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वेदों को मिले अंतर्राष्ट्रीय ग्रंथ का गौरव: रामदेव
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 18 Dec 2014 08:40 AM IST
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वेद सृष्टि के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं। योग के बाद अब वेदों को अंतर्राष्ट्रीय ग्रंथ होने का गौरव मिलना चाहिए। योग गुरु बाबा रामदेव ने बुधवार को कान्हानगरी में यह बात कही। वे वेद मंदिर मसानी पर चल रहे चतुर्वेद परायण यज्ञ में भाग लेने आए थे। काला धन वापसी को लेकर कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादों पर पूरा भरोसा है।
मंदिर परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि योग को अंतर्राष्ट्रीय गौरव मिला है। अब वेदों को भी ये गौरव मिलना चाहिए। धर्मांतरण के सवाल पर बोले कि हम सब की एक ही संस्कृति है और वो है वेद संस्कृति।
पाकिस्तान के पेशावर में हुई घटना पर उन्होंने मृतक बच्चों के लिए संवेदना व्यक्त की और कहा कि अब जरूरत है आतंकवाद के खिलाफ सारी दुनिया एकजुट हो जाए। बाबा रामदेव वेद मंदिर पहुंच कर अपने गुरु भाई आचार्य स्वदेश से गले मिले और वेद मंदिर की पुरानी यादें ताजा कीं। मंदिर में नवनिर्मित यज्ञशाला और गौशाला लोकार्पण किया।
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आचार्य स्वदेश द्वारा लिखित पुस्तक ‘महाभारत के प्रेरक प्रसंग’ का विमोचन भी बाबा रामदेव ने किया। आचार्य स्वदेश ने सभी का आभार जताया। इससे पूर्व बाबा ने रिफानरी औद्योगिक क्षेत्र में प्रज्ञा पब्लिकेशन की नई इकाई का शुभारंभ किया। प्रज्ञा पब्लिकेशन के निदेशक राजेश गोयल ने वेद मंदिर के लिए पांच लाख की धनराशि बतौर सहयोग देने की घोषणा की।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अनूप चौधरी, पालिकाध्यक्ष मनीषा गुप्ता, रविकांत गर्ग, राजेश गुप्ता, आचार्य सत्यप्रिय आर्य, कवि मनवीर मधुर, आचार्य हरीप्रकाश, आचार्य शत्रुजीत, कृष्णवीर शर्मा, रविंद्र सिंह लोहिया, अजय मित्तल, प्रफुल्ल गोयल, अर्पित मित्तल आदि उपस्थित थे।
गुरुकुल शिक्षा से ही सर्वांगीण विकास
मथुरा। बाबा रामदेव ने कहा कि गुरुकुल की शिक्षा से ही मनुष्य का सर्वांगीण विकास संभव है। अंग्रेजों के शासनकाल में मैकाले ने हमारी गुरुकुल प्रणाली को खत्म करने के लिए सात लाख गुरुकुलों को तोड़कर उनमें कान्वेट स्कूल बनाए थे। हम सात लाख नए आचार्य कुलम खोलकर और पुराने गुरुकुलों का पुनरुद्धार कर फिर से वैदिक संस्कृति को स्थापित करेंगे।
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मंदिर परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि योग को अंतर्राष्ट्रीय गौरव मिला है। अब वेदों को भी ये गौरव मिलना चाहिए। धर्मांतरण के सवाल पर बोले कि हम सब की एक ही संस्कृति है और वो है वेद संस्कृति।
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पाकिस्तान के पेशावर में हुई घटना पर उन्होंने मृतक बच्चों के लिए संवेदना व्यक्त की और कहा कि अब जरूरत है आतंकवाद के खिलाफ सारी दुनिया एकजुट हो जाए। बाबा रामदेव वेद मंदिर पहुंच कर अपने गुरु भाई आचार्य स्वदेश से गले मिले और वेद मंदिर की पुरानी यादें ताजा कीं। मंदिर में नवनिर्मित यज्ञशाला और गौशाला लोकार्पण किया।
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आचार्य स्वदेश द्वारा लिखित पुस्तक ‘महाभारत के प्रेरक प्रसंग’ का विमोचन भी बाबा रामदेव ने किया। आचार्य स्वदेश ने सभी का आभार जताया। इससे पूर्व बाबा ने रिफानरी औद्योगिक क्षेत्र में प्रज्ञा पब्लिकेशन की नई इकाई का शुभारंभ किया। प्रज्ञा पब्लिकेशन के निदेशक राजेश गोयल ने वेद मंदिर के लिए पांच लाख की धनराशि बतौर सहयोग देने की घोषणा की।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अनूप चौधरी, पालिकाध्यक्ष मनीषा गुप्ता, रविकांत गर्ग, राजेश गुप्ता, आचार्य सत्यप्रिय आर्य, कवि मनवीर मधुर, आचार्य हरीप्रकाश, आचार्य शत्रुजीत, कृष्णवीर शर्मा, रविंद्र सिंह लोहिया, अजय मित्तल, प्रफुल्ल गोयल, अर्पित मित्तल आदि उपस्थित थे।
गुरुकुल शिक्षा से ही सर्वांगीण विकास
मथुरा। बाबा रामदेव ने कहा कि गुरुकुल की शिक्षा से ही मनुष्य का सर्वांगीण विकास संभव है। अंग्रेजों के शासनकाल में मैकाले ने हमारी गुरुकुल प्रणाली को खत्म करने के लिए सात लाख गुरुकुलों को तोड़कर उनमें कान्वेट स्कूल बनाए थे। हम सात लाख नए आचार्य कुलम खोलकर और पुराने गुरुकुलों का पुनरुद्धार कर फिर से वैदिक संस्कृति को स्थापित करेंगे।