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Mathura News: श्रीबांकेबिहारी का लगाया जाएगा कंद, माखन और मीठे नीम की कोपलों का भोग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2026 01:12 AM IST
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An offering of tubers, butter, and tender shoots of sweet neem will be presented to Shri Banke Bihari.
वृंदावन। श्रीबांकेबिहारी मंदिर में 19 मार्च को नवसंवत्सर के दिन श्रीआशुधीर महाराज का 535वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर भगवान श्रीबांकेबिहारी जी को कंद, माखन और मीठे नीम की कोपलों का विशेष भोग लगाया जाएगा।
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ठाकुरजी के सेवायत इतिहासकार आचार्य प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि चैत्र शुक्ला प्रतिपदा को रसिक सम्राट श्रीस्वामी हरिदासजी महाराज के पिता एवं गुरुदेव आशुधीर सारस्वत महाराज का जन्मोत्सव है। इस दिन सुबह श्रीबांकेबिहारी महाराज के मंदिर में गोस्वामी बंधु गोलाकार स्वरुप में बैठेंगे। कुलपुरोहित नवीन सनातन वर्ष 2083 का संपूर्ण फलादेश सुनाकर राशियों का गुणदोष बांचेंगे। इस अवसर पर सेवायतों, यजमानों और प्रबंध कमेटी द्वारा कुलपुरोहित का सम्मान किया जाएगा। इसके बाद भगवान के श्रीचरणों में नववर्ष की वृत्तोत्सव पत्रिका समर्पित कर भक्तों को वितरित की जाएगी। संवाद
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श्रीआशुधीर महाराज का इतिहास

इतिहासकार आचार्य प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी के अनुसार, श्रीआशुधीर महाराज का जन्म ईस्वी सन 1491 में संयुक्त भारतवर्ष के तत्कालीन पंजाब प्रांत स्थित मुल्तान जिले के उच्च ग्राम में हुआ था। उनका लालन-पालन मुल्तान शहर के लाहौरी दरवाजा इलाके के पंजाबी सराय स्थित आवास में हुआ। वर्ष 1507 ईस्वी में आशुधीरजी सपरिवार ब्रजधाम के हरिगढ़ जिले में खैर तहसील के निकटवर्ती गांव में आकर निवास करने लगे। उन्होंने यहां खैरेश्वर महादेव को प्रतिष्ठित किया। इसी गांव में उनके तीन सुपुत्र हुए, जिनमें स्वामी हरिदास भी शामिल थे।
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मीठे नीम के भोग का महत्व
सेवायत आचार्य प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी बताते हैं कि नवसंवत्सर के समय मीठे नीम की पत्तियों का सेवन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह पेट को स्वस्थ रखने, कीटाणुओं को नष्ट करने और मौसम बदलने के दौरान शरीर का विषहरण करने में मदद करता है। उन्होंने बताया कि यह औषधीय गुणों से भरपूर है जो तमाम बीमारियों से रक्षा करता है। मीठे नीम का सेवन शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में भी सहायक है।
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