{"_id":"6abc0480deb331651900f56b","slug":"agreement-between-veterinary-department-and-acf-for-the-development-of-madhuri-kund-farm-mathura-news-c-369-1-mt11023-153456-2026-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: माधुरी कुंड फार्म के विकास के लिए वेटरनिरी-एसीएफ में समझौता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: माधुरी कुंड फार्म के विकास के लिए वेटरनिरी-एसीएफ में समझौता
विज्ञापन
मथुरा। माधुरी कुंड फार्म के वैज्ञानिक और सतत विकास के लिए यूपी पं. दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (डीयूवीएएसयू) और एसीएफ के बीच मंगलवार को समझौता ज्ञापन हुआ। कुलपति डॉ. अभिजित मित्र की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने हस्ताक्षर किए।
वेटरनिरी विवि के कुलसचिव डॉ. अरुण कुमार मदान, निदेशक शोध डॉ. संजीव कुमार सिंह और निदेशक फार्म्स डॉ. यजुवेंद्र सिंह तथा एसीएफ की अभिलाषा राजन और हर्ष मौजूद रहे। समझौते में फार्म की भूमि व संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, अनुसंधान और विकास परियोजनाओं में सहयोग तय किया गया।
एसीएफ जलवायु, पारिस्थितिकी, आजीविका और समुदाय से जुड़े क्षेत्रों में काम करने वाली गैर-लाभकारी संस्था है। दोनों संस्थाएं अपनी वैज्ञानिक और विशेषज्ञता से फार्म में परियोजनाएं विकसित करेंगी। समझौते में भूमि, सर्वेक्षण, भौगोलिक सूचना प्रणाली, ड्रोन चित्र, फोटो-वीडियो, डिजिटल ऊंचाई प्रतिरूप, भौगोलिक निर्देशांक और अन्य भू-स्थानिक आंकड़ों की गोपनीयता तय हुई है। इन्हें वेटरनिरी की पूर्व लिखित अनुमति के बिना साझा नहीं किया जा सकेगा। यह समझौता तीन वर्ष के लिए प्रभावी रहेगा। इससे फार्म में जैव-विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
वेटरनिरी विवि के कुलसचिव डॉ. अरुण कुमार मदान, निदेशक शोध डॉ. संजीव कुमार सिंह और निदेशक फार्म्स डॉ. यजुवेंद्र सिंह तथा एसीएफ की अभिलाषा राजन और हर्ष मौजूद रहे। समझौते में फार्म की भूमि व संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, अनुसंधान और विकास परियोजनाओं में सहयोग तय किया गया।
विज्ञापन
एसीएफ जलवायु, पारिस्थितिकी, आजीविका और समुदाय से जुड़े क्षेत्रों में काम करने वाली गैर-लाभकारी संस्था है। दोनों संस्थाएं अपनी वैज्ञानिक और विशेषज्ञता से फार्म में परियोजनाएं विकसित करेंगी। समझौते में भूमि, सर्वेक्षण, भौगोलिक सूचना प्रणाली, ड्रोन चित्र, फोटो-वीडियो, डिजिटल ऊंचाई प्रतिरूप, भौगोलिक निर्देशांक और अन्य भू-स्थानिक आंकड़ों की गोपनीयता तय हुई है। इन्हें वेटरनिरी की पूर्व लिखित अनुमति के बिना साझा नहीं किया जा सकेगा। यह समझौता तीन वर्ष के लिए प्रभावी रहेगा। इससे फार्म में जैव-विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
विज्ञापन