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‘मौत की खिचड़ी’ का बदला रंग

Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
Mathura
Mathura Updated Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
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मथुरा/टैंटीगांव। सुरीर कोतवाली के गांव महमूद गढ़ी में बहुचर्चित मौत की खिचड़ी का रंग अब बदल गया है। जहरीली खिचड़ी खाने से गांव के भूरा की पत्नी आशा की मौत हुई थी। तब घर वालों ने कहा था कि महिला ने ही जहरीली खिचड़ी बनाई और बच्चों को खिलाकर खुद भी खा ली थी। अब उसके मायके वालों ने इसे नाटक बताते हुए कोर्ट के आदेश पर पांच लोगों के खिलाफ दहेज हत्या की एफआईआर दर्ज कराई है।
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सुरीर के गांव महमूदगढ़ी निवासी भूरा की अपनी पत्नी आशा से विवाद हो गया था। इसके बाद ऊषा और उसके तीन बच्चों की जहरीली खिचड़ी खा लेने के चलते तबीयत खराब हो गई थी। इसमें उपचार के दौरान आशा की मौत हो गई जबकि बच्चों को बचा लिया गया। मामले में मृतका के भाई देवेंद्र निवासी वृंदावन ने आशा के पति भूरा, सास भगवान देवी, भाई रामवीर, रामवीर की पत्नी गीता और रामवीर के पुत्र रौहतास को दहेज मांगने और न देने पर जहर देकर मार देने का आरोप लगाया है। कोर्ट के आदेश के बाद दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
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