रस्ट में जल्द नियुक्त होंगे सीईओ, शुरू होगा सर्वे
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मथुरा। विश्व प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर परियोजना को धरातल उतारने के लिए राज्य सरकार सेवायतों का विश्वास स्थापित करने में जुट गई है। सरकार का दावा है कि श्रीबांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट का गठन करके एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। यह ट्रस्ट स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर काम करेगा और आपसी समन्वय से मंदिर की सुरक्षा, पूजा व्यवस्था और कॉरिडोर विकास से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेगा। हालांकि मंदिर के सेवायत सरकार की इस मंशा के खिलाफ है।
बुधवार को राज्य सरकार द्वारा जारी सूचना में बताया गया है कि ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों के साथ समन्वय और संवाद स्थापित कर उनके हितों की रक्षा करना भी है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा तैयार ब्लूप्रिंट के आधार पर 600 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस कॉरिडोर के लिए जल्द ही मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति होगी। साथ ही स्थानीय सहयोग के साथ परियोजना को मजबूती से धरातल पर उतारा जाएगा। इस ट्रस्ट में 18 सदस्यों को शामिल किया जाएगा। इसमें 7 पदेन और दो सेवायतों समेत 11 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा। हालांकि सरकार की मंशा पर असहमति जताते हुए मंदिर के सेवायत ने सुप्रीम की शरण ली है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से ट्रस्ट की अधिसूचना समेत मामले में 29 जुलाई को हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
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आपसी समन्वय से कार्य करेंगे ट्रस्ट के पदाधिकारी
इसके अलावा सरकार ने ट्रस्ट के माध्यम से मंदिर प्रबंधन को व्यवस्थित करने का भी दावा किया है। कहा है कि ट्रस्ट के पदाधिकारी मंदिर की सुरक्षा और पूजा व्यवस्था से जुड़े निर्णय लेते समय स्थानीय समुदाय की राय और आपसी समन्वय को प्राथमिकता देंगे। साथ ही नियमित संवाद के माध्यम से उनकी चिंताओं को समझेंगी। ट्रस्ट यह सुनिश्चित करेगा कि परियोजना के हर चरण में स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और मंदिर से जुड़े अन्य लोगों का सहयोग लिया जाए। इस सहभागिता से परियोजना को न केवल सामुदायिक समर्थन मिलेगा, बल्कि यह वृंदावन की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना को भी मजबूत करेगा।
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300 मकानों और दुकानों का जल्द शुरू होगा सर्वे
कॉरिडोर निर्माण के लिए मंदिर के आसपास 5 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए करीब 300 मकानों और दुकानों का सर्वे जल्द शुरू होगा। ट्रस्ट स्थानीय लोगों की संपत्ति स्वामित्व से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखेगा और उनके साथ संवाद के जरिए उचित मुआवजे और पुनर्वास के विकल्पों पर विचार करेगा। साथ ही यह भी ध्यान रखा जाएगा कि कोई स्थानीय दुकानदार और निवासी की आजीविका प्रभावित न हो।
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कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
कॉरिडोर परियोजना से मथुरा-वृंदावन को धार्मिक पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। साथ ही कॉरिडोर से भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधा में सुधार होगा और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।
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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर बनेगा वृंदावन का कॉरिडोर
ट्रस्ट यह भी सुनिश्चित करेगा कि कॉरिडोर का डिजाइन वृंदावन की पारंपरिक कुंज गलियां और स्थानीय संस्कृति को संरक्षित रखे। इसके लिए द्वापरकालीन प्रजातियों के पेड़-पौधे जैसे पारिजात, कदंब, बरगद और पीपल लगाए जाएंगे। ये पर्यावरण संरक्षण के साथ वृंदावन की प्राचीन छवि को बनाए रखेंगे। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर यह कॉरिडोर बनाया जाएगा। कॉरिडोर से मंदिर और यमुना नदी को जोड़ा जाएगा।
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बुधवार को राज्य सरकार द्वारा जारी सूचना में बताया गया है कि ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों के साथ समन्वय और संवाद स्थापित कर उनके हितों की रक्षा करना भी है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा तैयार ब्लूप्रिंट के आधार पर 600 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस कॉरिडोर के लिए जल्द ही मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति होगी। साथ ही स्थानीय सहयोग के साथ परियोजना को मजबूती से धरातल पर उतारा जाएगा। इस ट्रस्ट में 18 सदस्यों को शामिल किया जाएगा। इसमें 7 पदेन और दो सेवायतों समेत 11 प्रतिष्ठित व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा। हालांकि सरकार की मंशा पर असहमति जताते हुए मंदिर के सेवायत ने सुप्रीम की शरण ली है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से ट्रस्ट की अधिसूचना समेत मामले में 29 जुलाई को हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
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आपसी समन्वय से कार्य करेंगे ट्रस्ट के पदाधिकारी
इसके अलावा सरकार ने ट्रस्ट के माध्यम से मंदिर प्रबंधन को व्यवस्थित करने का भी दावा किया है। कहा है कि ट्रस्ट के पदाधिकारी मंदिर की सुरक्षा और पूजा व्यवस्था से जुड़े निर्णय लेते समय स्थानीय समुदाय की राय और आपसी समन्वय को प्राथमिकता देंगे। साथ ही नियमित संवाद के माध्यम से उनकी चिंताओं को समझेंगी। ट्रस्ट यह सुनिश्चित करेगा कि परियोजना के हर चरण में स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और मंदिर से जुड़े अन्य लोगों का सहयोग लिया जाए। इस सहभागिता से परियोजना को न केवल सामुदायिक समर्थन मिलेगा, बल्कि यह वृंदावन की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना को भी मजबूत करेगा।
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300 मकानों और दुकानों का जल्द शुरू होगा सर्वे
कॉरिडोर निर्माण के लिए मंदिर के आसपास 5 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए करीब 300 मकानों और दुकानों का सर्वे जल्द शुरू होगा। ट्रस्ट स्थानीय लोगों की संपत्ति स्वामित्व से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखेगा और उनके साथ संवाद के जरिए उचित मुआवजे और पुनर्वास के विकल्पों पर विचार करेगा। साथ ही यह भी ध्यान रखा जाएगा कि कोई स्थानीय दुकानदार और निवासी की आजीविका प्रभावित न हो।
कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
कॉरिडोर परियोजना से मथुरा-वृंदावन को धार्मिक पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। साथ ही कॉरिडोर से भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधा में सुधार होगा और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर बनेगा वृंदावन का कॉरिडोर
ट्रस्ट यह भी सुनिश्चित करेगा कि कॉरिडोर का डिजाइन वृंदावन की पारंपरिक कुंज गलियां और स्थानीय संस्कृति को संरक्षित रखे। इसके लिए द्वापरकालीन प्रजातियों के पेड़-पौधे जैसे पारिजात, कदंब, बरगद और पीपल लगाए जाएंगे। ये पर्यावरण संरक्षण के साथ वृंदावन की प्राचीन छवि को बनाए रखेंगे। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर यह कॉरिडोर बनाया जाएगा। कॉरिडोर से मंदिर और यमुना नदी को जोड़ा जाएगा।