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एनआरएचएम की आयुष फंडिंग में गड़बड़झाला
Mathura
Updated Mon, 25 Nov 2013 05:39 AM IST
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मथुरा। केंद्र सरकार से जब आयुष विभाग के लिए बजट आ रहा है तो फिर उसे कौन चट कर जा रहा है! यह पड़ताल का विषय है लेकिन एनआरएचएम की आयुष फंडिंग में गड़बड़झाले के संकेत जरूर मिल रहे हैं। केंद्र से फंडिंग के बावजूद आयुष विभाग को धेला तक नहीं मिल रहा है। इसका खुलासा हाल ही में केंद्रीय टीम के अफसरों के मथुरा भ्रमण के दौरान हुआ।
फंड के अभाव में आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग, सिद्धि (आयुष) चिकित्सा पद्धति अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही हैं। विभाग के पास चिकित्सकों का टोटा है और जहां चिकित्सक हैं वहां मरीजों को देने के लिए दवाइयां उपलब्ध नहीं। ऐसा नहीं कि इनके लिए फंडिंग नहीं होती। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में केंद्र से इनके लिए मोटा बजट आता है लेकिन विभाग को कुछ हाथ नहीं लग रहा है। केंद्रीय टीम के मथुरा भ्रमण के दौरान अफसरों ने आयुर्वेद चिकित्सालय का हाल देखा तो चकित रह गए। जब उन्होंने बजट के बारे में जानकारी की तो पता चला कि विभाग को सालों से बजट नहीं मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम में शामिल अधिकारियों ने प्रदेश स्तर पर विभाग के निदेशकों से पड़ताल की। इस पर सारा गड़बड़झाला सामने आ गया। टीम ने मामले की रिपोर्ट तैयार की है।
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फंड मिले तो बदले हालात...
- आयुर्वेद की 34 डिस्पेंसरी, अधिकांश के भवन जर्जर
- डिस्पेंसरी पर 34 फार्मासिस्टों की जरूरत, सेवारत हैं मात्र 11
- 34 चिकित्सकों के मुकाबले मात्र 22 चिकित्सक ही दे रहे सेवा
- दवाओं की किल्लत के चलते मरीजों को बाजार से खरीदनी पड़ती दवा
- गरीब, असहाय मरीजों के लिए लोेकल परचेज की नहीं मिल पाती सुविधा
- अस्पताल, डिस्पेंसरी में मेंटेनेंस के लिए भी नहीं कोई व्यवस्था
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अफसरों का कहना
केंद्रीय टीम के अफसरों के निरीक्षण के दौरान फंड न मिलने की बात सामने आई थी। प्रदेश स्तरीय बैठक में ये मुद्दा उठा। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय टीम ने रिपोर्ट तैयार की है।
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- डा. सत्यमित्र, संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य, समन्वयक, केंद्रीय टीम के भ्रमण के दौरान
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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में आने वाली धनराशि में से हमारे विभाग को एक धेला नहीं मिलता है। इसके चलते चिकित्सा व्यवस्था चरमरा रही है। जो बजट आता है उसका इस्तेमाल सीएचसी, पीएचसी पर तैनात आयुष चिकित्सा अधिकारी और चिकित्सा पर लुटा दिया जाता है।
- डा.जीके सिंह, जिला आयुर्वेद, यूनानी अधिकारी, मथुरा।
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बजट मिले तो गरीब असहायों का उपचार, दवाओं का वितरण तथा पद्धति में होने वाली पंचकर्म, क्षार सूत्र (सर्जरी) आदि क्रियाओं से मरीजों को लाभ दिया जा सकता है।
- डा. गोपाल मिश्रा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, आयुर्वेद चिकित्सालय, मथुरा।
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फंड के अभाव में आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग, सिद्धि (आयुष) चिकित्सा पद्धति अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही हैं। विभाग के पास चिकित्सकों का टोटा है और जहां चिकित्सक हैं वहां मरीजों को देने के लिए दवाइयां उपलब्ध नहीं। ऐसा नहीं कि इनके लिए फंडिंग नहीं होती। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में केंद्र से इनके लिए मोटा बजट आता है लेकिन विभाग को कुछ हाथ नहीं लग रहा है। केंद्रीय टीम के मथुरा भ्रमण के दौरान अफसरों ने आयुर्वेद चिकित्सालय का हाल देखा तो चकित रह गए। जब उन्होंने बजट के बारे में जानकारी की तो पता चला कि विभाग को सालों से बजट नहीं मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम में शामिल अधिकारियों ने प्रदेश स्तर पर विभाग के निदेशकों से पड़ताल की। इस पर सारा गड़बड़झाला सामने आ गया। टीम ने मामले की रिपोर्ट तैयार की है।
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फंड मिले तो बदले हालात...
- आयुर्वेद की 34 डिस्पेंसरी, अधिकांश के भवन जर्जर
- डिस्पेंसरी पर 34 फार्मासिस्टों की जरूरत, सेवारत हैं मात्र 11
- 34 चिकित्सकों के मुकाबले मात्र 22 चिकित्सक ही दे रहे सेवा
- दवाओं की किल्लत के चलते मरीजों को बाजार से खरीदनी पड़ती दवा
- गरीब, असहाय मरीजों के लिए लोेकल परचेज की नहीं मिल पाती सुविधा
- अस्पताल, डिस्पेंसरी में मेंटेनेंस के लिए भी नहीं कोई व्यवस्था
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अफसरों का कहना
केंद्रीय टीम के अफसरों के निरीक्षण के दौरान फंड न मिलने की बात सामने आई थी। प्रदेश स्तरीय बैठक में ये मुद्दा उठा। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय टीम ने रिपोर्ट तैयार की है।
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- डा. सत्यमित्र, संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य, समन्वयक, केंद्रीय टीम के भ्रमण के दौरान
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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में आने वाली धनराशि में से हमारे विभाग को एक धेला नहीं मिलता है। इसके चलते चिकित्सा व्यवस्था चरमरा रही है। जो बजट आता है उसका इस्तेमाल सीएचसी, पीएचसी पर तैनात आयुष चिकित्सा अधिकारी और चिकित्सा पर लुटा दिया जाता है।
- डा.जीके सिंह, जिला आयुर्वेद, यूनानी अधिकारी, मथुरा।
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बजट मिले तो गरीब असहायों का उपचार, दवाओं का वितरण तथा पद्धति में होने वाली पंचकर्म, क्षार सूत्र (सर्जरी) आदि क्रियाओं से मरीजों को लाभ दिया जा सकता है।
- डा. गोपाल मिश्रा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, आयुर्वेद चिकित्सालय, मथुरा।