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वृंदावन में शोक का वातावरण
Mathura
Updated Sat, 16 Nov 2013 05:39 AM IST
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वृंदावन। जगद्गुरु संत कृपालु महाराज इहलोक की लीला संवरण कर शुक्रवार को प्रिया प्रियतम के निज गोलोक के वासी हो गए। सुबह लगभग सात बजे जगद्गुरु के गोलोकवास की पहली खबर रमणरेती स्थित वृंदावन स्थित उनके आश्रम श्याया श्याम धाम में पहुंची। यह दु:खद सूचना महाराज श्री की करीबी शिष्या ऊषा मां ने देश-विदेश से आए महाराज श्री के भक्तों को दी। जिसने भी यह दु:खद समाचार सुना, मानो वह अपनी सुध-बुध खो बैठा। बरबस ही उनकी अश्रुधारा बह निकली। जल्द ही यह खबर पूरे ब्रज मंडल में फैल गई और चहुंओर शोक का वातावरण छा गया।
शोकमग्न श्यामा श्याम धाम आश्रम, जगद्गुरु धाम और प्रेम मंदिर के सभी स्टाल बंद कर दिए गए। उनके सभी प्रकल्पों के आगामी कार्यक्रम तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिए गए। पिछले तीन दिनों से उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए चल रहा संकीर्तन महाराजश्री के निधन की सूचना के साथ ही और तीव्र हो गया। प्रेम मंदिर में दर्शन के लिए बाहर से आए भक्तों को मंदिर की सुरक्षा में तैनात गार्ड्स से जगद्गुरु कृपालु महाराज के गोलोकवासी होने की सूचना मिली। इससे दर्शन करने आए भक्त भी शोक में डूब गए। इसके बाद महाराज जी को मनगढ़ ले जाने की जानकारी मिलते ही कई दिन से वृंदावन में रुके हुए श्रद्धालुओं और अनुयायियों पर मानो कुठाराघात हो गया हो। सभी श्रद्धालु जिन्हें वृंदावन की पवित्र भूमि में दर्शनों की आस थी कृपालु महाराज के अंतिम दर्शन के लिए मनगढ़ धाम जाने की तैयारी करने लगे। कृपालु महाराज के आश्रम में श्रद्धालु मानो अपनी सुध-बुध खो बैठे हों। कोई भी कुछ बोलने की हालत में नहीं था। सभी महाराज के सानिध्य में बताए क्षणों को याद कर भावुक होते रहे। राधे-राधे गोविंद-गोविंद राधे और हरे कृष्ण-हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे के महामंत्रों से समूचा आश्रम परिसर गुंजायमान हो रहा था। दोपहर बाद श्यामा श्याम धाम, जगद्गुरु धाम और प्रेम मंदिर के मुख्य द्वार बंद कर दिए गए।
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शोकमग्न श्यामा श्याम धाम आश्रम, जगद्गुरु धाम और प्रेम मंदिर के सभी स्टाल बंद कर दिए गए। उनके सभी प्रकल्पों के आगामी कार्यक्रम तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिए गए। पिछले तीन दिनों से उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए चल रहा संकीर्तन महाराजश्री के निधन की सूचना के साथ ही और तीव्र हो गया। प्रेम मंदिर में दर्शन के लिए बाहर से आए भक्तों को मंदिर की सुरक्षा में तैनात गार्ड्स से जगद्गुरु कृपालु महाराज के गोलोकवासी होने की सूचना मिली। इससे दर्शन करने आए भक्त भी शोक में डूब गए। इसके बाद महाराज जी को मनगढ़ ले जाने की जानकारी मिलते ही कई दिन से वृंदावन में रुके हुए श्रद्धालुओं और अनुयायियों पर मानो कुठाराघात हो गया हो। सभी श्रद्धालु जिन्हें वृंदावन की पवित्र भूमि में दर्शनों की आस थी कृपालु महाराज के अंतिम दर्शन के लिए मनगढ़ धाम जाने की तैयारी करने लगे। कृपालु महाराज के आश्रम में श्रद्धालु मानो अपनी सुध-बुध खो बैठे हों। कोई भी कुछ बोलने की हालत में नहीं था। सभी महाराज के सानिध्य में बताए क्षणों को याद कर भावुक होते रहे। राधे-राधे गोविंद-गोविंद राधे और हरे कृष्ण-हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे के महामंत्रों से समूचा आश्रम परिसर गुंजायमान हो रहा था। दोपहर बाद श्यामा श्याम धाम, जगद्गुरु धाम और प्रेम मंदिर के मुख्य द्वार बंद कर दिए गए।
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