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अधिकारियों की लापरवाही से फ्रंट विकास योजना पर संकट

Sun, 23 Oct 2016 11:56 PM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Sun, 23 Oct 2016 11:56 PM IST
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By the negligence of the authorities front development plan in crisis
अधिकारियों की लापरवाही से फ्रंट विकास योजना पर संकट - फोटो : Amar Ujala
अधिकारियों की लापरवाही से फ्रंट विकास योजना पर संकट
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- अब तक 35 प्रतिशत कार्य में 42 करोड़ से अधिक हो चुका है खर्च

मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना पर अधिकारियों की लापरवाही से संकट के बादल छाने लगे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी और एएसआई से एनओसी लिए बिना यमुना किनारे निर्माण शुुरू करना योजना पर भारी पड़ सकता है। ऐसे में अब तक इस योजना पर खर्च हो चुके 42 करोड़ पानी में बह सकते हैं। कार्य हाईकोर्ट के आदेश के बाद से रुका है और मशीनें बंद खड़ी हैं।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ के गोमती नदी पर बनाए गए रिवर फ्रंट विकास योजना के बाद 2015 में वृंदावन में यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना की घोषणा की। इसके बाद विभागों ने डीपीआर तैयार की और कार्य करने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंपी गई। मई माह में शुरू हुई लगभग 178 करोड़ की योजना दिसंबर तक पूरी होनी थी।
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यूपीपीसीएल के असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर एनपी शर्मा ने बताया कि अब तक लगभग 35 प्रतिशत कार्य हो चुका है, इस पर लगभग 45 करोड़ रुपया खर्च हो चुका है। यदि कार्य रुकता है तो सरकार के साथ स्थानीय लोगों को यमुना की वर्तमान स्थिति से भारी नुकसान होने की संभावना है। पुरातत्व विभाग से एनओसी लेने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह कार्य हमारा नहीं, सिंचाई विभाग का है। हमें कार्य करने का अनुबंध मिला है। इधर, यमुना रिवर फ्रंट का कार्य रुकने के बाद नालों के पानी की निकासी न होने से गंदगी फैल रही है, नाले भी यमुना में गिर रहे हैं।
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एएसआई से नहीं ली एनओसी
उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से यमुना के घाटों पर कराए जा रहे नवीन घाटों का निर्माण पुरातात्विक महत्व के जुगल किशोर मंदिर के 300 मीटर की संरक्षित परिधि में आता है। महंत मधुमंगल शरणदास शुक्ल द्वारा मांगी गई आरटीआई के जवाब में स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्माण से पूर्व कोई अनापत्ति नहीं ली गई। एएसआई का नोटिस मिलने के बाद कार्य रोक दिया गया।


घाटों और यमुना बेड में बिछाई जा रही सीवर लाइन
सामाजिक कार्यकर्ता महंत मधुमंगल शरणदास शुक्ल की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण, नगर पालिका वृंदावन और प्रदेश सरकार को दिए नोटिस में यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना में मानकों की अनदेखी कर कार्य करने पर जवाब मांगा है। खंडपीठ ने आश्चर्य जताया कि यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने की बजाए उल्टा यमुना की धारा में खाटों को खोदकर सीवर लाइन बिछाई जा रही है। महंत मधुमंगल शरणदास शुक्ल ने कहा कि यहां तो घाटों के साथ यमुना बेड में ही सीवर की इंटरसैप्टर लाइन बिछाने का कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि विश्व में किसी भी नदी के बाढ़ क्षेत्र में सीवर लाइन नहीं डाली गई है।
 
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