{"_id":"58f7b9424f1c1b38744735ec","slug":"bail-to-the-son-of-ramvriksh-yadav-in-jawahar-bagh-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"जवाहर बाग हिंसा में रामवृक्ष के बेटे को जमानत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जवाहर बाग हिंसा में रामवृक्ष के बेटे को जमानत
अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 20 Apr 2017 12:53 AM IST
विज्ञापन
रामवृक्ष यादव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जवाहर बाग हिंसा में नामजद रामवृक्ष यादव के बेटे विवेक यादव उर्फ लखू को जमानत मिल गई है। पुलिस 90 दिन बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी थी। इसी को आधार बनाकर बेल मांगी थी। इस पूरे केस में पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।
पुलिस ने रामवृक्ष यादव के बेटे गाजीपुर निवासी विवेक यादव को जनवरी माह में रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दावा किया था 2 जून 2016 को जब जवाहरबाग में हिंसा हुई थी तब विवेक यादव भी अपने पिता रामवृक्ष यादव के साथ था।
विवेक यादव को पुलिस ने एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव की हत्या के मामले में नामजद किया लेकिन 90 दिन बाद भी पुलिस चार्जशीट ही दाखिल नहीं कर सकी, जबकि नब्बे दिन में चार्जशीट हो जानी चाहिए थी।
विज्ञापन
इसी को आधार बनाकर विवेक यादव के अधिवक्ता एलके गौतम ने जमानत के लिए प्रार्थना पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्पना शुक्ला की अदालत में दाखिल किया। न्यायाधीश ने बुधवार को विवेक की पांच लाख के मुचलके पर जमानत मंजूर कर ली है।
पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई
मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। विवेक यादव को गिरफ्तार करके बड़े खुलासे का दावा करने वाले अधिकारी यह भूल गए कि चार्जशीट भी लगाई जानी है। पुलिस ने विवेक यादव को पूछताछ के लिए रिमांड पर भी लिया था। लेकिन पुलिस उससे कोई जानकारी ही हासिल नहीं कर पाई थी। एक ऐसा साक्ष्य नहीं मिला जिससे आधार पर केस को मजबूत किया जा सकता है। जानकारों का कहना है कि जवाहरबाग की जांच में पुलिस ने कदम कदम पर लापरवाही बरती है।
विज्ञापन
पुलिस ने रामवृक्ष यादव के बेटे गाजीपुर निवासी विवेक यादव को जनवरी माह में रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दावा किया था 2 जून 2016 को जब जवाहरबाग में हिंसा हुई थी तब विवेक यादव भी अपने पिता रामवृक्ष यादव के साथ था।
विज्ञापन
विवेक यादव को पुलिस ने एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव की हत्या के मामले में नामजद किया लेकिन 90 दिन बाद भी पुलिस चार्जशीट ही दाखिल नहीं कर सकी, जबकि नब्बे दिन में चार्जशीट हो जानी चाहिए थी।
विज्ञापन
इसी को आधार बनाकर विवेक यादव के अधिवक्ता एलके गौतम ने जमानत के लिए प्रार्थना पत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्पना शुक्ला की अदालत में दाखिल किया। न्यायाधीश ने बुधवार को विवेक की पांच लाख के मुचलके पर जमानत मंजूर कर ली है।
पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई
मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। विवेक यादव को गिरफ्तार करके बड़े खुलासे का दावा करने वाले अधिकारी यह भूल गए कि चार्जशीट भी लगाई जानी है। पुलिस ने विवेक यादव को पूछताछ के लिए रिमांड पर भी लिया था। लेकिन पुलिस उससे कोई जानकारी ही हासिल नहीं कर पाई थी। एक ऐसा साक्ष्य नहीं मिला जिससे आधार पर केस को मजबूत किया जा सकता है। जानकारों का कहना है कि जवाहरबाग की जांच में पुलिस ने कदम कदम पर लापरवाही बरती है।