{"_id":"68fbe6130eda6c4b7a095802","slug":"brajraj-utsav-stalls-of-government-departments-will-be-set-up-a-day-before-mathura-news-c-369-1-mt11009-137812-2025-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्रजरज उत्सव: एक दिन पहले सजेंगी सरकारी विभागों की स्टॉल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्रजरज उत्सव: एक दिन पहले सजेंगी सरकारी विभागों की स्टॉल
विज्ञापन
मथुरा। ब्रजरज उत्सव की तैयारियों जोरों पर चल रही हैं। ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ एसबी सिंह ने रेलवे मैदान में प्रकाश व्यवस्था, मंच सजावट और दर्शकों के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ब्रज की सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान को भव्यता मिल सके। सीईओ ने बताया कि आयोजन से एक दिन पहले सरकारी विभागों की स्टॉल सजाई जाएंगी। मेला क्षेत्र में सुरक्षा, स्वच्छता, पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और सूचना केंद्रों की व्यवस्था भी की जाएगी। यह उत्सव 26 अक्तूबर से पांच नवंबर तक चलेगा। इस उत्सव में देश के सुप्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
उत्सव में न ब्रज की रज, न सावन की मधुर मल्हार
इधर, पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने उत्सव से पहले ब्रज संस्कृति और कलाकारों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि ब्रज रज उत्सव में न ब्रज की रज, न सावन की मधुर मल्हार, न चौबों की सुरीली तान और न चिकाड़े पर ढोला है। उत्सव में ब्रज और ब्रज संस्कृति से अपरिचित बॉलीवुड के कलाकार भाग लेंगे। यह सभी कलाकार ब्रजभूमि के पारंपरिक संगीत, लोक संगीत से अपरिचित हैं। ब्रज आदिकाल से कलाकारों की भूमि रहा है, जिन्होंने न केवल ब्रज में, बल्कि देश-विदेश में भी गायन, चरकुला नृत्य, हल नृत्य आदि के द्वारा ब्रज-रज से सुशोभित किया है। इसके बाद भी ब्रजरज उत्सव में न ब्रज संस्कृति है और न कलाकार।
विज्ञापन
उत्सव में न ब्रज की रज, न सावन की मधुर मल्हार
इधर, पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने उत्सव से पहले ब्रज संस्कृति और कलाकारों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि ब्रज रज उत्सव में न ब्रज की रज, न सावन की मधुर मल्हार, न चौबों की सुरीली तान और न चिकाड़े पर ढोला है। उत्सव में ब्रज और ब्रज संस्कृति से अपरिचित बॉलीवुड के कलाकार भाग लेंगे। यह सभी कलाकार ब्रजभूमि के पारंपरिक संगीत, लोक संगीत से अपरिचित हैं। ब्रज आदिकाल से कलाकारों की भूमि रहा है, जिन्होंने न केवल ब्रज में, बल्कि देश-विदेश में भी गायन, चरकुला नृत्य, हल नृत्य आदि के द्वारा ब्रज-रज से सुशोभित किया है। इसके बाद भी ब्रजरज उत्सव में न ब्रज संस्कृति है और न कलाकार।
विज्ञापन