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दुश्मनों पर बिजली के समान टूट पड़े जवान
अमर उजाला मथुरा
Updated Fri, 15 Jul 2016 12:03 AM IST
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सेना ने मथुरा में यमुना नदी किनारे किया युद्धाभ्यास
- फोटो : अमर उजाला
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आपरेशन मेघ प्रहार। नदी किनारे बंकर बनाकर छिपे दुश्मन सैनिकों पर जवान बिजली के समान टूट पड़े। उनको घेर लिया, परास्त किया। जो विरोध में उतरे उनको ढेर कर दिया। पहले से ही सेना के दो हेलीकॉप्टर दुश्मनों की निगरानी कर रहे थे।
ऑपरेशन शुरू हुआ और जवानों ने कुछ ही समय में यमुना नदी पर पुल बना दिया। इससे होकर टी-90 टैंक नदी पार पहुंचे। यहां दुश्मन के सैनिक बंकरों में छिपे थे। इसके बाद रूस निर्मित 10 बीएमपी-2 टैंक ने नदी में से ही दुश्मनों पर फायरिंग शुरू कर दी। विवश दुश्मन ने हथियार डाल दिए। एक घंटे तक चले ऑपरेशन मेघ प्रहार में 450 जवानों ने 20 टोलियां बनाकर काम किया।
स्ट्राइक वन कोर के लेफ्टिनेंट जनरल शौकिन चौहान के नेतृत्व में सेना ने गुरुवार को बारिश के दौरान नदी के दूसरी ओर छिपे दुश्मनों को खदेड़ने, परास्त करने का अभ्यास किया। सेना क्षेत्र में यमुना नदी किनारे आपरेशन मेघ प्रहार के नाम से किए गए युद्धाभ्यास में हिसार स्थित मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री और पंजाब के भटिंडा में स्थित इंजीनियर्स रेजीमेंट के जवानों ने भी हिस्सा लिया। दो हेलीकाप्टर, रूस निर्मित 10 बीएमपी-2 और दो टी-90 टैंक का प्रयोग किया गया।
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लेफ्टिनेंट जनरल शौकिन चौहान ने बताया कि देश के पंजाब, हिमाचल और अन्य मैदानी इलाकों में नदियों के दूसरी ओर दुश्मन के सैनिक बंकर बना लेते हैं। उन्हें नदी किनारे जाकर खदेड़ना मुश्किल काम है। इसीलिए नदी पार कर हथियार, टैंक ले जाने और ऑपरेशन पूरा करने का अभ्यास किया गया।
बीएमपी-2: 10 जवान कर सकते हैं फायरिंग
रूस निर्मित युद्धपोत बीएमपी-2 के बारे में कमांडिंग ऑफिसर कर्नल विशाल देव ने बताया कि इसमें 10 जवान, चालक सहित 13 लोगों के सवार होने और गोला-बारूद की जगह होती है। ये पानी की सतह पर चलता है। इसमें लगी अत्याधुनिक दूरबीनों से नदी किनारे छिपे दुश्मनों का पता लगाया जा सकता है। लोहे की मोटी चादरों से इसे सुरक्षा दी गई है।
पानी में लड़ाई का प्रदर्शन
अभ्यास के दौरान पानी के अंदर प्रहार करने, दुश्मनों को बंधक बनाने, बंधक लोगों के लोहे बंधन काटने, बेल्डिंग करने आदि का प्रदर्शन किया गया। स्कू बा डाइवर सैनिक ने बताया कि वे समुद्री लुटेरों से लेकर खतरनाक नदियों में दुश्मनों से लड़ने की ट्रेनिंग लेकर आए हैं।
एक सप्ताह से बरसात में कर रहे थे अभ्यास
ऑपरेशन मेघा प्रहार के एक सप्ताह पहले से यमुना किनारे सैनिक अभ्यास कर रहे थे। फाइनल गुरुवार को किया गया।
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ऑपरेशन शुरू हुआ और जवानों ने कुछ ही समय में यमुना नदी पर पुल बना दिया। इससे होकर टी-90 टैंक नदी पार पहुंचे। यहां दुश्मन के सैनिक बंकरों में छिपे थे। इसके बाद रूस निर्मित 10 बीएमपी-2 टैंक ने नदी में से ही दुश्मनों पर फायरिंग शुरू कर दी। विवश दुश्मन ने हथियार डाल दिए। एक घंटे तक चले ऑपरेशन मेघ प्रहार में 450 जवानों ने 20 टोलियां बनाकर काम किया।
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स्ट्राइक वन कोर के लेफ्टिनेंट जनरल शौकिन चौहान के नेतृत्व में सेना ने गुरुवार को बारिश के दौरान नदी के दूसरी ओर छिपे दुश्मनों को खदेड़ने, परास्त करने का अभ्यास किया। सेना क्षेत्र में यमुना नदी किनारे आपरेशन मेघ प्रहार के नाम से किए गए युद्धाभ्यास में हिसार स्थित मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री और पंजाब के भटिंडा में स्थित इंजीनियर्स रेजीमेंट के जवानों ने भी हिस्सा लिया। दो हेलीकाप्टर, रूस निर्मित 10 बीएमपी-2 और दो टी-90 टैंक का प्रयोग किया गया।
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लेफ्टिनेंट जनरल शौकिन चौहान ने बताया कि देश के पंजाब, हिमाचल और अन्य मैदानी इलाकों में नदियों के दूसरी ओर दुश्मन के सैनिक बंकर बना लेते हैं। उन्हें नदी किनारे जाकर खदेड़ना मुश्किल काम है। इसीलिए नदी पार कर हथियार, टैंक ले जाने और ऑपरेशन पूरा करने का अभ्यास किया गया।
बीएमपी-2: 10 जवान कर सकते हैं फायरिंग
रूस निर्मित युद्धपोत बीएमपी-2 के बारे में कमांडिंग ऑफिसर कर्नल विशाल देव ने बताया कि इसमें 10 जवान, चालक सहित 13 लोगों के सवार होने और गोला-बारूद की जगह होती है। ये पानी की सतह पर चलता है। इसमें लगी अत्याधुनिक दूरबीनों से नदी किनारे छिपे दुश्मनों का पता लगाया जा सकता है। लोहे की मोटी चादरों से इसे सुरक्षा दी गई है।
पानी में लड़ाई का प्रदर्शन
अभ्यास के दौरान पानी के अंदर प्रहार करने, दुश्मनों को बंधक बनाने, बंधक लोगों के लोहे बंधन काटने, बेल्डिंग करने आदि का प्रदर्शन किया गया। स्कू बा डाइवर सैनिक ने बताया कि वे समुद्री लुटेरों से लेकर खतरनाक नदियों में दुश्मनों से लड़ने की ट्रेनिंग लेकर आए हैं।
एक सप्ताह से बरसात में कर रहे थे अभ्यास
ऑपरेशन मेघा प्रहार के एक सप्ताह पहले से यमुना किनारे सैनिक अभ्यास कर रहे थे। फाइनल गुरुवार को किया गया।