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एक लोटा जल चढ़ाने से मिल जाती है सभी चिंताओं से मुक्ति
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मथुरा(महावन)। महावन स्थित चिंताहरण मंदिर में भगवान भोलेनाथ पर एक लोटा जल चढ़ाने भर से भक्तों को सभी चिंताओं से मुक्ति मिल जाती है। चिंताहरण महादेव मंदिर पर एक लोटा जल चढ़ाने से 1108 शिवलिंगों पर जल चढ़ाने का फल भी प्राप्त होता है। मान्यता है कि एक बार जो भी व्यक्ति श्रद्धा के साथ चिंताहरण महादेव जी के दर्शन कर लेता, उसकी सभी चिंताए दूर हो जाती हैं।
महंत केशवदास ने बताया कि मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने 7 वर्ष की आयु में मिट्टी खाई थी तो मां यशोदा घबरा गईं और कृष्ण से मिट्टी को मुंह से निकालने को कहा। जब भगवान कृष्ण ने अपना मुंह खोला तो पूरे ब्रह्मांड के दर्शन मां यशोदा को हो गए थे। इसके बाद मां यशोदा घबरा गईं और भगवान शिव को पुकारने लगीं। तभी उनकी पुकार सुन भगवान शिव यहां प्रकट हो गए।
इसके बाद यशोदा ने यमुना से एक लोटा जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया। उसके बाद मां यशोदा ने भगवान शिव से यहां विराजमान हो सभी भक्तों की चिंताएं हरने का वचन मांगा। तब भोले नाथ ने मां यशोदा को वचन दिया। भगवान शिव ने मां यशोदा से कहा कि यहां आकर जो भी भक्त एक लोटा यमुना का जल चढ़ाएगा, उसकी सभी चिंताएं दूर हो जाएंगी और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
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पुजारी पंडित अनिल शर्मा ने बताया कि यह भी मान्यता है कि जब कृष्ण बाल रूप में थे, तब सभी देवता उनके बाल स्वरूप के दर्शन करने ब्रज में आए। भगवान शिव भी दर्शन करने आए, लेकिन मां यशोदा ने भगवान शिव के गले में सांप को देखकर उन्हें कृष्ण के दर्शन नहीं करने दिए। शिव जी को चिंता हुई, उन्होंने भगवान का ध्यान किया तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें इसी स्थान पर दर्शन देकर उनकी चिंता हर लीं। बस तभी से भगवान भोलेनाथ यहीं विराजमान हो गए।
ये शिवलिंग अद्भुत है
पाषाण के इस शिवलिंग पर 1108 शिवलिंग उभरे हुए हैं। पूरी दुनिया में और कोई ऐसा मंदिर नहीं है। इसकी चमत्कारिक मान्यता के चलते भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं।
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महंत केशवदास ने बताया कि मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने 7 वर्ष की आयु में मिट्टी खाई थी तो मां यशोदा घबरा गईं और कृष्ण से मिट्टी को मुंह से निकालने को कहा। जब भगवान कृष्ण ने अपना मुंह खोला तो पूरे ब्रह्मांड के दर्शन मां यशोदा को हो गए थे। इसके बाद मां यशोदा घबरा गईं और भगवान शिव को पुकारने लगीं। तभी उनकी पुकार सुन भगवान शिव यहां प्रकट हो गए।
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इसके बाद यशोदा ने यमुना से एक लोटा जल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया। उसके बाद मां यशोदा ने भगवान शिव से यहां विराजमान हो सभी भक्तों की चिंताएं हरने का वचन मांगा। तब भोले नाथ ने मां यशोदा को वचन दिया। भगवान शिव ने मां यशोदा से कहा कि यहां आकर जो भी भक्त एक लोटा यमुना का जल चढ़ाएगा, उसकी सभी चिंताएं दूर हो जाएंगी और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
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पुजारी पंडित अनिल शर्मा ने बताया कि यह भी मान्यता है कि जब कृष्ण बाल रूप में थे, तब सभी देवता उनके बाल स्वरूप के दर्शन करने ब्रज में आए। भगवान शिव भी दर्शन करने आए, लेकिन मां यशोदा ने भगवान शिव के गले में सांप को देखकर उन्हें कृष्ण के दर्शन नहीं करने दिए। शिव जी को चिंता हुई, उन्होंने भगवान का ध्यान किया तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें इसी स्थान पर दर्शन देकर उनकी चिंता हर लीं। बस तभी से भगवान भोलेनाथ यहीं विराजमान हो गए।
ये शिवलिंग अद्भुत है
पाषाण के इस शिवलिंग पर 1108 शिवलिंग उभरे हुए हैं। पूरी दुनिया में और कोई ऐसा मंदिर नहीं है। इसकी चमत्कारिक मान्यता के चलते भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं।