{"_id":"2-48889","slug":"Mathura-48889-2","type":"story","status":"publish","title_hn":"नदियों में शव बहाने की परंपरा गलत: मुरारी बापू ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नदियों में शव बहाने की परंपरा गलत: मुरारी बापू
Mathura
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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गोवर्धन। विश्व विख्यात श्रीराम कथा वाचक मुरारी बापू ने कहा कि ब्रज की पहचान पतित पावनी यमुना से है। यमुना-गंगा को पवित्र रखो। नदियों में शव बहाए जाने की परंपरा गलत है। बिना सोचे समझे परंपराओं को मत ढोओ।
मुरारी बापू गोवर्धन के गांव परासौली स्थित सूरदास की समाधि स्थल गांव परासौली में आयोजित रामकथा कार्यक्रम में तीसरे दिन बोल रहे थे। बापू ने कहा कि नदियों के घाट पर यदि सियासी लोग बस जाएं तो लोग एक-एक बूंद पानी को तरस जाएंगे। तीर्थ और नदियाें को अपवित्र करना बहुत बड़ा अपराध है। यमुना का निरंतर प्रवाह बने यह प्रयास करो। ब्रज की आज यह प्रमुख समस्या है। यमुना के जल की एक बूंद भी ब्रज में नहीं पहुंच पा रही है। प्रवाह को निर्मल बनाए रखने के लिए कोई रास्ता निकालो। गिरिराज, ब्रज चौरासी कोस का शुद्धिकरण आवश्यक है। बापू ने आगे कहा कि गो गंगा, गो यमुना, गो मानस, गो जीवन, गो सृष्टि कुछ यही जीवन जीने का भाव है। ग्रीनहाउस इफेक्ट से लेकर विश्व में पर्यावरण की दिक्कतों का कारण गाय का अनादर है।
बापू ने कहा कि वृंदावन खुद में एक स्वर्ग है। स्वर्ग की इच्छा मत करो। जहां रहते हो उस जगह को स्वर्ग बनाने का प्रयास करो। जो वृंदावन जैसे स्वर्ग को नहीं देख सकता है वह स्वर्ग को भी नर्क बना देगा। रामकथा, गौ सेवा भी स्वर्ग के कार्य हैं। दूषित मानसिकता के लोगों के क्रियाकलापों से तीर्थों को स्वर्ग से कुछ और दिशा में डाल दिया है। बापू ने कहा कि हमारे आसपास जो समस्याएं हैं उनमें प्रमुख नरधेनु है। गो का एक अर्थ होता है इंद्रिय। इंद्रियों को जीतने के लिए हम जो जतन करते हैं। उससे भी अधिक गोमाता पालने को जतन करना चाहिए। गाय पालें, संभालें या गो उत्पादों का उपयोग करें। गंगा की रेणु माने रज सुरधेनु है। गाय की सेवा करने के लिए सेवा भाव होना चाहिए। इस दौरान लोग आध्यात्म रस में डूबे रहे। घर बार छोड़कर ब्रजवास कर रहे गुजराती श्रद्धालुओं की आस्था भी प्रेरणास्पद बनी हुई है।
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ऑफिस का काम पूजा भाव से करा
एक युवा ने मुझसे पूछा महाराज कि वह क्या पूजा पाठ करें। बापू ने कहा कि ऑफिस का काम पूजा भाव से करो। इसके अलावा रात्रि में यमुनाष्टक का पाठ करके सोया करो। मन में पूजा का भाव बना रहे इसी से कल्याण होगा।
सोचा नहीं बुरा भला...
वशीर बद्र हों, मिर्जा गालिब या फिर आध्यात्मिक संत। सभी के प्रसंग, शायरी को कथा के बीच-बीच में उद्घृत कर बापू लोगों के दिल में उतरते नजर आए। उनकी हर बात को सिद्ध करने को नरसी मेहता, रैदास, सूरदास, मीरा बाई जैसे प्रभु भक्तों के पद और भजन सहायक सामग्री के रूप में दिखे। बापू बोले-सोचा नहीं बुरा भला देखा सुना कुछ भी नहीं, मांग खुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं। यह भाव ही भक्ति के लिए चाहिए। तभी काम बनता है।
कभी-कभी तो मौन भी बोलता हूं!
एक जिज्ञासु ने बापू से सवाल किया कि सूरज रोज उगता है। गंगा रोज बहती है लेकिन वे रोजाना कथा नहीं कहते। बापू बोले सूरज बादलों की ओट में छिपता है इसी तरह वह भी अपनी कुटिया में जब कभी रहते हैं रोजाना कथा कहते हैं। अपनी पोथी राम चरित मानस के वस्त्र भी रोजाना बदलता हूं। कभी-कभी तो मौन भी बोलता हूं। मूक सत्संग भी जरूरी है।
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मुरारी बापू गोवर्धन के गांव परासौली स्थित सूरदास की समाधि स्थल गांव परासौली में आयोजित रामकथा कार्यक्रम में तीसरे दिन बोल रहे थे। बापू ने कहा कि नदियों के घाट पर यदि सियासी लोग बस जाएं तो लोग एक-एक बूंद पानी को तरस जाएंगे। तीर्थ और नदियाें को अपवित्र करना बहुत बड़ा अपराध है। यमुना का निरंतर प्रवाह बने यह प्रयास करो। ब्रज की आज यह प्रमुख समस्या है। यमुना के जल की एक बूंद भी ब्रज में नहीं पहुंच पा रही है। प्रवाह को निर्मल बनाए रखने के लिए कोई रास्ता निकालो। गिरिराज, ब्रज चौरासी कोस का शुद्धिकरण आवश्यक है। बापू ने आगे कहा कि गो गंगा, गो यमुना, गो मानस, गो जीवन, गो सृष्टि कुछ यही जीवन जीने का भाव है। ग्रीनहाउस इफेक्ट से लेकर विश्व में पर्यावरण की दिक्कतों का कारण गाय का अनादर है।
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बापू ने कहा कि वृंदावन खुद में एक स्वर्ग है। स्वर्ग की इच्छा मत करो। जहां रहते हो उस जगह को स्वर्ग बनाने का प्रयास करो। जो वृंदावन जैसे स्वर्ग को नहीं देख सकता है वह स्वर्ग को भी नर्क बना देगा। रामकथा, गौ सेवा भी स्वर्ग के कार्य हैं। दूषित मानसिकता के लोगों के क्रियाकलापों से तीर्थों को स्वर्ग से कुछ और दिशा में डाल दिया है। बापू ने कहा कि हमारे आसपास जो समस्याएं हैं उनमें प्रमुख नरधेनु है। गो का एक अर्थ होता है इंद्रिय। इंद्रियों को जीतने के लिए हम जो जतन करते हैं। उससे भी अधिक गोमाता पालने को जतन करना चाहिए। गाय पालें, संभालें या गो उत्पादों का उपयोग करें। गंगा की रेणु माने रज सुरधेनु है। गाय की सेवा करने के लिए सेवा भाव होना चाहिए। इस दौरान लोग आध्यात्म रस में डूबे रहे। घर बार छोड़कर ब्रजवास कर रहे गुजराती श्रद्धालुओं की आस्था भी प्रेरणास्पद बनी हुई है।
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ऑफिस का काम पूजा भाव से करा
एक युवा ने मुझसे पूछा महाराज कि वह क्या पूजा पाठ करें। बापू ने कहा कि ऑफिस का काम पूजा भाव से करो। इसके अलावा रात्रि में यमुनाष्टक का पाठ करके सोया करो। मन में पूजा का भाव बना रहे इसी से कल्याण होगा।
सोचा नहीं बुरा भला...
वशीर बद्र हों, मिर्जा गालिब या फिर आध्यात्मिक संत। सभी के प्रसंग, शायरी को कथा के बीच-बीच में उद्घृत कर बापू लोगों के दिल में उतरते नजर आए। उनकी हर बात को सिद्ध करने को नरसी मेहता, रैदास, सूरदास, मीरा बाई जैसे प्रभु भक्तों के पद और भजन सहायक सामग्री के रूप में दिखे। बापू बोले-सोचा नहीं बुरा भला देखा सुना कुछ भी नहीं, मांग खुदा से रात दिन तेरे सिवा कुछ भी नहीं। यह भाव ही भक्ति के लिए चाहिए। तभी काम बनता है।
कभी-कभी तो मौन भी बोलता हूं!
एक जिज्ञासु ने बापू से सवाल किया कि सूरज रोज उगता है। गंगा रोज बहती है लेकिन वे रोजाना कथा नहीं कहते। बापू बोले सूरज बादलों की ओट में छिपता है इसी तरह वह भी अपनी कुटिया में जब कभी रहते हैं रोजाना कथा कहते हैं। अपनी पोथी राम चरित मानस के वस्त्र भी रोजाना बदलता हूं। कभी-कभी तो मौन भी बोलता हूं। मूक सत्संग भी जरूरी है।