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Mathura News: बेटों के जेल जाने के गम में मां चल बसी, बेटी ने किया अंतिम संस्कार
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वृद्धा । फाइल फोटो
कोसीकलां। बुजुर्ग महिला दो साल से पड़ोसियों के साथ हुई मारपीट के मामले में जेल में निरुद्ध तीन बेटों की जमानत कराने के प्रयास करती रही, लेकिन कमजोर पैरवी के कारण बेटे बाहर नहीं आ सके। बुधवार को बेटों के गम में बीमार मां ने दम तोड़ दिया, लेकिन दोनों बेटों को जेल से पैरोल नहीं मिल सकी। इसके बाद बेटी ने ही मां का अंतिम संस्कार किया।
कोटवन निवासी नारायण सिंह की पत्नी रेवती (65 वर्ष) के पति की मृत्यु काफी समय पूर्व हो चुकी है। रेवती की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह किसी तरह गांव में काम कर अपना गुजारा कर रही थी। बुधवार सुबह जब उसके घर का दरवाजा नहीं खुला तो पड़ोसियों ने देखा। दरवाजा खोला तो रेवती घर में मृत पड़ी मिलीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गांव में पड़ोसी से हुए झगड़े में उसके तीन बेटे सत्यवीर, रतन और देव दो वर्ष से जेल में हैं। उनकी जमानत के लिए रेवती ने भरपूर प्रयास किए, लेकिन जमानत नहीं मिल सकी। कमजोर पैरवी और धनाभाव में पुत्रों की जमानत न होने पर वृद्धा पूरी तरह टूट गई थी। कई बार वह जेल में अपने बेटों से मिलने पहुंच जाती थी।
रेवती की मृत्यु के बाद जब उसके पुत्रों के आने की कोई उम्मीद नहीं दिखी तो ग्रामीणों ने उसकी पुत्री आगरा निवासी मीरा को जानकारी दी। इस पर मीरा गांव पहुंच गईं। उन्होंने बुधवार को अदालत में गुहार लगाई मगर अदालत से राहत नहीं इजाजत नहीं मिल सकी। ग्रामीणों ने बताया कि बेटी ने पुलिस से मदद चाही तो पुलिस ने भी मदद करने की जगह वृद्धा के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, जबकि वृद्धा किसी हादसे का शिकार नहीं हुई थीं। इंस्पेक्टर क्राइम उमेश यादव ने बताया कि पुत्री ने मां की मृत्यु की सूचना दी। इस पर वृद्धा के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। बृहस्पतिवार को बेटी ने रेवती का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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कोटवन निवासी नारायण सिंह की पत्नी रेवती (65 वर्ष) के पति की मृत्यु काफी समय पूर्व हो चुकी है। रेवती की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह किसी तरह गांव में काम कर अपना गुजारा कर रही थी। बुधवार सुबह जब उसके घर का दरवाजा नहीं खुला तो पड़ोसियों ने देखा। दरवाजा खोला तो रेवती घर में मृत पड़ी मिलीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गांव में पड़ोसी से हुए झगड़े में उसके तीन बेटे सत्यवीर, रतन और देव दो वर्ष से जेल में हैं। उनकी जमानत के लिए रेवती ने भरपूर प्रयास किए, लेकिन जमानत नहीं मिल सकी। कमजोर पैरवी और धनाभाव में पुत्रों की जमानत न होने पर वृद्धा पूरी तरह टूट गई थी। कई बार वह जेल में अपने बेटों से मिलने पहुंच जाती थी।
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रेवती की मृत्यु के बाद जब उसके पुत्रों के आने की कोई उम्मीद नहीं दिखी तो ग्रामीणों ने उसकी पुत्री आगरा निवासी मीरा को जानकारी दी। इस पर मीरा गांव पहुंच गईं। उन्होंने बुधवार को अदालत में गुहार लगाई मगर अदालत से राहत नहीं इजाजत नहीं मिल सकी। ग्रामीणों ने बताया कि बेटी ने पुलिस से मदद चाही तो पुलिस ने भी मदद करने की जगह वृद्धा के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, जबकि वृद्धा किसी हादसे का शिकार नहीं हुई थीं। इंस्पेक्टर क्राइम उमेश यादव ने बताया कि पुत्री ने मां की मृत्यु की सूचना दी। इस पर वृद्धा के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। बृहस्पतिवार को बेटी ने रेवती का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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