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आदेश बनेगा यमुना के लिए संजीवनी
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Wed, 14 Jan 2015 12:04 AM IST
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निर्मल यमुना को लेकर ‘अमर उजाला’ का सतत अभियान अब बड़े मुकाम पर पहुंच गया है। यमुना में प्रदूषण को लेकर सख्त नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने यमुना में पूजा सामग्री डालने के खिलाफ कड़ा आदेश जारी किया है। इसके तहत जो कोई भी ऐसा करता पाया जाएगा उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। इस आदेश का ब्रजवासियों ने स्वागत करके इसे निर्मल यमुना की दिशा में अहम कड़ी बताया है।
यमुना के प्रदूषण से मुक्ति के संकल्प के साथ चल रहे आंदोलन का सुखद परिणाम नजर आने लगा है। हाल ही में उच्च न्यायालय की ओर से पालीथिन प्रयोग पर सख्ती के बाद जिला प्रशासन की पालीथिन को रोकने की प्रतिबद्धता और इसे अधिनियम-144 में शामिल करने के बाद समाज में सख्त संदेश गया। मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पवित्र नदी में पूजा सामग्री या फिर कोई ऐसी वस्तु डाले जाने पर सख्त नाराजगी जताते हुए आदेश जारी किया है कि अगर ऐसा करता कोई पकड़ा जाएगा तो उस पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इस आदेश को आंदोलन करने वाले बेहतर कदम बता रहे हैं।
यमुना मुक्तिकरण अभियान में सक्रिय योगदान दे रहे पुष्टिमार्गीय आचार्य पंकज बाबा ने कहा कि यमुना में गंदगी बढ़ रही है। ऐसे में भक्तों को भी इस बात का ख्याल रखना चाहिए, जिसके चलते हमारे आराध्य को कष्ट हो रहा है वो काम हरगिज न करें।
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श्रीमाथुर चतुर्वेद परिषद के महामंत्री राकेश तिवारी कहते हैं कि भावनाएं अपनी जगह है लेकिन हमारे द्वारा पूजा सामग्री डालने से यमुना महारानी का कष्ट बढ़ रहा है तो हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। ट्रिब्यूनल का आदेश एक अच्छा कदम है।
यमुना मुक्तिकरण अभियान के सहसंयोजक सुनील सिंह बोले कि यमुना जन-जन की आराध्य है। मान मंदिर यमुना की अविरल धारा के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहा है। ऐसे में हमारा भी फर्ज है हम ऐसा कुछ न करें जिससे नदी की पवित्रता, सफाई में अड़चन आए।
यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास कहते हैं कि ये आदेश यमुना के लिए संजीवनी का कार्य करेगा। यमुना हमारी जीवनरेखा है। इसमें गंदगी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
ये अच्छी पहल है। पूजा सामग्री के रूप में जो सामान हम यमुना में डालते हैं उससे कहीं न कहीं प्रदूषण ही बढ़ता है। जो हमारी आराध्य यमुना महारानी को तकलीफ देता है। आदेश का सख्ती से पालन होना चाहिए।
-विष्णु प्रिया, राष्ट्रीय प्रचारक यमुना रक्षक दल, मथुरा
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यमुना के प्रदूषण से मुक्ति के संकल्प के साथ चल रहे आंदोलन का सुखद परिणाम नजर आने लगा है। हाल ही में उच्च न्यायालय की ओर से पालीथिन प्रयोग पर सख्ती के बाद जिला प्रशासन की पालीथिन को रोकने की प्रतिबद्धता और इसे अधिनियम-144 में शामिल करने के बाद समाज में सख्त संदेश गया। मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पवित्र नदी में पूजा सामग्री या फिर कोई ऐसी वस्तु डाले जाने पर सख्त नाराजगी जताते हुए आदेश जारी किया है कि अगर ऐसा करता कोई पकड़ा जाएगा तो उस पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इस आदेश को आंदोलन करने वाले बेहतर कदम बता रहे हैं।
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यमुना मुक्तिकरण अभियान में सक्रिय योगदान दे रहे पुष्टिमार्गीय आचार्य पंकज बाबा ने कहा कि यमुना में गंदगी बढ़ रही है। ऐसे में भक्तों को भी इस बात का ख्याल रखना चाहिए, जिसके चलते हमारे आराध्य को कष्ट हो रहा है वो काम हरगिज न करें।
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श्रीमाथुर चतुर्वेद परिषद के महामंत्री राकेश तिवारी कहते हैं कि भावनाएं अपनी जगह है लेकिन हमारे द्वारा पूजा सामग्री डालने से यमुना महारानी का कष्ट बढ़ रहा है तो हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। ट्रिब्यूनल का आदेश एक अच्छा कदम है।
यमुना मुक्तिकरण अभियान के सहसंयोजक सुनील सिंह बोले कि यमुना जन-जन की आराध्य है। मान मंदिर यमुना की अविरल धारा के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहा है। ऐसे में हमारा भी फर्ज है हम ऐसा कुछ न करें जिससे नदी की पवित्रता, सफाई में अड़चन आए।
यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास कहते हैं कि ये आदेश यमुना के लिए संजीवनी का कार्य करेगा। यमुना हमारी जीवनरेखा है। इसमें गंदगी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
ये अच्छी पहल है। पूजा सामग्री के रूप में जो सामान हम यमुना में डालते हैं उससे कहीं न कहीं प्रदूषण ही बढ़ता है। जो हमारी आराध्य यमुना महारानी को तकलीफ देता है। आदेश का सख्ती से पालन होना चाहिए।
-विष्णु प्रिया, राष्ट्रीय प्रचारक यमुना रक्षक दल, मथुरा