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जुलूस की अनुमति न दिए जाने से मुस्लिम समाज में रोष
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वृंदावन। जश्ने-ए- ईदमिलादुन्नबी के मौके पर प्रशासन ने जुलूस की अनुमति न दिए जाने से मुस्लिम समाज में रोष है। समाज के लोगों ने काली पट्टी बांधकर मथुरा दरवाजा स्थित शाही मस्जिद के सामने मौन प्रदर्शन किया। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर अनुमति नहीं दी है।
इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद सल्ल के जन्मदिवस को मुस्लिम समाज में खुशियों के रूप में मनाया जाता है। ईदमिलादुन्नबी पर जश्ने जुलूस निकाला जाता है, लेकिन इस बार कोरोना गाइडलाइंस के तहत जुलूस को अनुमति नहीं दी गई। इसके खिलाफ शाही मस्जिद पर मुस्लिम समाज के लोगों ने मौन प्रदर्शन किया। शाही मस्जिद के इमाम मुहम्मद सलीम रजा ने कहा कि इससे पूर्व कभी भी जुलूस की अनुमति नहीं ली गई थी।
लेकिन इस बार पुलिस प्रशासन ने अनुमति न होने का हवाला देकर जुलूस नहीं निकलने दिया। जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष आजाद कुरैशी ने कहा कि प्रशासन ने किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर यह जुलूस नहीं निकलने दिया गया है। हम अपनी बात शासन स्तर तक पहुंचाने का कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे अच्छा तो हमारा धर्म परिवर्तन करा दें, कम से कम हम लोग पूजा पाठ तो कर लिया करेंगे।
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किसी के धर्म को कुचलना या उनकी धार्मिक रीति रिवाजों का ना होने देना कहां तक जायज है। प्रशासन ने हमारे खुशी के त्योहार को नहीं होने दिया, इससे मुस्लिम समाज आक्रोशित है। वृंदावन में भाई चारे का एक मिसाल कायम रखा है। पता नहीं प्रशासन ने किस के आदेश पर हमें रोका है। इस अवसर पर इकराम, सुलेमान, मोहसिन आदि थे।
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इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद सल्ल के जन्मदिवस को मुस्लिम समाज में खुशियों के रूप में मनाया जाता है। ईदमिलादुन्नबी पर जश्ने जुलूस निकाला जाता है, लेकिन इस बार कोरोना गाइडलाइंस के तहत जुलूस को अनुमति नहीं दी गई। इसके खिलाफ शाही मस्जिद पर मुस्लिम समाज के लोगों ने मौन प्रदर्शन किया। शाही मस्जिद के इमाम मुहम्मद सलीम रजा ने कहा कि इससे पूर्व कभी भी जुलूस की अनुमति नहीं ली गई थी।
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लेकिन इस बार पुलिस प्रशासन ने अनुमति न होने का हवाला देकर जुलूस नहीं निकलने दिया। जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष आजाद कुरैशी ने कहा कि प्रशासन ने किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर यह जुलूस नहीं निकलने दिया गया है। हम अपनी बात शासन स्तर तक पहुंचाने का कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे अच्छा तो हमारा धर्म परिवर्तन करा दें, कम से कम हम लोग पूजा पाठ तो कर लिया करेंगे।
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किसी के धर्म को कुचलना या उनकी धार्मिक रीति रिवाजों का ना होने देना कहां तक जायज है। प्रशासन ने हमारे खुशी के त्योहार को नहीं होने दिया, इससे मुस्लिम समाज आक्रोशित है। वृंदावन में भाई चारे का एक मिसाल कायम रखा है। पता नहीं प्रशासन ने किस के आदेश पर हमें रोका है। इस अवसर पर इकराम, सुलेमान, मोहसिन आदि थे।