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Mathura News: हाथी टीला पर पहुंचे बुलडोजर
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हाथी टीला पर अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम।
मथुरा। पौराणिक मान्यताओं में कंस का हाथी अस्तबल कहे जाने वाले हाथी टीला से नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कब्जा हटाया गया। बुधवार को भारी पुलिस बल और बुलडोजरों के पहुंचने पर पहले तो मुस्लिम पक्ष ने विरोध किया। बाद में अधिकारियों का रुख देखकर खुद ही चाहरदीवारी को हटा दिया।
पुरातत्व विभाग हाथी टीला के नाम से करीब पांच एकड़ भूमि का संरक्षित संपत्ति बताकर अपना दावा करता है। वहीं, मुस्लिम पक्ष उस जमीन को वक्फ बोर्ड बताकर खसरा संख्या 628 और 629 में कब्रिस्तान में दर्ज होने का दावा करता है। दोनों पक्षों में मालिकाना हक का विवाद न्यायालय में चल रहा है। इसी बीच 12 सितंबर को पुरातत्व विभाग को हाथी टीला पर मुस्लिम पक्ष के चाहरदीवारी लगाकर कब्जा करने की जानकारी मिली थी। जानकारी मिलते ही एएसआई के अधिकारी और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन कोई कार्रवाई किए बिना ही बैरंग लौट गई थी। बुधवार को अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्रा के साथ भारी पुलिस बल और बुलडोजर मौके पर पहुंच गए।
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मुस्लिम पक्ष बोला- नगर निगम के आदेश पर हो रहा था कार्य
शाकिर हुसैन का आरोप है कि करीब तीन महीने पहले रात में नगर निगम के बुलडोजर ने कब्रों को नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद खुद निगम के अधिकारियों ने उसे सही करने के लिए कहा था। इसके लिए 12 सितंबर को निगम ने पानी का टैंकर भी भेजा था।
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नहीं होने दिया जाएगा कब्जा
अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह का कहना है कि कब्रों को सही करने के लिए कहा गया था। इसकी आड़ में कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। इस मामले का वाद न्यायालय में भी विचाराधीन है। ऐसी स्थिति में वहां किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा।
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पहले भी सुर्खियों में आया था हाथी टीला
हाथी टीला की भूमि को लेकर इससे पहले भी विवाद सामने आ चुका है। वर्ष 2021 और 2023 में भी भूमि के स्वामित्व और कब्जे को लेकर विवाद हुआ था। शनिवार को दोबारा चारदीवारी का निर्माण शुरू होने के बाद पुराना विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है। इसी कब्रिस्तान में बीती जून को सफाई के लिए पहुंचे नगर निगम के लिए काम करने वाली कंपनी के बुलडोजर (बैकहो-लोडर) से नौ कब्रें खोद डाली थीं। छह पेड़ गिरा दिए और सीमेंट के कई खंभे भी तोड़ दिए थे। कब्रिस्तान कमेटी ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की तो कंपनी ने एक कब्र की मरम्मत के लिए सौ रुपये का मुआवजा दिया था। पेड़ और खंभे के लिए भी मुआवजा सौ रुपये के हिसाब तय करते हुए 3300 रुपये का चेक देते हुए निस्तारण कर दिया।
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विश्व हिंदू परिषद ने भी की थी कब्जा मुक्त करने की मांग
विश्व हिंदू परिषद मथुरा महानगर के अध्यक्ष गोकुलेश गौतम एडवोकेट ने अपर नगर आयुक्त से अवैध हटाने और पुरातन महत्व की धरोहर को सुरक्षित करने की मांग की गई। इस दौरान महानगर मंत्री नितिन चौधरी, वत्सल भाटिया, आशीष शर्मा, मनोज सिसोदिया, शशांक शर्मा, दीपक चौधरी, जय चौधरी, नीरज शर्मा, विष्णु चौहान, विजय चौहान, नानक चंद आदि उपस्थित रहे।
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पुरातत्व विभाग हाथी टीला के नाम से करीब पांच एकड़ भूमि का संरक्षित संपत्ति बताकर अपना दावा करता है। वहीं, मुस्लिम पक्ष उस जमीन को वक्फ बोर्ड बताकर खसरा संख्या 628 और 629 में कब्रिस्तान में दर्ज होने का दावा करता है। दोनों पक्षों में मालिकाना हक का विवाद न्यायालय में चल रहा है। इसी बीच 12 सितंबर को पुरातत्व विभाग को हाथी टीला पर मुस्लिम पक्ष के चाहरदीवारी लगाकर कब्जा करने की जानकारी मिली थी। जानकारी मिलते ही एएसआई के अधिकारी और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन कोई कार्रवाई किए बिना ही बैरंग लौट गई थी। बुधवार को अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्रा के साथ भारी पुलिस बल और बुलडोजर मौके पर पहुंच गए।
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मुस्लिम पक्ष बोला- नगर निगम के आदेश पर हो रहा था कार्य
शाकिर हुसैन का आरोप है कि करीब तीन महीने पहले रात में नगर निगम के बुलडोजर ने कब्रों को नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद खुद निगम के अधिकारियों ने उसे सही करने के लिए कहा था। इसके लिए 12 सितंबर को निगम ने पानी का टैंकर भी भेजा था।
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नहीं होने दिया जाएगा कब्जा
अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह का कहना है कि कब्रों को सही करने के लिए कहा गया था। इसकी आड़ में कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। इस मामले का वाद न्यायालय में भी विचाराधीन है। ऐसी स्थिति में वहां किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा।
पहले भी सुर्खियों में आया था हाथी टीला
हाथी टीला की भूमि को लेकर इससे पहले भी विवाद सामने आ चुका है। वर्ष 2021 और 2023 में भी भूमि के स्वामित्व और कब्जे को लेकर विवाद हुआ था। शनिवार को दोबारा चारदीवारी का निर्माण शुरू होने के बाद पुराना विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है। इसी कब्रिस्तान में बीती जून को सफाई के लिए पहुंचे नगर निगम के लिए काम करने वाली कंपनी के बुलडोजर (बैकहो-लोडर) से नौ कब्रें खोद डाली थीं। छह पेड़ गिरा दिए और सीमेंट के कई खंभे भी तोड़ दिए थे। कब्रिस्तान कमेटी ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की तो कंपनी ने एक कब्र की मरम्मत के लिए सौ रुपये का मुआवजा दिया था। पेड़ और खंभे के लिए भी मुआवजा सौ रुपये के हिसाब तय करते हुए 3300 रुपये का चेक देते हुए निस्तारण कर दिया।
विश्व हिंदू परिषद ने भी की थी कब्जा मुक्त करने की मांग
विश्व हिंदू परिषद मथुरा महानगर के अध्यक्ष गोकुलेश गौतम एडवोकेट ने अपर नगर आयुक्त से अवैध हटाने और पुरातन महत्व की धरोहर को सुरक्षित करने की मांग की गई। इस दौरान महानगर मंत्री नितिन चौधरी, वत्सल भाटिया, आशीष शर्मा, मनोज सिसोदिया, शशांक शर्मा, दीपक चौधरी, जय चौधरी, नीरज शर्मा, विष्णु चौहान, विजय चौहान, नानक चंद आदि उपस्थित रहे।