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स्वामी बाबा का पांच दिवसीय मेला आज से शुरू
Mathura
Updated Thu, 14 Nov 2013 05:39 AM IST
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चौमुंहा/छाता। चौमुंहा ब्लाक के गांव तरौली में स्वामी बाबा (भगवान कार्तिकेय) का पांच दिवसीय मेला गुरुवार से शुरू हो रहा है। हजारों श्रद्धालु यहां आकर पवित्र कुंड में स्नान कर मनौती मांगते हैं। मान्यता है कि इस कुंड में स्नान से चर्मरोग ठीक हो जाते हैं।
स्वामी बाबा मंदिर पौराणिक इतिहास को सहेजे है। मान्यता है कि एक बार तारक नाम के राक्षस ने शिव जी से वरदान प्राप्त किया कि वह न पृथ्वी पर मरे, न हवा और न आकाश में। ऐसा वरदान प्राप्त कर तारक उत्पात मचाने लगा। सभी देवताओं ने आराधना कर शिव पुत्र कार्तिकेय को तारक का वध करने को तैयार कर लिया। कार्तिकेय ने गांव तरौली के निकट स्थित सरोवर में यानी पानी में तारक का वध किया। वह न हवा में था और न आकाश, पृथ्वी और पाताल में। यहां जंगल में एक साधु को स्वामी कार्तिकेय ने स्वप्न दिया कि सरोवर में उनकी प्रतिमा है, इसे स्थापित कर मंदिर बनाकर पूजा अर्चना करें। ग्रामीणों ने खोदाई कर मूर्ति प्राप्त कर ली और मंदिर बनाया। तारक के मरने के कारण ही गांव का नाम तरौली पड़ा। मंदिर के महंत राजेंद्र प्रसाद, दाऊ दयाल तथा ताराचंद गौतम ने बताया कि कुंड में स्नान करने से चर्मरोग ठीक हो जाते हैं। बूढ़े बाबा (स्वामी बाबा) के दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मेला के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए प्रशासन से अनुमति प्राप्त हो गई है। वहीं 15, 16 नवंबर को तरौली में कुश्ती दंगल का आयोजन भी किया जाएगा।
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मेला में रहेंगे कडे़ सुरक्षा प्रबंध
छाता। मेला के मद्देनजर गांव तरौली में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई है। मेला प्रभारी सुनील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आरएएफ, पीएसी, स्थानीय पुलिस, महिला सिपाही को तैनात किया गया है। यहां एक पुलिस चौकी भी बनाई गई है। यातायात व्यवस्था ट्रैफिक पुलिस संभालेगी।
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स्वामी बाबा मंदिर पौराणिक इतिहास को सहेजे है। मान्यता है कि एक बार तारक नाम के राक्षस ने शिव जी से वरदान प्राप्त किया कि वह न पृथ्वी पर मरे, न हवा और न आकाश में। ऐसा वरदान प्राप्त कर तारक उत्पात मचाने लगा। सभी देवताओं ने आराधना कर शिव पुत्र कार्तिकेय को तारक का वध करने को तैयार कर लिया। कार्तिकेय ने गांव तरौली के निकट स्थित सरोवर में यानी पानी में तारक का वध किया। वह न हवा में था और न आकाश, पृथ्वी और पाताल में। यहां जंगल में एक साधु को स्वामी कार्तिकेय ने स्वप्न दिया कि सरोवर में उनकी प्रतिमा है, इसे स्थापित कर मंदिर बनाकर पूजा अर्चना करें। ग्रामीणों ने खोदाई कर मूर्ति प्राप्त कर ली और मंदिर बनाया। तारक के मरने के कारण ही गांव का नाम तरौली पड़ा। मंदिर के महंत राजेंद्र प्रसाद, दाऊ दयाल तथा ताराचंद गौतम ने बताया कि कुंड में स्नान करने से चर्मरोग ठीक हो जाते हैं। बूढ़े बाबा (स्वामी बाबा) के दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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मेला के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए प्रशासन से अनुमति प्राप्त हो गई है। वहीं 15, 16 नवंबर को तरौली में कुश्ती दंगल का आयोजन भी किया जाएगा।
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मेला में रहेंगे कडे़ सुरक्षा प्रबंध
छाता। मेला के मद्देनजर गांव तरौली में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई है। मेला प्रभारी सुनील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आरएएफ, पीएसी, स्थानीय पुलिस, महिला सिपाही को तैनात किया गया है। यहां एक पुलिस चौकी भी बनाई गई है। यातायात व्यवस्था ट्रैफिक पुलिस संभालेगी।