{"_id":"5724fa084f1c1b6536a91565","slug":"bullock-cart-for-school-bus","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्यावरण बचाने के लिए ‘बुल पावर’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्यावरण बचाने के लिए ‘बुल पावर’
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Sun, 01 May 2016 12:01 AM IST
विज्ञापन
बैलगाड़ी में पहुंचें स्कूल
तेज रफ्तार जिंदगी में नगर की एक समाजसेवी संस्था का बच्चों को स्कूल लाने ले जाने के लिए बैलगाड़ी का प्रयोग लोगों को अचंभित तो करता है, लेकिन उद्देश्य जानने के बाद सभी इसकी सराहना भी करते हैं। पर्यावरण बचाने, बैलों का संरक्षण, महंगे होते तेल की बचत के साथ ही समाज में पर्यावरण को सुरक्षित रखने के प्रति जागृति पैदा करना इनका प्रमुख उद्देश्य है।
चैतन्य बिहार कालोनी स्थित शिक्षण संस्था संदीपनि मुनि वृंदावन के ग्रामीण और शहरी पिछडे़ क्षेत्रों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करती है। संस्था में कक्षा एक से 12वीं तक लगभग 1400 ऐसे छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं जिन्हें गरीबी और दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने के चलते शिक्षा की बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं। शिक्षा पाने वालों में सुनरख, कीकी का नगला, देवी आटस के साथ वृंदावन के भी बच्चे हैं। संस्था ने बच्चों को लाने और ले जाने के लिए बुल पावर योजना के तहत दो बैलों से चलने वाली आकर्षक झोपड़ीनुमा बैलगाड़ी बनवाई हैं।
संस्था के पीआरओ पार्थ सारथी ने बताया कि संस्था की ओर से 11 बैलगाड़ी में एक से 12 तक के बच्चाें को लाने ले जाने का कार्य किया जाता है। इससे वायु और ध्वनि प्रदूषण के अलावा तेल की बचत और दुर्घटना की संभावना भी न के बराबर होती है। पारंपरिक वाहनों में बुल पावर को बचाना भी एक ध्येय रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
चैतन्य बिहार कालोनी स्थित शिक्षण संस्था संदीपनि मुनि वृंदावन के ग्रामीण और शहरी पिछडे़ क्षेत्रों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करती है। संस्था में कक्षा एक से 12वीं तक लगभग 1400 ऐसे छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं जिन्हें गरीबी और दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने के चलते शिक्षा की बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही थीं। शिक्षा पाने वालों में सुनरख, कीकी का नगला, देवी आटस के साथ वृंदावन के भी बच्चे हैं। संस्था ने बच्चों को लाने और ले जाने के लिए बुल पावर योजना के तहत दो बैलों से चलने वाली आकर्षक झोपड़ीनुमा बैलगाड़ी बनवाई हैं।
विज्ञापन
संस्था के पीआरओ पार्थ सारथी ने बताया कि संस्था की ओर से 11 बैलगाड़ी में एक से 12 तक के बच्चाें को लाने ले जाने का कार्य किया जाता है। इससे वायु और ध्वनि प्रदूषण के अलावा तेल की बचत और दुर्घटना की संभावना भी न के बराबर होती है। पारंपरिक वाहनों में बुल पावर को बचाना भी एक ध्येय रहता है।
विज्ञापन